अच्छा हो कि असली आयुर्वेदिक दंतमंजन के बारे में जल्दी समझ लें हिन्दू

“जैसे कि आँवला है, हनी है, और फिर एलो वेरा है, तो वो तो हम घर में भी यूज़ करते ही हैं”

कोलगेट का ‘स्वर्ण वेदशक्ति’ नामक टूथपेस्ट का एड आता है टीवी पर, जिसमें एक मुम्बई में रहने वाले गुजराती सा एक्सेंट लिए एक औरत उपरोक्त वाक्य बोलती हैं।

कोलगेट वेदशक्ति, कोलगेट का एक आयुर्वेदिक प्रोडक्ट है, जो दूसरे ही टूथपेस्ट में लगने वाले केमिकल्स के बजाय प्राकृतिक पदार्थ से बना है।

आज से कुछ साल पहले कोलगेट का ही एक एड आता था, जिसमें फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी एक चश्मे के एक ग्लास पर कोलगेट का पाउडर रगड़ता है, और दूसरे पर काला दंत मंजन (जो बजाज सेवाश्रम का प्रोडक्ट था और है भी, और ग्रामीण भारत में बहुत चलता था)।

काले मंजन वाले कांच पर स्क्रेच आ जाते हैं, और सुनील शेट्टी समझाता है कि सोचिए, आपके दाँतो की क्या हालत होती होगी। और इस तरह से कोलगेट देशी प्रोडक्ट से बेहतर है, समझाया जाता था।

वैसे मैं बाबा रामदेव का कोई समर्थक नहीं, और ना ही मुझे उनके कोई भी प्रोडक्ट विशेष पसंद। पर ‘दंतकान्ति’ ने जो कोहराम मचाया था, उसके कारण कोलगेट, हिंदुस्तान लीवर जैसे बड़े खिलाड़ियों को दाँत रगड़ने के लिए आयुर्वेदिक टूथपेस्ट निकालने पड़े, और जोर जोर से चिल्लाना पड़ा, ‘इसमें आंवला है, हनी है, एलो वेरा है’।

वही सब, जो पहले भारतीयों के नीम दातुन, काले मंजन, नमक सरसों के मिश्रण से दांत साफ करने पर उपहास का पात्र बनाने और हीन भावना से भरने में भरसक प्रयास करते रहे।

ख़बर है कि अमेठी उर्फ ’15 साल में सिंगापुर’ नामक ज़िले के सांसद ’15 साल में सिंगापुर’ ज़िले के किसी शिवमंदिर में पहली बार गए। वैसे जनेऊधारी शिवभक्त आजकल किसी शिव मंदिर को नहीं छोड़ते।

“मैंने कारसेवकों पर गोली चलवाई” – कहने वाले मुलायम के बेटे दुनिया का सबसे बड़ा विष्णु मंदिर बनवाने का आह्वान करते हैं।

दुर्गा मूर्ति विसर्जन रुकवाकर मुहर्रम के ताज़िये निकालने का आदेश देने वाली ममता बनर्जी अब दुर्गा पांडालों को 28 करोड़ दे रही है।

जो इफ़्तारों में कंधों पर अरबी रुमाल डाले रूहअफज़ा पीते पाए जाते थे, वो अब मंदिरों में आरतियां करते नहीं थक रहे हैं।

मोदी ने क्या क्या किया होगा, सब कुछ पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है, पर इस देश के हिंदुओं को जो आवाज़ मिली है, मैं इसके लिए उन्हें बार बार धन्यवाद देता हूँ।

अपने ही देश में 70 साल एक दोयम दर्जे का नागरिक बने रहने के बाद जब उसे ये याद आया कि वो जाति छोड़कर हिन्दू बनकर वोट डालेगा, तो 2011 में साम्प्रदायिक हिंसा बिल लाकर हिन्दू को तोड़ने वाले आज मंदिरों में माथे टिका टिका कर प्याज़ पेट्रोल के भूखे हिंदुओं को रिझा रहे हैं।

हिन्दू असली आयुर्वेदिक दन्तमंजन के बारे में जल्दी समझ लें तो अच्छा है, बाकी ‘आँवला हैं, हनी है, और फिर एलो वेरा भी हैं’।

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