Monday, October 25, 2021
Authors Posts by सौरभ अनंत

सौरभ अनंत

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फाइन आर्ट्स में स्नातक सौरभ अनंत के भीतर दृश्य, श्रव्य तथा प्रदर्शनकारी कलाओं में स्वाभाविक रुचि होने के कारण संवेदनशीलता, वैचारिकता तथा सौंदर्यबोध का सहज विकास हुआ. भोपाल के भारत भवन के प्रश्रय में संगीत, नृत्य, रंगमंच, चित्र एवं मूर्तिकला की परम्पराओं और नवाचारों से परिचय होता रहा. फलस्वरूप भारतीय नाट्य परंपरा में प्रयोगधर्मिता का समावेश करते हुये ऐसे रंगकर्म की खोज में अग्रसर हुए जिसमें हमारे समय के सामाजिक सरोकारों के साथ गहरा सौंदर्यबोध भी हो. वर्ष 2011 में ‘विहान’ की स्थापना युवा कलाधर्मियों को प्रोत्साहन तथा मंच देने के उद्देश्य से की. प्रख्यात साहित्यकार डॉ धर्मवीर भारती की सुप्रसिद्ध काव्य रचना ‘कनुप्रिया’ से निर्देशन का आरंभ. विजयदान देथा की कहानी ‘सपनप्रिया’, सुभद्रा, लोकशैली पर आधारित ‘एक कहानी बस्तर की’ का निर्देशन. विमल चन्द्र पाण्डे की कहानी पर आधारित नाटक ‘प्रेम पतंगा’ का निर्देशन. महामात्य वत्सराज द्वारा लिखित संस्कृत प्रहसन ‘हास्यचूड़ामणि’ का बुन्देली बोली में रंग निर्देशन. तेत्सुको कोरियानागी के जापानी मूल में लिखी आत्मकथा ‘तोत्तो चान’ का हिंदी में रंग आलेख तथा निर्देशन, ग्रीष्मकालीन बाल नाट्य कार्यशाला में ‘चरनदास चोर’ का निर्देशन. मंच परिकल्पना, रंग सामग्री निर्माण, प्रकाश परिकल्पना इत्यादि मंच नेपथ्य की भूमिकाओं में सक्रिय भूमिका. कई नाट्य कार्यशालाओं, चित्रकला शिविरों का संचालन, बाल रंगकर्म की नियमित गतिविधियाँ. सामाजिक उद्देश्यों की लघु फिल्मों का निर्माण. स्वयं की पेंटिंग्स की प्रदर्शनियाँ इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद इत्यादि देश के कई शहरों में. साहित्य में गहरी रुचि व कविता लेखन.
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