अगर पत्थर फेंकोगे तो जवाब सरकारी गोली से मिलेगा

CAA और NRC का जो विरोध किया जा रहा है वह समझ से परे है। सरकार ने जितना कोई कर सकता है उससे भी आगे जाकर मुसलमानों के संदेह दूर करने की यथाशक्ति से अधिक प्रयास किए हैं। अब उनके पास कहने को यह बात नहीं है कि उनसे कुछ छीना जा रहा है या उनको बेदखल किया जा रहा है। अब उनकी तरफ से विरोध के नाम पर जो भी हो रहा है केवल थेथरई हो रही है।

या फिर, जो बात सब की समझ में आ रही है कि कोई समस्या नहीं है वह फिर भी “हमें इससे तकलीफ होगी” का राग अलापा जा रहा है तो पूरी संभावना है कि आप की तकलीफ ही illegal हो।

सरकार की सीमाएं होती हैं नाम लेने की, लेकिन इतिहास गवाह है सब की करतूतों का। पाकिस्तान और बंगलादेश में गैर मुसलमानों का प्रताड़न हो रहा है यह सत्य है और भारत सरकार इसके लिए मुसलमानों का नाम नहीं ले रही है तो ये डिप्लोमसी हो सकती है बाकी सभी जानते हैं कि उनका प्रताड़न करने वालों का मज़हब क्या है।

यहाँ भारत में भी, जो ज़रा कहीं संख्या क्या बढ़ी तो उत्पीड़न शुरू कर देते हैं, वे पाकिस्तान में क्या करते होंगे – साफ है। प्रताड़न करता कौन है इसका नाम अगर सरकार नहीं ले रही है इसका मतलब यह नहीं होता कि आप खुद को पाक साफ घोषित कर लो। कश्मीर में क्या हुआ हिंदुस्तान भूला नहीं है। मासूमियत का ढोंग बहुत हो गया।

आज इनकी मांग CAA और NRC को आमूलचूल रद्द करने की है, किसी विशेष मुद्दे पर कोई त्रुटि की बात नहीं हो रही। और इसको ले कर ये हिंसा पर उतर आए हैं और इससे गंभीर हिंसा की धमकियाँ दे रहे हैं तो इनके इरादे में ही खोट है।

वैसे यह इनकी एक फेवरिट स्ट्रेटजी रही है, एकबारगी दरिंदगी करो और उसकी याद दिलाकर डराते रहो। सुनन्दा वशिष्ठ ने अमेरिका में अपना बयान क्या दिया, उसे कश्मीरियों के ट्वीट्स जाने लगे – कोई कश्मीरियत नहीं बल्कि असली नीयत ज़ाहिर कराते।

गोधरा के बाद गुजरात हुआ तो ये उसका उपयोग करते रहे । कभी यह भी सोचिए कि अगर गुजरात शांत रहा होता तो ये गुजरात के लोगों को गोधरा की याद दिलाकर धमका भी रहे होते।

कमलेश तिवारी के हत्यारे ने भी यही बताया था कि वो दहशत कायम करने के लिए हत्या का विडियो बनाना चाहता था। यह इनका मूल चरित्र है।

तो अगर ये CAA / NRC के खारिज ही करवाकर मानने की बात करें तो इनके हिंसाचर को योग्य बलप्रयोग से उत्तर देना सरकार का अधिकार ही नहीं बल्कि देश की संप्रभुता तथा बाकी जनता के प्रति उत्तरदायित्व भी है।

और हाँ, हिंसाचार में शामिल कोई मासूम नहीं होता। अगर पत्थर फेंकोगे तो जवाब सरकारी गोली से मिलेगा।

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