मुट्ठी भर वामपंथी नहीं, सारे देशवासी देखेंगे, पढ़ेंगे और तय करेंगे कि कौन हैं जावेद अख्तर?

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का वकील बनकर उसके उन विरोधियों को आपने कल ज़ाहिल और बेवकूफ घोषित कर दिया था जिन विरोधियों में आईआईटी के प्रोफेसर तक शामिल हैं।

अपने हिसाब से, अपनी तरफ से उस फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के पक्ष में बहुत मजबूत कुटिल कुतर्क देते हुए कल आपने कहा कि अगर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ हिन्दुस्तान और हिन्दू विरोधी होता तो पाकिस्तानी सैनिक तानाशाह जियाउलहक उसका विरोधी क्यों होता, उसका विरोध क्यों करता?

आज सबसे पहले आपके इसी कुटिल कुतर्क को चिथड़ा करते हुए, उसकी धज्जियां उड़ाते हुए आपके नाम अपनी इस चिट्ठी की शुरुआत कर रहा हूं।

जावेद अख्तर, इसे आपकी धूर्तता समझूं या मूर्खता समझूं, यह फैसला इस खुली चिट्ठी को पढ़ रहे लोगों पर।

अब आपको बताता हूं कि आप कितने अल्पज्ञ हैं। आपको यह भी नहीं मालूम कि जिस जुल्फिकार अली भुट्टो ने कुरान पर हाथ रखकर कसम खाते हुए एलान किया था कि भले हमें घास की रोटी खानी पड़े पर हम एटम बम बनाएंगे और भारत पर कब्ज़ा करेंगे, भले हमे हज़ार साल तक लड़ना पड़े। उस भुट्टो को उसी जनरल जियाउलहक ने फांसी के फंदे पर लटका कर मौत के घाट उतार दिया था, जो जनरल जियाउलहक फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का विरोधी था।

इसलिए आपके हिसाब से इसका मतलब यह होना चाहिए कि फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को जितना प्यार हिन्दुओं और हिन्दुस्तान से था उससे हज़ारों गुना ज्यादा प्यार भुट्टो हिन्दुस्तान और हिन्दूओं से करता रहा होगा।

हालांकि सच क्या है, यह पूरा देश जानता है और पूरी दुनिया भी जानती है, क्योंकि कुरान पर हाथ रखकर भुट्टो द्वारा खाई गई उस कसम की खबर केवल पाकिस्तान और भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में छपी थी।

आप उम्र में तो मुझसे काफी बड़े हैं लेकिन जाहिल और बेवकूफ भी हैं तो शायद आपने वह खबर नहीं पढ़ी हो, इसलिए आज याद दिला दिया।

आपको याद यह भी दिला दूं कि भुट्टो को मौत के घाट उतारने के बाद उसकी बीबी नुसरत और उसकी बेटी बेनज़ीर भुट्टो को भी जनरल जियाउलहक ने क्योंकि बरसों तक जेल में बंद रखा था, इसलिए आपके हिसाब से बेनज़ीर भुट्टो भी हिन्दुओं और हिन्दुस्तान से बहुत प्यार करती होगी। यह अलग बात है कि पूरा देश जानता है कि सच क्या है। लेकिन हो सकता है कि आप जैसा ‘ज्ञानी’ इस सच को आजतक देख सुन और समझ नहीं पाया हो।

दो उदाहरण और देता हूं। जनरल मुशर्रफ ने नवाज़ शरीफ़ को बरसों जेल में बंद रखने के बाद पाकिस्तान से बाहर खदेड़ दिया था और आज इमरान खान भी वही काम नवाज़ शरीफ़ के साथ कर रहा है। जनरल मुशर्रफ को भी पाकिस्तान में सज़ा ए मौत सुना दी गयी है और वो अपनी जान बचाकर पाकिस्तान से फरार हुआ है। लेकिन आपके हिसाब से तो हर हिन्दुस्तानी को यह मान लेना चाहिए कि नवाज़ शरीफ़ और मुशर्रफ, दोनों लोग हिन्दुस्तान और हिन्दूओं से बहुत प्यार करते हैं, इसीलिए उनके साथ पाकिस्तान में ऐसा सुलूक किया जा रहा है।

उदाहरण कई और भी हैं लेकिन मेरे अनुसार आपके कुटिल कुतर्क और धूर्तता और जहालत को पूरी तरह बेनकाब करने के लिए इतने उदाहरण पर्याप्त हैं।

अब आता हूं उस घोर हिन्दुस्तान विरोधी धूर्त फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की कमीनगी पर जिसे आप जैसे वामपंथियों ने कांग्रेसी सरकारों की कृपा से उसी तरह महान बनाकर उससे इस देश की छाती पर मूंग दरवाई जिस तरह हिन्दू देवी-देवताओं और भारत माता के नंगे चित्र बनाकर नीलाम करने वाले एमएफ हुसैन नाम के धूर्त को महान बना कर आप लोगों ने दशकों तक उससे इस देश की छाती पर मूंग दलवाई थी।

जावेद अख्तर, अब आपको उदाहरण देकर बताता हूं कि जिस फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को आप बहुत महान क्रांतिकारी शायर कहते हैं वह क्रांतिकारी नहीं बल्कि महान कायर शायर था और बहुत कुटिल और कम्युनल था, हिन्दुस्तान और हिन्दू विरोधी था। समझाता हूं क्यों कह रहा हूं।

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने क्या कभी एक भी नज़्म या ग़ज़ल पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर बरस रहे कट्टर धर्मान्धता के कहर के खिलाफ लिखी? लिखी हो तो देश को बताओ? उसने इस्लामिक कट्टरता के इस साम्प्रदायिक कहर के खिलाफ कभी मुंह नहीं खोला। जबकि यह सच केवल भारत नहीं पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों पर क्या और कैसा कहर बरपाया जाता रहा है।

पाकिस्तानी पत्रकार सांसद फरहानाज़ इस्पाहनी की वह रिपोर्ट हडसन इंस्टिट्यूट अमेरिका ने प्रकाशित की है जिसके अनुसार 1947 में पाकिस्तान में हिन्दुओं की संख्या लगभग 23 प्रतिशत थी। 2013 तक वह संख्या 3 प्रतिशत रह गई थी। लेकिन इसके अलावा पाकिस्तानी सरकार की ही सेंसस रिपोर्ट का अध्ययन यह बताता है कि 1951 से 1971 के बीच अविभाजित पाकिस्तान में गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों की संख्या में बढ़ोतरी के बजाय लगभग 8-9 प्रतिशत की कमीं हुई थी।

पूरे देश में जब गैर मुस्लिमों पर यह भयंकर अत्याचार हो रहा था तब आपका यह क्रांतिकारी शायर कौन सा कम्बल ओढ़कर कहां सो रहा था? लाखों लोगों पर बरस रहे कट्टर इस्लामिक धर्मान्धता के कहर के खिलाफ उसने कभी एक शब्द क्यों नहीं बोला?

बताता हूं कि वो तब क्या कर रहा था। उस समय वो पाकिस्तानी सत्ता हथियाने के लिए फौजी जनरल अकबर खान के साथ मिलकर पाकिस्तान में तख्तापलट की साज़िश रचते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था और 4 साल की कैद की सज़ा पाया था।

पाकिस्तान छोड़ देने की शर्त के साथ माफी मांगने के बाद 3 साल में ही छूट गया था और भागकर इंग्लैंड चला गया था। उसे जेल किसी क्रांतिकारी कविताई या शायरी के कारण नहीं हुई थी। भुट्टो की चमचागिरी कर फिर पाकिस्तान लौटा था। भुट्टो ने जनरल अयूब खान से सिफारिश कर के आपके क्रांतिकारी शायर को पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय का प्रभार दिलवा दिया था।

1965 तथा 1971 के युद्ध के दौरान आपका क्रांतिकारी शायर पाकिस्तान रेडियो और पाकिस्तानी अखबारों में भारत और भारतीय फौजों के खिलाफ अपनी आग उगलती शायरी से पाकिस्तानी फौज और पाकिस्तानियों के हौसले बुलंद किया करता था।

शर्म नहीं, घिन आती है आप जैसों पर जब भारत के दुश्मन उस गद्दार की बेशर्म चरणवन्दना करते हुए आप जैसों को देखता हूं। इंटरनेट की संचार क्रांति के वर्तमान दौर में यह सारी सूचनाएं सारे तथ्य सैकड़ों पाकिस्तानी वेबसाइटों पर उसकी तारीफों के पुल बांधते हुए उपलब्ध हैं।

उसकी ऐसी करतूतों की सूची बहुत लंबी है इसलिए अंत में आपको यह याद दिलाते हुए बात खत्म करूंगा कि जिस भुट्टो के अहसानों के टुकड़ों पर आपका क्रांतिकारी शायर पला बढ़ा और बचा था, उस भुट्टो को फांसी दिए जाने की खबर मिलते ही जनरल जियाउलहक से लड़ने के बजाय वो यही वाली “हम देखेंगे…” ग़ज़ल लिखकर पाकिस्तान से भाग खड़ा हुआ था।

लेकिन क्योंकि उसका आका भुट्टो मर चुका था इसलिए कुछ ही समय बाद उसके भूखों मरने की नौबत आ गयी थी इसीलिए अपना मुंह बंद रखने की जनरल जियाउलहक की शर्त मानकर उससे समझौता कर के आपका क्रांतिकारी शायर वापस पाकिस्तान आ गया था और लाहौर में अपने घर में खामोशी के साथ 1984 में मर गया था।

जनरल जियाउलहक उससे नफरत इसलिए करता था क्योंकि आपका क्रांतिकारी शायर उस भुट्टो का सबसे बड़ा और खास चमचा था जिस भुट्टो को फांसी पर लटकाने के कुछ महीनों पहले तक जियाउलहक भी भुट्टो का सबसे विश्वसनीय चमचा था, इसलिए भुट्टो के चमचों की फौज के हर खास और बड़े चमचों को ठीक से जानता पहचानता था।

जियाउलहक ने इसीलिए आपके क्रांतिकारी शायर की जुबान बंद करवा दी थी।

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