गज़ब की है मोदी सरकार की टाइमिंग

अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद पड़ोसी देश ने विदेशी समाचार पत्रों में भारत के विरुद्ध कई समाचार छपवाए। लेकिन भारत के समर्थन में कोई लेख इन समाचार पत्रों में सामने नहीं आ रहा था। अगस्त के महीने में प्रतिदिन नकारात्मक समाचार पढ़-पढ़ कर कष्ट हो रहा था।

पिछले कुछ दिनों से मैंने महसूस किया कि ब्रिटेन के फाइनेंशियल टाइम्स में 10-12 दिनों से कश्मीर के मुद्दे पर एकदम चुप्पी छाई हुई है। न्यू यॉर्क टाइम्स भी शांत पड़ा हुआ था।

आज (20 सितम्बर को) जब मैंने न्यू यॉर्क टाइम्स खोला तो उसमें पड़ोसी देश के विरुद्ध दो समाचार थे तथा संपादकीय पेज पर भारत के पक्ष में एक लेख था।

पहला समाचार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के बारे में था कि वहां पर कैसे पाकिस्तानी सरकार नागरिकों पर अत्याचार कर रही है तथा उन नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन हो रहा है।

दूसरा समाचार पाकिस्तान में मानवाधिकारों के बारे में झंडा उठाने वाली पाकिस्तानी महिला गुलालई इस्माइल के बारे में था कि कैसे गुलालई ने पाकिस्तान की फौज के द्वारा किए जा रहे बलात्कारों तथा अत्याचारों के बारे में आवाज़ उठाई थी। जब वहां की सेना ने गुलालई को उठा लेने का मन बना लिया, तो वह पाकिस्तान से मई में गायब हो गईं।

गुलालई बताती हैं कि वह कई दिनों तक अपने समर्थकों के घर में छुपी रहीं। फिर वह किसी तरह बिना हवाई यात्रा के अमेरिका पहुंच गईं। वह अमेरिका कैसे आईं, यह गुलालई ने बतलाने से मना कर दिया। उनका कहना है कि अगर वे अपना रूट बतला देंगी तो उनके समर्थकों के बारे में पता चल जाएगा।

रोचक बात है कि यह समाचार भारत स्थित न्यू यॉर्क टाइम्स के संवाददाता ने दिल्ली से लिखा। साथ में गुलालई की न्यू यॉर्क में फोटो भी छापी है। यद्यपि गुलालई अगस्त में ही न्यू यॉर्क पहुंच गई थीं, लेकिन यह समाचार आज (20 सितम्बर को) छपा है।

अंत में, न्यू यॉर्क टाइम्स के संपादकीय पेज पर अमेरिका में भारत के राजदूत हर्षवर्धन श्रिंगला का लेख छपा है जिसमें श्रिंगला ने पाकिस्तान की खाल उधेड़ दी।

बहुत से तर्क रखे लेकिन एक तर्क जो मुझे सबसे अधिक पसंद आया, उसमें श्रिंगला कहते हैं कि इमरान खान प्रधानमंत्री मोदी को नाज़ीवादी और फासीवादी बोलते हैं, जबकि विडंबना यह है कि पाकिस्तान स्वयं इज़राइल के अस्तित्व को ही स्वीकार नहीं करता और यहूदियों का विरोध करता है। (नाज़ीवाद यहूदियों के विरोध में था जिसके अंतर्गत हिटलर ने कई लाख यहूदी मार दिए थे)।

अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र में इमरान खान भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन का मामला उठाएंगे। लेकिन उनके बगल में गुलालई पाकिस्तान में महिलाओं के बलात्कार, हत्या, अपहरण और मानवाधिकारों के हनन का मामला उठाएंगी।

ऐसे में पड़ोसी देश की बात को गंभीरता से कौन लेगा?

भारत ने पाकिस्तान के तरकश के सारे बाण समाप्त होने की प्रतीक्षा की, और फिर अपना दांव चल दिया।

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