गोडसे ने इसलिए की थी गांधी की हत्या!

अब जबकि वोटिंग पूरी हो चुकी है और जनमत EVM में कैद हो चुका है तो गोडसे के मुद्दे पे खुल के लिखा जा सकता है.

हालांकि मैं मानता हूँ कि साध्वी प्रज्ञा का गोडसे पर दिया गया बयान कतई ग़ैर ज़रूरी था, मतलब ये कि दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए उनके स्तर पर उतरना ज़रूरी तो नहीं था, खासकर तब जब भोपाल में वोटिंग हो चुकी थी.

परंतु साथ ही साथ मैं निजी तौर पर तक साध्वी के सहमत हूँ, मेरा मानना है कि चीज़ें इतनी black & White नहीं हैं जितना हमें लगती हैं या जितनी हमें समझा दी गयी हैं.

आज़ादी के बाद से हम से इतिहास की बहुत सी चीज़ें छुपाई गयी हैं. आज जब हम सब 70 साल पुरानी घटना पर अपना निर्णय सुनाने को व्याकुल हो रहे हैं तो कुछ बातें जान ले तो अच्छा होगा, ख़ास तौर पर वो युवा जो अभी अभी बालिग़ हुए हैं-

भारत आज़ाद होते ही तीन खंडों में विभाजित हो गया – पश्चिमी पाकिस्तान, भारत, पूर्वी पाकिस्तान. पूर्वी पाकिस्तान 1971 के बाद से बांग्लादेश बन गया और पाकिस्तान से अलग हो गया. विभाजन का मूल कारण था मुस्लिमों का हिंदुओं के साथ ना रहने की ज़िद.

गांधी जी ने शुरू में तो विभाजन का विरोध किया परंतु अंत में जिन्ना की ज़िद और नेहरु प्रेम के आगे हथियार डाल दिए.

जो भारत भूमि हज़ारों वर्षों के आक्रमणों के बाद भी एक रही थी , टुकड़े टुकड़े हो गयी थी साथ ही टुकड़े टुकड़े हो गया था उन लाखों देश भक्तों का दिल जिन्होंने अपने जीवन की परवाह किए बिना एक अखंड भारत का सपना देखा था.

आप सोच रहे होंगे कि क्या इतनी सी बात गांधी जी की हत्या करने के लिए काफ़ी थी? अगर बात इतने पर रुक जाती तो भी ठीक थी लेकिन, एक तरफ़ रोज़ जहाँ पूर्वी पश्चिमी पाकिस्तान से लाखों हिंदुओ पर अत्याचार की ख़बरें आ रहीं थीं, हिंदू लड़कियों का बलात्कार कर नृशंस हत्या कर दी जा रही थी, हिंदुओं के घर जलाए जा रहे थे, गांधी जी भारत पर इस बात का दबाव बना रहे थे कि ना केवल हिंदू और सिख मुसलमानों के इस कुकृत्य को चुप चाप सह जाएँ बल्कि अपने से अलग हुए इस नए देश को अपने पैरों पर खड़े होने में धन बल और पतन से पूरी सहायता करें.

यूँ तो बँटवारे के बाद भी जिन्ना की बहुत सारी माँगे थी जैसे भारत से 64 करोड़ का तक़ाज़ा इत्यादि, आप में सो जो इच्छुक हो Google करके जान सकते हैं. पर इन सब में जो सबसे ख़तरनाक माँग थी वो ये कि जिन्ना साहब पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) के बीच भारत के बीचों बीच से एक 20 km कॉरिडर माँग रहे जो पाकिस्तान का हिस्सा हो. कल्पना करिए आप दिल्ली से मुंबई जा रहें हो और आपकी ट्रेन भोपाल में 6 घंटे के लिए रोक दी जाए आपका वीज़ा बने, immigration check हो जैसा कि wagha border पर होता है और तब आप की ट्रेन को इस 20 km के पाकिस्तान से गुज़रने दिया जाए. ये एक scenario था बाक़ी क्या क्या होता आप ख़ुद कल्पना कर सकते हैं.

स्वाभाविक है ऐसी किसी भी माँग को भारत के लिए स्वीकार करना कितना कठिन था.पटेल जी की वजह से बात आगे नहीं बढ़ रही थी. लेकिन तब गांधी जी ने पाकिस्तान के पक्ष में अपना हठ योग प्रारम्भ किया. वो इस बात पर अड़ गए कि हमें पाकिस्तानी भाइयों की बात को मान लेना चाहिए, उन पाकिस्तानी भाइयों के लिए ये क़ुरबानी देनी चाहिए जिन्होंने अभी अभी हमारी पीठ में छुरा घोप के देश को खंडित किया था.

जब कुछ दिनों तक बात नहीं बनी तो गांधी बाबा ने आमरण अनशन की धमकी दे दी. 1 फ़रवरी 1948 को उन्होंने करांची जाने का मन बनाया और वहीं धरने पर बैठने की ठानी. तब तक के इतिहास को देखते हुए कुछ देश भक्तों को ये समझते देर नहीं लगी कि अगर ये धरना शुरू होगा तो परिणाम क्या होगा.

लोग चिंतित थे मगर कोई कुछ कर नहीं पा रहा था. ऐसे में नाथूराम गोडसे ने 30 January 1948 को, गांधी के पाकिस्तान जाने के एक दिन पहले गांधी जी की हत्या कर दी. हत्या करने के पश्चात् वो भागे नहीं बल्कि पूरी ज़िम्मेदारी ली.

अब आप ख़ुद विचार करें और अगर जी में आए तो उन्हें गालियाँ देते रहें. मैं तो केवल उस हुतात्मा का शुक्रिया ही अदा कर सकता हूँ

गिरिजा शकंर पाठक ( न्यू जर्सी)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY