निर्लज्जता का हर बांध तोड़ने को आतुर है काँग्रेस का राजनीतिक पाखंड

काँग्रेस नेता और हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और पूरी काँग्रेसी फौज कल से मीडिया के समक्ष जोर शोर से यह चीखते हुए राजनीतिक हुड़दंग कर रही है कि… हरियाणा में 5 साल तक सरकार चलाने के बाद क्योंकि भाजपा की सीटें 47 से घटकर 40 हो गईं अर्थात उसकी सीटों की संख्या में लगभग 15 प्रतिशत की कमी हो गई है इसलिए निर्दलीयों का समर्थन लेकर हरियाणा में सरकार बनाने की कोशिश कर के भाजपा लोकतंत्र की हत्या कर रही है, राजनीतिक नैतिकता-मर्यादा की धज्जियां उड़ा रही है।

ज़रा ध्यान दीजिए कि यह आरोप वो भूपिंदर सिंह हुड्डा और उनकी काँग्रेसी फौज लगा रही है जिसे 2005 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में 42.46 प्रतिशत मतों के साथ मिली 67 सीटों की संख्या 2009 के विधानसभा चुनावों में मिले 35 प्रतिशत मतों के साथ घटकर 35 हो गई थी। उसकी सीटों में 32 सीटों की कमी हुई थी। अर्थात उसकी सीटों की संख्या में लगभग 48 प्रतिशत की कमी हुई थी। लेकिन इसके बावजूद इन्हीं भूपिंदर सिंह हुड्डा और उनकी इसी काँग्रेसी फौज ने राजनीतिक तोड़-फोड़, जोड़-तोड़ का राजनीतिक नंगनाच कर के हरियाणा में जिस तरह सरकार बनाई थी, वह शर्मनाक नज़ारा पूरे देश ने देखा था।

इसलिए आज मनोहरलाल खट्टर के खिलाफ राजनीतिक शुचिता का प्रवचन अलाप रहे भूपिंदर सिंह हुड्डा और काँग्रेसी फौज को देखकर यही प्रतीत हो रहा है कि… निर्लज्जता का हर बांध तोड़ने को आतुर है काँग्रेस का राजनीतिक पाखंड…

हरियाणा में 7 सीटें घटने के बावजूद भाजपा की सरकार बनते देख दिल्ली में बिलखते कलपते गुलाम नबी आज़ाद को देख याद आया कि यही गुलाम नबी आज़ाद डेढ़ वर्ष पूर्व 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में काँग्रेस की सीटें 122 से घटकर 80 (लगभग 35 प्रतिशत कम) होने के बावजूद कट्टर राजनीतिक शत्रु जेडी (एस) के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने की काँग्रेसी करतूत के समर्थन में मीडिया के सामने छाती ठोक कर तुगलकी दलील दे रहे थे कि… कर्नाटक की जनता का यही जनादेश है। उन्हीं गुलाम नबी आजाद का राजनीतिक विलाप देखकर यह ना कहूं तो क्या कहूं कि… निर्लज्जता का हर बांध तोड़ने को आतुर है काँग्रेस का राजनीतिक पाखंड…।

अंत में विशेष :

क्योंकि राजनीति को हिमालय पर की जानेवाली तपस्या मानने तथा नैतिकता का सारा ठेका भाजपा की खोपड़ी और कंधों पर लाद देने की राजनीतिक मूर्खता का शिकार मैं नहीं हूं तथा राजनीतिशास्त्र के कालजयी विद्वान, महापण्डित विदुर जी द्वारा स्पष्ट शब्दों में दी गई ‘जैसे से तैसा’ बरतने की सीख-
कृते प्रतिकृतिं कुर्याद्विंसिते प्रतिहिंसितम्।
तत्र दोषं न पश्यामि शठे शाठ्यं समाचरेत्॥
का प्रबल पक्षधर/ समर्थक/ अनुगामी हूं इसलिए हरियाणा में निर्दलीय गोपाल कांडा के समर्थन पर राजनीतिक विधवाविलाप करने वालों को भी जवाब दिया जाएगा।

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