मार्च 2026 के बाद योगी बन सकते हैं प्रधानमंत्री

योगी जी का जन्म 5 जून, 1972 को उत्तराखंड के गढ़वाल में हुआ है। उनका जन्म समय जो पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है, वो दोपहर बारह बजे का है। लेकिन मेरे मित्र और बड़े भाई राजेश प्रताप सिंह ने उनका जन्म समय रात्रि 11:34 बताया है।

राजेश जी कोई ज्योतिषी नहीं हैं, पर ये मूर्धन्य ज्योतिषी के.एन. राव सर के बहुत करीबी हैं। प्रतिदिन शाम का दो-तीन घंटा ये राव साहब की सेवा में उनके घर पर ही व्यतीत करते हैं, वहाँ आनेवाले सभी राजनेता इन्हें बहुत अच्छे से जानते हैं।

राजनीतिक उठापटक की सारी बातें इनके सामने ही होती रहती हैं, इस कारण सत्ता के गलियारों की गुप्त बातें भी इन्हें पहले से ही ज्ञात हो जाता है। यही कारण है कि मैं इनके द्वारा उपलब्ध करवाए गए योगी जी के जन्म समय पर अधिक विश्वास कर रहा हूँ।

अगर ये कुण्डली सही है तो मार्च, 2026 के बाद योगी जी कभी भी प्रधानमंत्री पद के सशक्त दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। बहुत सारे राजनेताओं की कुण्डली में राजयोग खोजने पड़ते हैं, पर योगी जी के कुण्डली में पहली नजर में ही स्पष्ट राजयोग दिखने लगते हैं।

कर्म के दशम भाव का स्वामी मंगल भाग्य व धर्म के नवम भाव के स्वामी शुक्र के साथ जबरदस्त राजयोग का निर्माण किया हुआ है और वो भी बुद्धिमत्ता व मंत्रीपद के भाव पंचम में।

पंचम त्रिकोण का स्वामी बुध चतुर्थ केन्द्र भाव में स्थित है और चतुर्थ केन्द्र भाव का स्वामी शुक्र पंचम त्रिकोण भाव में बैठा है। ये बहुत ही बलवान परिवर्तन योग है, जो इन्हें प्रजापालक शासक के रूप में स्थापित कर रहा है। कुम्भ लग्न का स्वामी पंचम भाव के स्वामी बुध और सप्तम भाव के स्वामी सूर्य के साथ चतुर्थ भाव में बैठकर दशम भाव और लग्न को अपनी शुभ दृष्टि दे रहा है।

कुम्भ लग्न के लिए धनकारक गुरु दो-दो धन स्थान द्वितीय और एकादश का स्वामी स्वयं हो जाने के कारण अति मूल्यवान हो जाता है। ऊपर से गुरु हर प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति कराने वाले भाव एकादश में अपनी मूल त्रिकोण राशि धनु में स्थित होकर पंचम भाव में राजयोग बना रहे मंगल, शुक्र के साथ दृष्टि संबंध स्थापित करते हुए उस राजयोग की तीव्रता को कई गुणा अधिक बलवती कर रहा है।

बेशक चन्द्रमा के दोनों तरफ कोई ग्रह नहीं होने के कारण एक अनिष्टकारी योग केमद्रुम का निर्माण हो रहा है, पर चन्द्रमा मीन राशि में 3 डिग्री के आसपास होने के कारण पुष्कर नवमांश में अपनी स्वराशि कर्क राशि में पड़ रहा है और नवमांश में गुरु उच्च का होकर चन्द्रमा के साथ कर्क राशि में दशम स्थान में बैठा है।

यही नहीं, लग्न कुण्डली में भी गुरु और चन्द्रमा आपस में गजकेसरी योग का निर्माण कर रहे हैं। ऐसे ही अनेक शक्तिशाली योग उनके नवमांश और दशमांश कुण्डली में बने पड़े हैं। इन सबसे के अतिरिक्त, उनके दाहिने पैर पर एक दुर्लभ रेखा है जो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार उन्हें चक्रवर्ती सम्राट बनाती है।

देश के सबसे बड़े सूबे के यशस्वी मुख्यमंत्री और भावी भारत के भास्कर योगी आदित्यनाथ जी को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं।

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