केवल 10 ऐसे मतदान केंद्रों के नाम देश को बताएं ये मूर्ख/धूर्त…

23 मई का चुनाव परिणाम आने के बाद रजत शर्मा के इंडिया टीवी समेत कुछ न्यूज़ चैनलों पर रातदिन मुसलमान… मुसलमान… का जप इस तरह किया जा रहा है मानो 2019 के लोकसभा चुनाव मुसलमानों की सरकार बनाने के लिए मुसलमानों के द्वारा मुसलमानों के लिए हुए थे।

मानो देश के शेष नागरिकों की उन चुनावों में कोई भूमिका ही नहीं थी। खेद का विषय यह है कि भाजपाई नेताओं प्रवक्ताओं की एक बड़ी फौज इस न्यूज़ चैनली “मुसलमान कीर्तन” में ढोलक मंजीरा बजाने में तन मन से जुटी नज़र आ रही है।

इन सभी न्यूज़ चैनलों और उनके ‘मुसलमान कीर्तन’ में जुटे भाजपाई नेताओं प्रवक्ताओं से एक अनुरोध है कि कृपा कर के पूरे देश में बने 10 लाख 35 हज़ार मतदान केंद्रों में से केवल 10 ऐसे मतदान केंद्रों के नाम देश को बताएं जहां वोट डालने वाले मतदाताओं में 60 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम थे और उन मतदान केंद्रों में भाजपा प्रत्याशी को सर्वाधिक मत मिले हों।

शायद ऐसे एक मतदान केंद्र का नाम भी नहीं बता पाएगी यह फौज। आज यह सवाल इसलिए और अधिक प्रासंगिक है क्योंकि 16 करोड़ मुद्रा लोन, 8 करोड़ उज्ज्वला योजना, 1.5 करोड़ पीएम आवास योजना, 3 करोड़ सौभाग्य योजना के कुल लाभार्थियों में मुस्लिम लाभार्थियों की संख्या उनकी आबादी के अनुपात से कहीं ज्यादा रही है।

उत्तरप्रदेश का उदाहरण देता हूं जहां आबादी लगभग 17% है और इन योजनाओं के लाभार्थियों में उनकी संख्या लगभग 30% रही है। अर्थात मोदी सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति में कोई खोट नहीं था।

जबकि सच यह है कि केवल इस बार 2019 में ही नहीं बल्कि पिछले 5 वर्षों के दौरान उस दलित और पिछड़े वर्ग ने जातीय बंधनों पूर्वाग्रहों की धज्जियां उड़ाते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति का जमकर समर्थन किया है, उसका खुलकर साथ दिया है।

उनके उसी प्रचण्ड समर्थन की बदौलत भाजपाई सत्ता का महल दोबारा खड़ा हुआ है। लेकिन उन बेचारों का कहीं ज़िक्र नहीं हो रहा। केवल रात दिन मुसलमान… मुसलमान… जप रहे न्यूज़ चैनलों के साथ ही साथ बुरी तरह बौराकर भाजपाई नेताओं प्रवक्ताओं को भी मुसलमान… मुसलमान… जपते देखकर हंसी भी आती है और उनकी बुद्धि पर तरस भी आता है।

क्योंकि सच यह भी है कि पूर्ण रूप से सरकार के अधीन रहकर, प्रत्येक सरकारी योजनाओं/ कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देने वाले दूरदर्शन की खबरों से मुसलमान… मुसलमान… नाम का यह कीर्तन पूरी तरह से लापता है। अल्पसंख्यकों के लिए योजनाओं कार्यक्रमों का उतना ही ज़िक्र दूरदर्शन की खबरों में है, जितना किसी भी सरकारी योजनाओं/ कार्यक्रमों का होता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी योजनाओं/ कार्यक्रमों की घोषणा के समय जो बोलना कहना था कह बोल दिया। वो रात दिन मुसलमान… मुसलमान… कीर्तन नहीं कर रहे। सरकार का कोई बड़ा मंत्री रात दिन यह ‘मुसलमान कीर्तन’ नहीं कर रहा।

लेकिन न्यूज़ चैनलों में चेहरा चमकाने को आतुर भाजपाई प्रवक्ताओं और दूसरी तीसरी चौथी पंक्ति के भाजपाई नेताओं में इस ‘मुसलमानी कीर्तन’ करने की होड़ लगी हुई है। उनकी यह मूर्खता बहुत शीघ्र उनकी धूर्तता के रूप में देश की जनता के मन में जगह बना लेगी जिसका परिणाम शुभ नहीं होगा। वो इस चेतावनी को जितनी जल्दी भांप लें उतना बेहतर होगा।

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