बस राजदंड घुटने ना टेके

रमजान में लॉकडाउन खुलने से जुड़े सारे विवाद के बावजूद मैं शुरुआत करना चाहूँगा उस व्यक्ति को धन्यवाद देने से, जिसकी वजह से हम अभी तक इस विपदा से बचे हुए हैं।

आज की तारीख में अमेरिका में पचास हज़ार से अधिक कोरोना मौतें हुई हैं, और भारत अभी भी 700 के आसपास की संख्या पर टिका है, यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। हम हमेशा से सुनते आए हैं कि भारत में इंसानी ज़िंदगी सस्ती है और अमेरिका में कीमती है। पर हमने देख लिया कि अमेरिका ने अपने नागरिकों को मरने दिया और इकोनॉमी की फिक्र की। वहीं भारत ने अपने नागरिकों की जान की परवाह की और इकोनॉमी पर बोझ डालने का फैसला लिया।

पर सच्चाई यह भी है कि कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी के बावजूद दुनिया में जितने लोग बीमारियों से मरते हैं, उससे अधिक गरीबी से मरते हैं। इसलिए कोई भी देश अनिश्चित काल तक अपनी इकॉनमी को बन्द करके नहीं रख सकता।

मोदी जी, आपने समय पर लॉकडाउन करके देश को एक त्रासदी से बचाये रखा है। यह लॉकडाउन कब करना था यह साहसिक निर्णय आपका था और हम इसके आभारी हैं। अब इसे कब और किस तरह खोलना है यह निर्णय भी आपका ही रहेगा और हम इसमें भी आपके साथ हैं।

हमें यह भी समझ है कि इस लॉकडाउन को देर सबेर खोलना ही होगा, और तब इस एपिडेमिक का एक पीक मिलेगा ही। पर अभी लिए गए आइसोलेशन उपायों का यह लाभ होगा कि यह पीक अपेक्षाकृत छोटा होगा, और आशा है कि हमने इस दौरान उससे निबटने की तैयारी पहले से बेहतर की होगी।

फिर भी एक परसेप्शन बन रहा है कि यह रमजान में दुकानें खोलने का फैसला दबाव में लिया गया फैसला है। संभवतः यह पूरी तरह सही नहीं हो, पर अगर यह परसेप्शन है तो अकारण ही नहीं है।

पिछले छह वर्षों में हमारी सरकार की जो सबसे बड़ी कमज़ोरी रही है वह है संगठित भीड़ और उपद्रव से निबटने में इसकी अक्षमता। हमने कई अवसर देखें हैं जब किसी ना किसी बहाने से भीड़ जुटाकर और उपद्रव फैला कर सरकार की इच्छाशक्ति को जाँचने का प्रयास किया गया है। अभी अभी हमने देखा कि शाहीन बाग की भीड़ ने किस तरह से देश की राजधानी की कानून व्यवस्था को तीन महीने तक बंधक बनाए रखा।

अभी तक के लॉकडाउन में भी अनेक ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिन्होंने इस लॉकडाउन के परिणामों को कमज़ोर किया है। कभी अफवाहें फैला कर भीड़ जुटाई गई तो कहीं डॉक्टरों, पुलिस और नर्सों पर हमले किये गए। और जनता को लगता रहा कि अनेक अवसरों पर उन उपद्रवियों पर अपेक्षित सख्ती नहीं बरती गई। और अगर इस लॉकडाउन के बावजूद अगर कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ ही रही है तो उसके पीछे उसी मानसिकता का हाथ है जो अपनी जान खतरे में डाल कर भी देश को विपत्ति में डालने को प्रतिबद्ध है।

मोदी जी! आप देश को चला रहे हैं। मुझे इसमें विशेष कुछ कहने का अधिकार नहीं बनता कि आप देश को कैसे चलाएँ। मुझे सिर्फ आपको इतना कहना है कि देश इस संकट में आपके साथ मजबूती से खड़ा है। पूरा देश नहीं भी तो लगभग 75-80% देश अवश्य आपके साथ खड़ा है। आपकी लोकप्रियता और क्रेडिबिलिटी विलक्षण है। और यह सिर्फ चुनाव जीतने और वोट लेने तक की बात नहीं है, भावना के स्तर पर जुड़ने की बात है।

आज से पहले मानवता के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ है कि 100 करोड़ लोग एक व्यक्ति के साथ इस तरह खड़े हुए हों। आपने जो कहा वह देश ने माना है। आपने कहा तो थाली बजा ली। घंटी बजाने कहा तो घड़ियाल बजा दिए, शंख फूँक दिए। आपने दिए जलाने को कहा तो दीवाली मना दी। इतना विशाल, सच्चा और भावनात्मक जनसमर्थन आज तक किसी भी राजनेता को नहीं मिला है… तो इतनी बड़ी चुनौती भी किसी को नहीं मिली है।

मोदी जी, हमें विश्वास है कि आपका निर्णय जनहित और राष्ट्रहित में लिया गया है। पर हम आपसे सिर्फ इतना कहना चाहते हैं, अगर यह किसी दबाव में लिया गया है तो आप अपनी शक्ति को याद कीजिये। सौ करोड़ लोग आपके साथ खड़े हैं। आपको किसी दबाव में आने की ज़रूरत नहीं है। आपके कहने से जो देश डेढ़ महीने घर के दरवाज़े बंद करके घर में बैठ सकता है, वह देश आपकी एक आवाज़ पर सड़कों पर भी निकल सकता है। आप कह के तो देखिए…

बस राजदंड घुटने ना टेके, इतनी उम्मीद है आपसे…

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