‘चंद्रपुरूष’ आर्मस्ट्रांग के बेटों ने 60 लाख डॉलर में बेची बाप की लाश!

अगर वी आई पी, बड़े नेता और धनाड्य लोगों को सर्दी ज़ुकाम भी हो तो सीधे अमेरिका की ओर भागते हैं। सब यही मानते हैं कि अमेरिका में मरीज़ का इलाज सबसे अच्छा और देखभाल उम्दा तरीके से होती है।

कुछ हद तक यह सही भी है। पर ऐसा नहीं है कि अमेरिका में अस्पताल, डॉक्टर या नर्स की गलती से मरीज़ बेमौत नहीं मरता हो। अन्तर सिर्फ इतना है कि हमारे देश में एक हज़ार लोगों की मौतों मे 430 मौतें अस्पताल, डॉक्टर के गलत डायगोनेसिस या लापरवाही से होती है।

इसके विपरीत अमेरिका में बमुश्किल एक हज़ार मौतों में चार या पांच मौत अस्पताल की गलती से होती है। दुर्भाग्य से चन्द्रमा पर मानवता के पैर रखने वाले अन्तरिक्ष यात्री ‘चन्द्रपुरूष’ नील आर्मस्ट्रॉग उन अभागे मरीजों में से एक हो गए जिनकी मौत अस्पताल की एक साधारण सी नर्स की गलती से हो गई।

हुआ यों कि 82 वर्षीय नील आर्मस्ट्रॉग अगस्त 2012 में चेस्ट में पीड़ा के लिए सिनसिनाटी में एक अस्पताल में भर्ती हुए। डॉक्टरों ने जांच करके यह पाया कि उनके हार्ट की तीन मुख्य नलिकाओं में से एक नली अच्छी थी और दो नलियों में खून का थक्का जमा था।

सामान्य स्थिति में ऐसे ‘एन्जायना’ के मरीजों को पहिले दवाईओं पर रखा जाता है, फिर दवाईयों से खून का थक्का अगर साफ नहीं होता तो एन्जियोग्राफी करके स्टेन्ट डाल कर खून की नली को चौड़ा करके थक्कों को अलग कर दिया जाता है।

ओपन हार्ट सर्जरी मरीज़ की कन्डीशन देखकर की जाती है। 82 साल की आयु में जब तक ज़रूरी न हो, तथा जीवन खतरे में हो तो ही बायपास सर्जरी की जाती है अन्यथा बिलकुल नहीं।

नील आर्मस्ट्रॉग के मामले में ज़रूरी न होते हुए भी डॉक्टरों ने बायपास सर्जरी कर दी। साथ में एक अस्थाई पेसमेकर लगा दिया, जिससे जब तक हार्ट स्वयं से नियमित धड़कन न करने लगे तब तक पेसमेकर की सहायता से हार्ट को चलने में मदद मिलती रहे।

पेस मेकर के बाल से भी बारीक नीले रंग के और नारंगी रंग के दो तार हृदय के ‘परकेन्जी फायबर’ नामक कोशिका तन्तु से चिपका कर रखे गये थे।

नील आर्मस्ट्रॉग अच्छे भी हो रहे थे, अस्पताल के गलियारे में चलने फिरने भी लगे थे। उनकी ज़िन्दगी को किसी तरह का कोई खतरा नहीं था।

अचानक एक दिन नर्स ने स्पन्ज कराते समय ध्यान नहीं दिया और हाथ के झटके से हार्ट में लगे तार को झटका देकर खींच दिया। उसकी गलती का किसी को पता न लगे इस लिये उसने ड्रेसिंग करके तार को छुपा भी दिया।

पेस मेकर का तार हृदय की बाहरी चमडी को चीर कर बाहर आ गया था। इस वजह से ब्लीडिंग होने लगी और हार्ट के चारों तरफ खून जमा होने लगा। अस्पताल में भागदौड़ मच गई।

तुरत फुरत नील को ऑपरेशन रूम में ले गए। पर तब तक बहुत देर हो गई थी। अगर नर्स ने अपनी गल्ती नहीं छुपाई होती और नील आर्मस्ट्रॉग को उसी समय ओ.टी. में ले जाकर तार को जोड़ दिया जाता तो आज नील आर्मस्ट्रॉग हमारे बीच में ज़िन्दा होते।

नील आर्मस्ट्रॉग की पहली पत्नी से ‘इरिक’ और ’मार्क’ नाम के दो पुत्र थे। उन दोनों ने वकील के मार्फत अस्पताल को नोटिस देकर समझौता कर लिया। 60 लाख डॉलर का हर्जाना वसूल करके अस्पताल को क्रिमिनल नेगलिजेन्स के आरोप से मुक्त कर दिया।

कितनी अजब बात है, नील आर्मस्ट्रॉग के लड़कों ने अपने बाप की लाश को 60 लाख डालर में बेच दिया।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY