‘उनका’ उद्देश्य है योगी को थकाना

जब तक suspension शब्द termination में नहीं बदलेगा यूपी की कानून व्यवस्था, निचले स्तर पर व्याप्त सुविधा शुल्की भ्रष्टाचार, सड़कों की हालत, शिक्षा की बदहाली व अन्य अव्यवस्थाएं इतनी आसानी से नहीं सुधरने वाली हैं।

दशकों से लूट, भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद में लिप्त रहा शासन प्रशासन अन्यमनस्क भाव से पूरी क्षमता व sincerity से काम न कर मूक असहयोग की राह पर है।

Old habits die hard! कार्यशैली में बदलाव नजर नहीं आ रहा है। शासन प्रशासन का हर एक तबका तरह तरह के असहयोग आन्दोलन में लगा हुआ है।

इनका उद्देश्य योगी को थकाने का है व येन केन प्रकारेण यह संदेश देने का कि योगी शासक के रूप में सफल नहीं हो रहे हैं। इस मुहिम में भाजपा का भी एक विशेष तबका शामिल हुआ सा लगता है!

कमाई नहीं तो फिर नेता गिरी किस काम की! सब लोग योगी और मोदी नहीं हैं, सब नेताओं को अपना परिवार पालना है, अरिजनों-परिजनों का भी ख्याल रखना है। ये आज की भारतीय राजनीति की कड़वी सचाई है।

बड़े बड़े मंचों पर मोटी मोटी मालाएं डलवाते मंत्रीजी लोग! किधर कार्य संस्कृति बदली है? हां, कुछ अपवाद हो सकते हैं।

मंत्रिमंडल मेरिट के आधार पर नहीं अन्य अनेक parameters को ध्यान में रखकर बनाया गया है और योगी को उनसे काम करवाने का जिम्मा सौंपा गया है। योगी इन मंत्रियों को बार बार आगाह व सचेत कर रहे हैं, लेकिन ये पुरानी सिंकी हुई रोटियां हैं, बदलने वाले नहीं।

कमोबेश पुराना मंच माला कल्चर ही चल रहा है। जैसा इन नेताओं ने अतीत की सरकारों में देखा है वैसा ही करने व भोगने की कोशिश में हैं।

इन सारी बाधाओं के बावजूद मुख्यमंत्री योगी ने विगत करीब डेढ़ वर्षों में जितना किया है वह सब क्रांतिकारी व दूरगामी परिणाम देने वाले हैं।

फिर भी कभी कभी मैंने योगी को असहाय जैसे भाव में लोगों को चेतावनी पर चेतावनी देते देखा है। लेकिन ये ढीठ नेता व कर्मचारी सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। इनकी कार्यशैली सुधरे व कार्य संस्कृति बदले तो सब सुधरेगा। लेकिन…

मेरी समझ से हर विभाग में कुछ सौ suspension नहीं, termination ही एक मात्र दवा है इन घाघ अधिकारियों कर्मचारियों की। For extraordinary situations extraordinary action is warranted.

अखिलेश के बाद अब योगी को ठिकाने लगाने सक्रिय है चंटू, बंटू, सोनू और मोनू का गैंग

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