आज़मगढ़ के ‘स्मृति ईरानी’ हैं निरहुआ

जीत और हार लोकतंत्र में अंतिम अंकगणितीय नतीजे हैं जिनका अपना महत्व है और उसे नकारा नहीं जा सकता।

लेकिन नकारा इसे भी नहीं जा सकता कि कोई प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा कैसा?

यह तब और भी ज़रूरी हो जाता है जब आप लंबा सोचने वाले मोदी युग में राजनीति पर सोच-लिख-पढ़ रहे हों और जिस पार्टी के अध्यक्ष अभी भी शाह हों।

इस मामले में आज़मगढ़ जैसी सपा और लोकसभा चुनाव तक गठबंधन के हिस्से की मज़बूत सीट पर सपा मार्गदर्शक मुलायम सिंह उत्तराधिकारी के तौर पर प्रत्याशी अखिलेश यादव जैसे बड़े नाम वाला चुनाव इस मायने में खास रहा कि चुनावी चर्चाओं में बातें निरहुआ से शुरू होकर अखिलेश तक जाती थीं, न कि अखिलेश से।

देश और प्रदेश ने नेशनल टीवी चैनलों की उन प्रायोजित बहसों और पैनलों पर बैठे स्वयंभू महान विश्लेषकों, राजनीतिक ओझा-सोखाओं से भी पार पाते हुए देखा दिनेश लाल यादव निरहुआ को।

अमेठी उदाहरण है कि 2014 लोकसभा चुनाव में मज़बूती से लड़ने के बाद एक राज्यसभा सिटिंग सांसद और मंत्री होते हुए स्मृति ईरानी का अमेठी से सुविधाजनक और व्यवस्थित ढंग से संपर्क बना रहा।

हाथ में संवैधानिक और शासकीय ताकत होने की वजह से ही स्मृति जी अमेठी में अपने स्तर से ग्रामीण इलाकों में विकास के काम 5 सालों में कर सकीं। 14 करोड़ के विकास के काम स्व. मनोहर पर्रिकर के सांसद निधि से कराने का उदाहरण ही काफी है। यह काम स्व. पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह की ग्राम पंचायत में हुए जिसे स्मृति ईरानी ने अपने आग्रह पर स्व. पर्रिकर जी को गोद दिलवा कर कराने का रास्ता बनाया। यह वही सुरेंद्र सिंह थे जिनकी चुनाव के बाद दु:खद हत्या हो गयी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी… निरहुआ को अगले 5 साल आज़मगढ़ में डटे रहने के संवैधानिक एवं शासकीय अवसर दीजिये : आपके माध्यम और दूरदृष्टता से देश को उत्तर प्रदेश से निकला एक बड़ा और जुझारू पिछड़ा वर्ग और उसमें भी खास यादव समाज का भविष्य का राष्ट्रवादी ओबीसी नेता मिलेगा। जो ओबीसी राजनीति में जाति की दूकानों से प्रखरता से लड़ता दिखेगा ही नहीं, उन्हें एक परंपरागत जिले, तहसील और गांव तक के महोत्सव भर में समेटने की संभावना रखता है इसे इस लोकसभा चुनाव के दौरान महसूस किया गया है।

उत्तर प्रदेश में उपचुनाव होने हैं क्योंकि अकेले 11 में से 9 अकेले बीजेपी के सिटिंग विधायक लोकसभा पहुंचे हैं।

बीते कल लखनऊ में दिनेश लाल यादव निरहुआ की भोजपुरी फ़िल्म अभिनेत्री आम्रपाली दूबे के साथ मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात यूं तो उत्तर प्रदेश में भोजपुरी फ़िल्म ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के निर्माण पर कही और बताई जा रही है। लेकिन इस तरह की शिष्टाचार भेंट आगे की बढ़ती राजनैतिक संभावनाओं की भी हो सकती है ऐसी अपेक्षा करने में कोई हर्ज नहीं।

करिये कोई ऐसा इंतजाम कि निरहुआ सटल रहे : मंगल हो या इतवार आज़मगढ़ डटल रहे… आपको एक और स्मृति ईरानी मिल जाएगा 2024 में।

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