योगी विरोधियों… इतना सन्नाटा क्यों है भाई?

उत्तरप्रदेश की 11 विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनावों में 8 पर भारतीय जनता पार्टी+ और 3 पर समाजवादी पार्टी जीती है। पहले इनमें से 9 सीटें भाजपा के पास थीं।

भाजपा को जिस एक सीट की हानि हुई है, वह सीट उसका उम्मीदवार 74 हज़ार से अधिक वोट पाने के बावजूद मात्र 4100 से कुछ अधिक वोटों से हारा है। अतः उक्त पराजय का कोई विशेष महत्व नहीं है। भाजपा के अधिकांश उम्मीदवार 25 से 35 हज़ार वोटों के अन्तर से विजयी हुए हैं।

लेकिन इन उपचुनावों का सबसे उल्लेखनीय परिणाम रामपुर का है क्योंकि 2017 तक इस सीट से आज़म खान को 60 हज़ार से अधिक मतों के अन्तर से जीत मिला करती थी।

इस बार अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतार कर आज़म खान ने अपने पूरे कुनबे के साथ चुनावी जीत के लिए अपनी पूरी ताक़त झोंक दी थी। पूरे प्रदेश के सपाई हैवीवेट, विशेषकर शांतिपसन्द सेक्युलर रामपुर में डेरा डाले हुए थे।

लेकिन आज़म खान की पत्नी को केवल 7716 मतों से जीत मिली और भाजपा उम्मीदवार 71000 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहा।

यह परिणाम बताता है कि 2017 तक किस तरह सरकारी मशीनरी को बंधुआ बनाकर, लोकतंत्र का टेंटुआ दबा कर आज़म खान की विजय की रचना रची जाती थी।

इन उपचुनावों में JNU गैंग के राजनीतिक माई-बाप CPI(M) और CPI ने भी 5 सीटों पर 6 उम्मीदवार उतारे थे। सभी 5 सीटों पर उन सभी 6 उम्मीदवारों की ज़मानत ज़ब्त हो गयी।

उन 5 सीटों पर कुल मतदान हुआ 9 लाख 61 हज़ार 769 लेकिन JNU गैंग के राजनीतिक माई-बाप CPI(M) और CPI के 6 उम्मीदवारों को मिले कुल वोटों की संख्या है केवल 12 हज़ार 62 अर्थात कुल मतदान का केवल 1.25 प्रतिशत।

ध्यान रहे कि यही लोग रोज शाम को न्यूजचैनलों पर बैठकर योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सर्टिफिकेट जारी करने का गोरखधंधा अत्यन्त निर्लज्जता के साथ करते हैं।

लेकिन यूपी में हुए इन 11 उपचुनावों की मीडिया में कहीं कोई चर्चा नहीं कर रहा। इसलिए मैंने शुरू में ही लिखा कि इतना सन्नाटा क्यों है भाई?

याद करिए कि गोरखपुर, फूलपुर, कैराना उपचुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद हफ्तों तक चली न्यूज़चैनली बहसों में भाजपा की चुनावी सम्भावनाओं तथा मुख्यमंत्री योगी की राजनीतिक प्रशासनिक कार्यशैली को लम्बी चौड़ी श्रद्धांजलियों की अंतहीन श्रृंखला लगातार भेंट की गई थी।

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