इनके साथ सख्ती से पेश आइये… बेहद सख्ती से!

वामपंथी ‘इतिहास-तोड़मरोड़कार’ इरफ़ान हबीब ने जब राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को सार्वजनिक मंच पर भाषण देने से रोकने के लिए सड़क-छाप गुंडई और नंगापन दिखाया तो कई बातें पुनः सिद्ध हुईं।

पहली ये कि सारे के सारे वामपंथी नक्सल होते हैं : कुछ शहरी नक्सल तो कुछ जंगल के नक्सल। राज्यपाल को भाषण देने से रोकने के लिए मंच पर किसी नशेड़ी की तरह हाथापाई पर उतारू हो जाने वाला ये इरफ़ान हबीब भी कोई अपवाद नहीं है।

ऐसा नहीं है कि इरफ़ान हबीब ने अपनी लुच्चई पहली बार जग ज़ाहिर की है। प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता के. के. मोहम्मद द्वारा की गयी एक खुदाई, जिससे इरफ़ान की ‘इतिहास-तोड़मरोड़कारी’ को झटका लग रहा था, को प्रकाशित करने से रोकने के लिए इरफ़ान हबीब गुंडई की हद पार कर गया था।

भारतीय इतिहास शोध परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो एम जी एस नारायणन कहते हैं कि इरफ़ान हबीब दारा परिषद की अध्यक्षता के समय संस्थान ने लोकतांत्रिक ढंग से काम करना बंद कर दिया था। नारायणन बताते हैं कि कैसे इरफ़ान हबीब और उसका गिरोह धमकियां देता था और धोखाधड़ी भी करता था, साज़िशों में भी लिप्त रहता था।

के. के. मोहम्मद, जो इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा मान्य, अयोध्या की खुदाई में शामिल रहे, बताते हैं कि कैसे इरफ़ान हबीब उस वामपंथी गिरोह का हिस्सा रहा जिसने इस्लामी अतिवादियों के साथ मिल कर अयोध्या मसले को हल होने से रोकने में अहम भूमिका निभाई।

इरफ़ान हबीब की नंगई इस हद तक बढ़ गयी कि एक सरकारी संस्था का अध्यक्ष होते हुए भी वह अयोध्या मामले में एक पार्टी (बाबरी मस्जिद कमिटी) के पक्ष में खुलेआम खड़ा हो गया था।

इरफ़ान की सड़कछाप गुंडई पर बात करते समय आज एक प्रश्न यह उठा कि आखिर इन वैचारिक दोगले वामपंथियों की चर्चा की ही क्यों जाए, जब देश ने इन्हें चुनावी-चप्पल से मार मार कर इनके तशरीफ़ को ‘लाल’ कर दिया है।

इस बिंदु पर एक मित्र ने बड़ा ही दिलचस्प उत्तर दिया। उसने कहा कि आप जानते हैं कि गली के आवारा कुत्ते सिर्फ भौंकते हैं, कुछ कर नहीं कर सकते। फिर भी इन भौंकते कुत्तों को आप रोटी का टुकडा फेंकते हैं या फिर पत्थर फेंकते हैं ताकि ये भौंकना बंद कर दें ताकि आपको चिड़चिड़ाहट ना हो।

काँग्रेस सत्ता से बाहर हो गयी, हबीब और उसके गिरोह को रोटी का टुकड़ा मिलना बंद हो गया। पर रोटी की आदत इतनी बढ़ गयी थी कि ना मिलने पर इनकी बौखलाहट इस हद तक बढ़ गयी है कि इनके अन्दर का सड़क छाप गुंडा बाहर आने लगा। इसलिए इन आवारा वामपंथियों को अब रोटी के टुकड़े की आदत मत लगाइए, इनके साथ सख्ती से पेश आइये। बेहद सख्ती से!

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