धारा 370 हटाने या पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक करने से बड़ा फैसला है ट्रम्प के साथ खड़े होना

नरेंद्र मोदी अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प का चुनाव प्रचार कर रहे हैं…

बात मज़ाक लग सकती है, पर इसका संदर्भ समझिए। ट्रम्प भारत के लिए क्यों ज़रूरी हैं?

नहीं, ट्रम्प हमारे लिए कुछ नहीं करेंगे। जो करना है वह हमें खुद ही करना है। फिर भी ट्रम्प का वहाँ होना हमें एक दिशा से होने वाले हमलों से निश्चिंत कर देता है।

पिछले चुनावों में आपने हमारी ‘बुर्का’ दत्त को हिलेरी क्लिंटन के साथ घूमते देखा था। मुझे कुछ नहीं पता कि ट्रम्प अच्छा है या बुरा, पर ‘बुर्का बी’ हिलेरी के साथ घूम रही है तो ट्रम्प का समर्थन करना है, स्पष्ट था। यहाँ अपनी रोज़मर्रा की बातचीत में मैंने कई दुश्मन बना लिए थे।

आपको बराक ओबामा की भारत यात्रा याद है? मैंने बहुत ही ध्यान से उस यात्रा को फॉलो किया था। पूरी यात्रा में ओबामा ने आतंकवाद नाम का शब्द एक बार भी नहीं कहा था। फिर एक दिन नरेंद्र मोदी के साथ वाली ‘मन की बात’ में ओबामा ने कुछ ऐसा कहा था – India can be a superpower… As long as it does not break on communal lines, or caste lines or on any line for that matter…

लोगों को सुनाई दिया कि वह कह रहा है कि भारत सुपरपावर बन सकता है। मैंने कहा – यह नामाकूल धमकी दे रहा है। यह भारत को तोड़ने की धमकी दे रहा है। यह एक इशारा है।

और उसके वापस जाने से पहले ही टुकड़े-टुकड़े गैंग एक्टिव हो गया। चर्चों पर ‘हमले’ होने लगे। बच्चों की गेंद से चर्च की खिड़की का शीशा टूटने की खबर न्यू यॉर्क टाइम्स में छपने लगी, CNN पर दिखाई जाने लगी। हमारे बुद्धिजीवी ट्वीट करने के लिए असहिष्णुता की स्पेलिंग सीखने लगे…

उसका दबाव पड़ा। खूब पड़ा। ओबामा गया, ट्रम्प आए। पर मोदी साढ़े तीन साल तक ट्रम्प के प्रति ठंडे रहे। उन्हें ट्रम्प के साथ सीना ठोक कर खड़े होने की हिम्मत नहीं पड़ी। और मैं समझ सकता हूँ क्यों।

अगर अमेरिका से हज़ारों मील दूर लंदन में मैं अपने स्टाफ रूम में सिर्फ इतना पूछ देता हूँ कि ट्रम्प में क्या खराबी है? वह एक डेमोक्रेटिकली इलेक्टेड प्रेसिडेंट है और जो अमेरिका के लिए अच्छा है वह कर रहा है… तो दो-तीन लोगों से यूँ ही बातचीत बंद हो जाती है।

ट्रम्प के साथ खड़ा होना एक लायबिलिटी है, जैसी एक समय मोदी के लिए बोलना हुआ करती थी। यह पॉलिटिकल करेक्टनेस की ताकत है जिसके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत भारत का प्रधानमंत्री नहीं करता, अमेरिका के राष्ट्रपति को भी उसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

खुशी की बात है कि अपने दूसरे टर्म में मोदी खुल के खेल रहे हैं, ट्रम्प के साथ खड़े हुए हैं। विश्वास कीजिये, यह फैसला कश्मीर से धारा 370 हटाने या पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक करने से बड़ा फैसला था।

अब सोचिए, ट्रम्प अपनी दूसरी पारी कैसी खेलेंगे। यह मिस करने लायक बात नहीं है।

दूसरी तरफ उससे भी बड़ी बात है, अगर ट्रम्प नहीं तो कौन? अगर अमेरिका में बर्नी सैंडर्स (या इंग्लैंड में जेरेमी कॉर्बीन) जैसा कोई वामपंथी आ गया तो भारत को कैसे कठिन समय से गुजरना होगा यह चिंता का विषय है। आज जब अमेरिका से राजनयिक हमले बन्द हैं, हमारी ‘भारत तोड़ो गैंग’ को अमेरिकी सरकारी सहायता बन्द है तो हमें उसका सुकून समझ में नहीं आ रहा है। जैसे जून की गर्मी में AC में बैठ कर बाहर झुलसाती लू याद नहीं रहती, यह भी हम भूल गए हैं।

ट्रम्प के चार साल भारत के सुकून के चार साल रहे हैं। उनके दूसरे टर्म के लिए दुआ कीजिये और जिनके भी नाते रिश्तेदार अमेरिका में हैं उन्हें ट्रम्प को वोट देने को कन्विंस कीजिये। पहले टर्म में बन्दा ध्वज प्रणाम तक पहुँच गया है, दूसरे टर्म में कट्टा लहरा के जय श्रीराम भी बोलेगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY