वियाग्रा जैसी अंग्रेज़ी दवाई के सेवन से लाख बेहतर है आयुर्वेद का यह नुस्खा

आज जो नुस्खा मैं आप सबके सामने लाया हूं बहुत ही जबरदस्त नुस्खा है। यह नया नुस्खा सर्दियों में लेने के लिए और विलासी पुरुषों के लिए है। मैं बता दूं आपको कि जो ये नुस्खा बनाने में जो कुछ भी इस्तेमाल हुआ है वो सभी आयुर्वेद की महाशक्तिशाली भस्मों और जड़ी से मिलकर तैयार हुई है।

ये इतनी जबरदस्त है कि जो भी पुरुष इसका सेवन करेगा वो केवल 7 या 8 दिन के सेवन मात्र से ही अपने आपको संभोग करने से रोक नहीं पायेगा। क्योंकि ये शरीर में इतना ज्यादा सैक्सपावर को जागृत करती है। इसके सेवन से हमारी शरीर के सप्त धातुओं का निर्माण तथा कार्यक्षमता की वृद्धि होती है।

मैंने ये नुस्खा 5 अलग अलग पुरुषों को दिया और जिसमें छटा मैं स्वयं था। और सभी का परिणाम आश्चर्यजनक आये। सभी ने इस नुस्खे को सराहा है। अब मैं आपको बताता हूं कि ये नुस्खे के क्या क्या कार्य है –

1. जबरदस्त सैक्सपावर का इजाफा करना
2. शरीर की सप्त धातुओं का नव निर्माण
3. शीतल पड़ी इंद्रियो को दोबारा से जोश में लाना
4. त्वचा में चमक
5. चेहरे पर ओज
6. शारीरिक और मानसिक थकान को दूर करना
7. मांसपेशियों में अथाह शक्ति का निर्माण
8. वीर्य को शहद जैसा गाढ़ा बनाना
9. बारीक से बारीक नसों में भी रक्त प्रवाह करना
10. ठण्ड से बचाव
11. वीर्य की शुद्धिकरण करना तथा शुक्रणुओं के आकार को सही करना
12. जबरदस्त कामोत्तेजक औषधि

ये सब ये दवा मिलकर करती है। ये बाजार में मिलने वाली अंग्रेजी और नशीली दवाओं से कई हज़ार गुना बेहतर है। ये एक दम सुरक्षित है और इसके कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं है। बशर्ते इसे ठीक ढंग से बनाया गया हो।
क्योंकि इसे बनाते वक्त मात्रा का और बनाने के तरीके का खास ध्यान रखना आवश्यक है। क्योंकि इसे बनाने में जो भी औषधि इस्तेमाल हुई है वो सब आयुर्वेद की महाशक्तिशाली औषधि है। जिनकी पावर बेजोड़ है। आईये मैं आपको बताता हूं कि इसे बनाने में किन किन औषधि का प्रयोग हुआ है।

1. स्वर्ण भस्म 500 मिलीग्राम
2. हीरा भस्म 500मिलीग्राम
3. चांदी भस्म 3 ग्राम
4. नाग भस्म 10 ग्राम
5. स्वर्ण बंग 10 ग्राम
6. रस सिंदूर 10 ग्राम
7. अभ्रक भस्म 2.5 ग्राम
8. वीर्यस्तम्भवन वटी स्वर्ण 20 ग्राम
9. कामचूड़ामणि रस 20मिलीग्राम
10. वृहत बंगेश्वर रस स्वर्ण 15 ग्राम
11. कुकुटंतवक भस्म 10ग्राम
12. बसंतकुसुमाकर रस स्वर्ण 20 ग्राम
13. पूर्णचंद्र रस स्वर्ण 15 ग्राम
14. सिद्ध मकरध्वज 10 ग्राम
15. मकरध्वज गुटिका स्वर्ण 10 ग्राम
16. केसर ईरानी 2 ग्राम

तो दोस्तों इन सब से मिलकर मैंने इस पावरफुल नुस्खे को बनाया है। इसे बनाने में बहुत ही मेहनत और समय का काम है। जैसा कि आप इसके नाम देख कर ही समझ गए होंगे कि ये नुस्खा कितना जबरदस्त होगा।

ये जबरदस्त के साथ साथ महँगा भी बहुत बनता है क्योंकि इसमें बनाने से जो भस्में औषधि इस्तेमाल हुई है वो बहुत महंगी भी आती है। लेकिन जिसने ये नुस्खा खा लिया सर्दी सर्दी दो महीने बस। सारी उम्र इस नुस्खे को वो भूलेगा नहीं। क्योंकि ये है ही इतना पावरफुल नुस्खा। नस नस में रोम रोम में एक अलग ही ऊर्जा का संचार करता है ये नुस्खा।

जैसा कि मैंने ऊपर भी बताया कि इसके केवल 7 से 10 दिनों के ही सेवन मात्र से इतनी कामोत्तेजक शक्ति आ जाती है कि व्यक्ति को अपने आपको रोक पाना संभव नहीं है।

और ये केवल एक ही ऐसा नुस्खा है जिसके सेवन के साथ साथ आप रतिक्रिया का आनंद भी उठा सकते हैं। नहीं तो दूसरे नुस्खों में आपको इस बात का परहेज रखना होता है। पुरुष ज्यादा वीर्य स्खलन की वजह से आई कमजोरी से इस नुस्खे का सेवन करके महापरोपकारी गुण पा सकता है।

अब मैं इसे बनाने का तरीका बताता हूं। सिद्ध मकरध्वज को एक खरल में डालकर कम से कम आधा घंटे तक हल्के हाथ से पीसे, इसे तब तक रगड़ें जब तक कि इसका रंग बदल न जाये। उसके बाद उसमें 2- 2 बूंद शुद्ध शहद डालते जाइये ओर से खरल करते जाईये जब तक कि वो सूख कर नरम ना हो जाये।

और ऐसा आपको रोजाना 3 दिन तक करना है और शहद डालने का काम एक दिन में 3 से 4 बार करना है। इससे आपका सिद्ध मकरध्वज मधु मकरध्वज मैं परिवर्तन हो जाएगा।

अब चौथे दिन आपको उसमें रस सिंदूर, स्वर्ण भस्म, हीरा भस्म, चांदी भस्म, डालकर एक घंटे तक हल्के हाथ से खरल करें। उसके बाद यह एक नरम हल्का पाउडर जैसा बन जायेगा। अब उसे ऐसे ही रख देवें। अब आपको एक खरल में बाकी बची सभी भस्म औषधि को डालकर उसमें चांदी का वर्क डालकर रोजाना 2 दिन तक एक एक घंटे तक रगड़ना है। अब जो पहले बनाई थी वो और इसे दोनों को मिक्स करके अच्छी तरह से आधे घंटे तक खरल करके उसमें केसर मिला लेवें, अब आपका नुस्खा बनाकर तैयार हुआ है।

इसे बनाने में बड़ी मेहनत और करीब एक हफ्ते का समय लगता है। पर जो नुस्खा आपके सामने बनकर तैयार होगा वो आयुर्वेद का महाशक्तिशाली योग बनकर तैयार होगा।

अब इसकी 30 पुड़िया बना लें और रोजाना इसकी एक पुड़िया गर्म दूध जिसमें शहद मिला हो उसके साथ रात को सोते वक्त लें। ऊपर से ये दूध पी लें। बस इसका असर शुरू।

सावधानियां:-

बच्चों की पहुँच से इसे दूर रखें।
रोजाना 2 से 3 रति से ज्यादा ना लें।
खटाई, लालमिर्च मसाला वाला खाना, शराब, फ़ास्ट फ़ूड, बासी खाना ऐसे भोजन से दूर रहें।

नोट

इसे आप हमसे भी बनवाकर पूरे भारत में ऑनलाइन कही भी मंगवा सकते हैं।

दोस्तों मैं यही कहना चाहूंगा जो तन जन खाये सो तन जाने। अन्य मादक पदार्थ और नशीली दवाई, अंग्रेजी दवाई के सेवन से तो बेहतर है इसका सेवन करना। जिससे शरीर हृष्ट-पुष्ट बलशाली बनता है। नवयौवन लौटाता है।

– आयुर्वेद डॉक्टर अमर वर्मा

आयुर्वेद आशीर्वाद : महा रसेन्द्र चूड़ामणि रस

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