आचार्य बालकृष्ण से इतनी शत्रुता क्यों?

यद्यपि मैं पतंजलि, रामदेव और बालकृष्ण इत्यादि के बारे में उतना ही जानता हूँ जितना कि अखबार या सर्वसुलभ पत्रिकाओं में छपा होगा।

यह भी स्पष्ट कर दूँ कि न ही मैं व्योमकेश बख्शी हूँ, न ही शर्लाक होम्स और हाँ, न ही जेम्स बॉण्ड या अजीत डोभाल।

तो मेरे पास ज्ञान सीमित है, आपकी तरह अथाह नहीं कि मैं दिवंगत हो गए अरुण जेटली को अपशब्द कहूँ या अस्पताल में भर्ती आचार्य बालकृष्ण के बारे में अपना गूढ़ ज्ञान उगलूं।

एक सत्य और स्पष्ट कर दूँ कि मेरा उपरोक्त व्यक्तियों या संस्था से भी उतना ही प्रगाढ़ नाता है जितना कि आपका अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से है।

तथापि मैं आपसे यह प्रश्न पूछना चाहता हूँ कि रामदेव, बालकृष्ण या पतंजलि ने आपका क्या लूटा है? कब आपको कट्टे की नोक पर एटीएम ले जाकर आपके सारे पैसे छीन लिए?

ध्यातव्य होना चाहिए आपको कि यह जो 21 जून को पूरा विश्व, ‘विश्व योग दिवस’ मना रहा है, उसमें रामदेव की भूमिका, चंद्रयान छोड़ने में आपकी भूमिका के ठीक करोड़ों गुना अधिक है। यदि मैं सरल तथा अपनी भाषा में कहूँ, तो ‘विश्व योग दिवस’ का सर्वाधिक श्रेय ‘रामदेव’ को ही जाता है।

यदि रामदेव और बालकृष्ण, आपकी परिभाषा के अनुसार ‘सच्चे योगी’ बनते तो ही आप उनका सम्मान करते?

ठीक भी है, आप सही स्थान पर हैं परन्तु, ‘सच्चा योगी’ आप किसको मानते हैं?

स्वामी रामकृष्ण को? जिन्होंने काली माता के साक्षात् दर्शन कर लिए थे, जो विवेकानंद के गुरु थे, परन्तु वे कैंसर की वजह से असमय मरे।

विवेकानंद, महान योगी, परन्तु हमारी उम्र में मर गए।

मदर टेरेसा, जिसको ‘सैंट’ की पदवी भी दी गई, जो ईसा मसीह के नाम पर छूकर सबको ठीक कर देती थी, वो भी अपने आखिरी दिनों में अस्पताल में तड़प तड़प कर मरी। स्वयं को छूकर स्वयं को स्वस्थ क्यों नहीं कर लिया?

खैर, इनके स्वयं के ईसा मसीह महाराज, लटका दिए गए, और कुछ न कर पाए बेचारे ‘परमेश्वर पुत्र’।

और सबसे गजब के हमारे चुमम्मद साहब, जिनको कितनी क्रूरता से उनके ही अनुयायियों ने मौत दी, वो आज भी प्रत्येक वर्ष ‘चुहर्रम’ के दिन दिख जाता है।

तो मेरा प्रश्न केवल इतना ही है, कि आचार्य बालकृष्ण से इतनी शत्रुता क्यों? क्या उपरोक्त महाविभूतियों की तरह इन्होने स्वयं को गॉड या फैगम्बर घोषित किया? क्या इन्होने कहा कि मैं तुम्हें छू कर तुम्हारा दुःख हर लूँगा? क्या इन्होने भभूत और ताबीज बांटे?

होश में आइये! यदि ये व्यापारी ही हैं तो भी इन्होने आपको धोखा नहीं दिया है। आप मत खरीदिये इनका उत्पाद, क्या इन्होने आपके पैर पकड़े? यदि नहीं, और फिर भी आप बुराई कर रहे हैं तो बहुत क्यूट हैं। आप ‘विरोधियों के बहकावे’ में आ चुके हैं, आपकी बुद्धि दो कौड़ी की हो चुकी है।

आप केवल मुझे इतना बता दीजिये कि ‘आप विरोध किस बात का कर रहे हैं?’

फेयर एंड लवली से आप गोरे हो गए? लम्बाई वाली दवाओं से आप सात फुट के हो गए? कॉम्प्लेन इत्यादि से आपके बच्चे नासा में पहुँच गए? आंय?

नहीं न?

तो फिर यदि आपको पतंजलि से फायदा नहीं हुआ तो भाई, रामदेव कैसे दोषी हुआ? यदि उसके उत्पाद से आप ‘अंग्रेज़’ जैसे गोरे नहीं हुए, तो इस बात का शुक्र मनाइए कि केमिकल की वजह से ‘चर्मरोग’ का शिकार भी नहीं हुए।

उसने भारत का पैसा भारत के लोगों की सहायता से भारत में ही रोका, यदि पसेरी भर भी बुद्धि है आपमें तो आप यह समझ जायेंगे।

रामदेव की वजह से आपने आयुर्वेद का ‘आ’ जानना आरम्भ किया है। हर बात पर विरोध तथा ज्ञान की उल्टी करना आवश्यक नहीं बंधु!

क्योंकि अतिबुद्धिमान कौआ अंत में *@# ही खाता है। क्या खाता है, समझ तो गए ही होंगे।

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