राष्ट्रवाद/ हिंदुत्व के प्रतीक और शांतिप्रिय लोगों की संवेदनशीलता

फेसबुक पर लोग जिस बात पर सबसे ज्यादा आहत होते हैं, वह है लोगों का फ़र्ज़ी आईडी से इनबॉक्स या कमेंट्स बॉक्स में आकर उनसे अमर्यादित/अशोभनीय बाते करना।

इससे उन लोगों का उद्देश्य दूसरों के मान और प्रतिष्ठा को सार्वजनिक रुप से चोट पहुंचाना होता है। फेसबुक पर यह नित्य ही देखा जाता है।

इस फ़र्ज़ी आईडी की एक और विधा होती है, वह यह कि जिस व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से आहत करना है, उनकी ही फ़र्ज़ी आईडी बना कर, लोगों से अशोभनीय और अमर्यादित बातें कर के, समाज में बदनाम करना है। इसके भी कई उदाहरण आपको यहां पर मिल जायेंगे।

जहां लोग इस सब विधा का जलन कुढ़न में, लोगों को अपमानित करने के लिये उपयोग करते हैं, वहीं पर देश और समाज में विघटन को हवा देने के लिये, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के प्रतीकों को कलुषित करने का प्रयास, विपक्षियों द्वारा भी खूब किया जा रहा है।

इसी कड़ी में, बाबा रामदेव के सहयोगी व पतंजलि आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण @Ach_Balkrishna जी की भी फर्जी बना डाली गई और उस आईडी के द्वारा, बालकृष्ण जी के फेसबुक के अनुयायियों से अश्लील व अशोभनीय चैटिंग करनी शुरू कर दी गई।

जैसा कि होना ही था, उनके अनुयायियों में बालकृष्ण जी की ओछी हरकत से रोष फट पड़ा और इसकी शिकायतें पतंजलि में पहुंचने लगीं।

जब आचार्य बालकृष्ण ने इन आ रही शिकायतों का संज्ञान लिया और पता करवाया तो पता चला कि किसी ने फेसबुक पर उनकी फ़र्ज़ी प्रोफइल बना दी है और उसी फ़र्ज़ी आईडी से यह सब हरकत हो रही है।

आचार्य बालकृष्ण की तरफ से नोयडा सेक्टर 20 के थाने में इसके खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद, पुलिस ने इस मामले जी पूरी जांच की और अंततोगत्वा आचार्य बालकृष्ण की फ़र्ज़ी आईडी बनाने वाले को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस ने फ़र्ज़ी आईडी बनाकर आचार्य बालकृष्ण की अस्मिता को ठेस पहुंचाने के जुर्म में सहारनपुर के निवासी मौहम्मद ज़ीशान पुत्र इस्लाम को जेल पहुंचा दिया है। शांतिप्रिय समुदाय के ज़ीशान जी के पास से नोयडा पुलिस द्वारा मोबाइल फोन व दो सिम भी बरामद किये हैं।

मैंने इस गिरफ्तारी का उल्लेख यहां इस लिये किया है कि लोग इस तरह की कुत्सित प्रयासों के प्रति संवेदनशील और जागरूक रहें। हिंदुत्व व राष्ट्रवादी प्रतीकों के प्रति शांतिप्रिय समुदाय अति संवेदनशील है।

जो लोग लाखों की संख्या में चल रहे कांवड़ियों की दो, तीन जगह हुई हुड़दंग को लेकर हो हल्ला कर रहे हैं, उनको भी आलोचना करने से पहले यह जरूर सोचना चाहिये कि क्या यह शांतिप्रिय समुदाय का लाखों की कावड़ियों की भीड़ में शामिल हो कर उनको बदनाम करने व अराजक तत्व सिद्ध करने का प्रयास नहीं हो सकता है?

हम अगले लोकसभा चुनाव से पहले के, सबसे संवेदनशील काल में प्रवेश कर चुके हैं और शांतिप्रिय समुदाय द्वारा आपके बीच अशांति पहुंचाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ा जाने वाला है।

यहां आपको ही ज्यादा सावधानी बरतनी है और प्रथम दृष्टया राष्ट्रवाद व हिंदुत्व पर किसी भी हमले या प्रचार को एक सिरे से ही नकारना है। यहां यह नहीं देखना है कि मर्यादा क्या है, कानून क्या है और सत्य क्या है। यहां सिर्फ यह देखना है कि हमें यही मानना है कि हम गलत हो ही नहीं सकते है और हमें उसकी विवेचना व आलोचना अभी नहीं करनी है।

अस्तित्व को निगलने आ रहे दावानल से परिचित हुई दिशाभ्रम में जी रही नस्ल

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