महाराष्ट्र : हिंदुत्व की प्रचण्ड विजय के लिए मोदी शाह को कोटि कोटि धन्यवाद

सरकार बने या ना बने, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को कोटि कोटि धन्यवाद, उनका कोटि कोटि आभार…

लेख थोड़ा लंबा है लेकिन अंत तक पूरा पढ़िए ज़रूर। क्योंकि आप वह मर्म तभी समझेंगे, जो हर स्वाभिमानी भारतीय, विशेषकर हिन्दुओं और मुसलमानों को भी समझना अति आवश्यक है..

अंतिम फैसला होना अभी बाकी है लेकिन… यही तो हम चाहते थे… इस देश का हर स्वाभिमानी नागरिक, विशेषकर हर वो हिन्दू, जिसने अपनी आत्मा नीलाम नहीं की थी वो यही चाहता था कि…

राम को गप्प और असली अयोध्या को अफगानिस्तान बताने वाले आज घुटनों पर नहीं झुके हैं बल्कि हिन्दू हिंदुत्व के चरणों पर साष्टांग लोट गए हैं, उसके तलुए चाट रहे हैं और चिल्ला चिल्ला कर कह भी रहे हैं कि इससे ज्यादा कुछ और करना हो तो वो भी करेंगे… बस हमें मोदी से बचाओ… भाजपा से बचाओ… उन्हें सरकार में मत लाओ…

दिमाग के घोड़े ज्यादा तेज़ और दूर तक दौड़ाने की ज़रूरत नहीं है। बस याद करिये कि यही शिवसेना और उसके मुखिया यानि उद्धव ठाकरे के पिता, और आदित्य ठाकरे के पिता के पिता बाल ठाकरे जब लाखों की भीड़ के बीच मंच पर छाती ठोक के कहते थे कि…

शिवसैनिकों द्वारा बाबरी ढांचा नेस्तनाबूद करने पर मुझे गर्व है तथा मुसलमान इस देश के लिए कैंसर हैं तो यही काँग्रेस NCP जलते तवे पर पानी की बूंदों की तरह छनछनाते थे।

सबसे खास बात यह है कि उद्धव और आदित्य क्रमशः आज भी यह नहीं कहते कि हमारे पिता, हमारे पिता के पिता ने गलत कहा था। इसके बजाय वो दोनों कह रहे हैं कि हम क्रमशः अपने पिता, पिता के पिता का सपना पूरा कर रहे हैं। अपने पिता और पिता के पिता का सपना पूरा कर रही उद्धव आदित्य की जोड़ी की इस इच्छापूर्ति के ये काँग्रेस और NCP शत प्रतिशत समर्पण के साथ हंसते हंसते सती होने को बेचैन हो रही हैं।

सबकी चिट्ठियां उजागर हो चुकी हैं, खबरों की झड़ी लगी हुई है कि आंध्र, केरल, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, यूपी, बिहार समेत काँग्रेस की आधा दर्जन राज्य इकाइयां खुलकर विरोध करते हुए कह रही हैं कि शिवसेना की सरकार बनवाने से मुसलमान नाराज़ हो जाएगा। हमारा अपने राज्य में खात्मा हो जाएगा।

लेकिन इस विरोध को ठेंगा दिखाते हुए काँग्रेस झूम कर कह रही है कि नाराज़ होते हैं तो होने दो… हम तो शिवसेना की सरकार उसका मुख्यमंत्री ही बनवाएंगे।

मित्रों यही है वो टर्निंग प्वाइंट…

याद करिये कि ये वही काँग्रेस है जिसने कभी यह नहीं कहा कि रामजन्मभूमि पर मंदिर बनना चाहिए। इसके बजाय काँग्रेसी प्रधानमंत्री ने एलान किया था कि ढहाये गए ढांचे की जगह मस्ज़िद फिर से बनवाएंगे।

ये वही काँग्रेस है जिसकी सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दे आयी थी कि भगवान राम कोरी गप्प और कल्पना मात्र हैं, उनका अस्तित्व ना था ना है।

ये वही काँग्रेस है जिसके अय्यर सरीखे दर्जनों नेता, कहीं मुसलमान नाराज़ ना हो जाएं इसलिए हिन्दुओं से यह कह कर सबूत मांगते थे कि सिद्ध करो कि राम अयोध्या में ही जन्में थे। कहीं मुसलमान नाराज़ ना हो जाएं इसलिए यही नेता यह भी समझाने की कुत्सित कोशिशें करते थे कि ये वो अयोध्या है ही नहीं जहां राम जन्मे थे।

ये वही काँग्रेस है जिसके शासन में हिन्दू देवी देवताओं समेत भारत माता के नंगे चित्र बनाकर नीलाम करने वाले एमएफ हुसैन को इसलिए दंडित नहीं करती थी कि कहीं मुसलमान नाराज़ ना हो जाएं।

मां सीता को रावण की बेटी औऱ भगवान राम की बहन घोषित करने वाली प्रदर्शनी अयोध्या जाकर लगाने वाली शबनम हाशमी को काँग्रेसी सरकार ने इसलिए दंडित नहीं किया कि… कहीं मुसलमान नाराज़ ना हो जाएं… इसके बजाय उस प्रदर्शनी के आयोजन के लिए तत्कालीन काँग्रेसी सरकार के HRD मंत्रालय ने शबनम हाशमी को सरकारी खजाने से मोटी रकम दी थी।

…कहीं मुसलमान नाराज़ ना हो जाएं इसलिए काँग्रेस पिछले 3-4 दशकों से हिन्दुओं की धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक चेतना को घृणित बेशर्मी के साथ बेखौफ होकर आहत कर रही थी… अपमानित कर रही थी… राक्षसी निर्दयता के साथ कुचल रही थी… रौंद रही थी…

लेकिन आज वही काँग्रेस छाती ठोक कर कह रही है कि जो नाराज़ होता है तो उसे नाराज़ होने दो। हम उसी बाल ठाकरे के बेटे की सरकार बनवाएंगे, उसी बाल ठाकरे के बेटे को मुख्यमंत्री बनवाएंगे जिस का कहना था कि शिवसैनिकों द्वारा बाबरी ढांचा नेस्तनाबूद करने पर मुझे गर्व है तथा मुसलमान इस देश के लिए कैंसर हैं।

मित्रों यह परिवर्तन आज नहीं हुआ है। इसकी शुरुआत दो-ढाई वर्ष पूर्व तब हुई थी जब ईसाई मां और पारसी पिता की संतान ने आधा इंच मोटा जनेऊ पहनकर, माथे पर चंदन लीप कर सैकड़ों मंदिरों की देहरी पर अपना माथा रगड़ते हुए ऐलान शुरू कर दिया था कि ‘मैं जनेऊधारी ब्राह्मण हिन्दू हूं’, जो ढाई बरस पहले तक हिरण्यकश्यप राक्षस की भांति यह ऐलान करता घूमता था कि… “लोग लड़कियां छेड़ने के लिए मंदिरों में जाते हैं।”

अतः महाराष्ट्र में आज जो घट रहा है वो उससे बहुत आगे की स्थिति है। यह स्थिति क्यों आई, 30-40 साल से राजनीति के ग्रामोफोन पर अटक अटक कर लगातार बज रहा सेक्युलरी राग-रागिनी वाला हिन्दू सांप्रदायिकता का घिसा पिटा एक ही रिकॉर्ड पिछले 5 वर्षों के दौरान अचानक टूट फूट कैसे गया, बदल कैसे गया?

इसका बहुत साफ जवाब, कल लीक हुआ अहमद पटेल का वह वीडियो दे रहा है जिसमें अहमद पटेल अपने विधायकों को हाथ जोड़कर समझा रहा है कि मोदी-शाह को किसी तरह किसी भी कीमत पर रोकना है इसलिए शिवसेना की सरकार बनवाओ।

अर्थात मोदी-शाह को रोकने के लिए वह काँग्रेस अब सब कुछ करने को हाथ जोड़कर तैयार खड़ी है, जो हिन्दुओं की हर शिकायत, प्रार्थना पर किसी कटहे चौपाये की तरह काटने को दौड़ती लपकती थी।

यही हालत रही तो अभी निकट भविष्य में ही हम सम्भवतः यह नज़ारा भी देखेंगे कि राम मंदिर निर्माण शुरू होते ही फावड़ा कुदाल गैंती थामे काँग्रेस नेताओं के जत्थों से भरे ट्रक कारसेवा के लिए अयोध्या की तरफ जा रहे हैं। बस शर्त यही है कि यह डर बना रहे कि मोदी शाह भाजपा फिर सत्ता में आ सकते हैं।

यह डर अच्छा भी है और बहुत ज़रूरी भी है। पिछले 30-35 बरस और विशेषकर पिछले साढ़े 5 बरस का अनुभव तो बहुत स्पष्ट शब्दों में यही सन्देश दे रहा है।

दरअसल पिछले 5 बरस से लाखों करोड़ की सरकारी लूट पर मोदी ब्रांड का मज़बूत ताला लग चुका है सेक्युलरिज़्म की नकाब में छुपे लुटेरों को साढ़े 5 बरस में एक पैसे की हेराफेरी का कोई मौका नहीं मिला है। इसलिए तथाकथित सेक्युलरिज़्म की स्थिति इस्तेमाल हो चुके कंडोम की सी हो गई है। यही कारण है कि अब वो लुटेरे मारीच और कालनेमि की भांति राम राम चीखने को विवश हो गए हैं।

इसीलिए मैंने शुरुआत में लिखा कि राम को गप्प और असली अयोध्या को अफगानिस्तान में बताने वाले आज घुटनों पर नहीं झुके हैं बल्कि हिन्दू हिंदुत्व के चरणों पर साष्टांग लोट गए हैं, उसके तलुए चाट रहे हैं और चिल्ला चिल्ला कर कह भी रहे हैं कि इससे ज्यादा कुछ और करना हो तो वो भी करेंगे… बस हमें मोदी से बचाओ… भाजपा से बचाओ… उन्हें सरकार में मत लाओ…

अतः हिन्दुओं और हिंदुत्व की इस प्रचण्ड विजय के लिए अगर मोदी शाह भाजपा आरएसएस को कोटि कोटि धन्यवाद ना दिया जाए, उनका आभार व्यक्त ना किया जाए तो फिर किस का किया जाए…?

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