कश्मीर से दृष्टि मत हटाइये, बनाए रखिए दबाव

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35A हटने का जश्न और उत्साह अब झाग की तरह बैठ चुका है।

वे साथी, जिन्होंने धारा 370 और 35A की जंग को किसी भी रूप लड़ा था, अच्छी तरह जानते हैं कि यह एक जंग का सिर्फ पहला चरण था… जिसमें शत्रु एक आकस्मिक हमले से हतप्रभ रह गया था।

सच्चाई यह है कि राष्ट्रवाद के शत्रु घाटी से ज़्यादा… पूरे देश में फैले हुए हैं। जंग के अगले चरण सामने आने शेष हैं।

घाटी के अलगावादियों, पाकिस्तान के हुक्मरानों को, देश में बैठे शत्रुओं और सेकुलरिज़्म का लबादा ओढे लाखों-करोड़ों बाशिंदों, मीडिया के एक बड़े वर्ग और ज्यूडिशरी पर पूरा भरोसा है कि धारा 370 एक बार फिर से घाटी पर आयद हो।

मोमिन परस्त मीडिया… ज्यूडिशरी को कुछ इस प्रकार प्रभावित करने में कामयाब होगी कि धारा 370 फिर लौटेगी… आशंका निराधार नहीं है… क्यों?… जानिए…

दरअसल राष्ट्रवादी तत्वों के जश्नोपरांत… धीरे धीरे… ‘द वायर’, ‘NDTV’, ‘द लल्लन टॉप’… बरखा दत्त, आरिफा शबनम शेरवानी, विनोद दुआ, विनोद शर्मा, प्रो बद्री प्रसाद, सिद्धार्थ वरदराजन और शेखर गुप्ता जैसे लोग… घाटी में ढाए जा रहे जुल्मों सितम की अतिरंजित कहानियां लेकर निकल पड़े हैं।

आरिफा शबनम शेरवानी… जो ‘द वायर’ की आजकल कर्ता-धर्ता हैं… खुद कैमरा लेकर श्रीनगर में कई दिन तक घूमती रहीं… श्रीनगर के अलगावादियों के साक्षात्कार लिए गए… पीडीपी, NC के कार्यकर्ताओं के मुँह में माइक डालकर भारत के ‘अन्याय और ज़ुल्म की कहानियां’ उगलवाई गईं।

बाज़ार खुला था… मगर शेरवानी ने बन्द दुकान पर कैमरा फोकस किया और बन्द दुकान के सामने कुछ कश्मीरी लड़कों से टेलीफोन, मोबाइल, इंटरनेट को लेकर और ’10 लाख भारतीय सेना’ के जुल्मों सितम का रोना… ‘द वायर’ पर घंटो रोया गया।

विश्वास मानिए, आरिफा शबनम शेरवानी के ऐसे 5 वीडियो तैर रहे हैं… एक-एक वीडियो को दस-दस लाख की व्यूअरशिप मिल रही है। स्पष्ट कहना चाहता हूं कि यह पांचों रिपोर्ट्स अभी तक मुख्य न्यायाधीशों तक पहुँच चुकी होंगी… क्योंकि इन रिपोर्ट्स को 370 की सुनवाई के दौरान जजों को प्रभावित करने के लिए ही बनाया गया है।

सबसे गंभीर और खतरनाक इंटरव्यू श्रीनगर के गुरुद्वारों में सिक्ख ग्रंथियों और सिख युवकों के लिए गए हैं… जिसमें सिख लड़के भारत को बाहरी देश कहते दिख रहे हैं… घाटी के सिक्खों के मुँह से पहली बार यह सुना गया कि “हम सिख बाद में हैं.. पहले कश्मीरी हैं।”

आरिफा शबनम शेरवानी खोद-खोद कर उनके मुंह से भारतविरोधी बयान निकलवाने में कामयाब रही। सिख युवक घाटी के मोमिनों को दुनिया का सबसे अच्छा, धर्मनिरपेक्ष और सबसे प्यार करने वाला बताते दिख रहे हैं… “कश्मीरी पंडित तो बस मज़े-मज़े में और मूर्खता में घाटी छोड़ गए थे”…

मैं आश्चयचकित हूँ कि घाटी से बीबीसी और अल जज़ीरा जैसे भारत विरोधी विदेशी… आतंक समर्थक चैनलों को रिपोर्टिंग करने की किसने इजाज़त दी?

दिलचस्प बात यह है कि हुर्रियत के अनेक पाक समर्थकों को श्रीनगर के द सेण्टूर होटल के सुपर डीलक्स कमरों में रखा गया है। उनके रिश्तेदारों को इन अलगावादियों से मिलने की पूरी आज़ादी है! बाकायदा होटल के बाहर मुलाकातियों की भीड़ लगी रहती है।

घाटी के अखबार छप रहे हैं… श्रीनगर जैसा कर्फ्यू हर जगह लगे… जहाँ लोग आराम से घूम फिर रहे हैं… खाने-पीने, सब्ज़ी-गैस, पेट्रोल-डीजल की कोई किल्लत नहीं हैं… ईद से पहले हज़ारों बकरों, मुर्गों की सरकार ने घर घर जाकर ‘होम डिलीवरी’ दी।

दरअसल घाटी में 80 प्रतिशत परिवारों के पास पहले से ही सरकारी नौकरी है… कथित कर्फ्यू के दौरान सवा लाख टन सेबों की सप्लाई आज तक की सबसे ऊंची कीमत पर की गई है। पैकेजिंग मटेरियल राज्य सरकार ने उपलब्ध कराया है।

इधर गृहमन्त्री ने कहा है कि हर गांव में 5 युवकों को सरकारी नौकरी दी जाएगी… अर्थात एक लाख सरकारी नौकरियों की सौगात और दी जा रही है… अर्थात कश्मीर में थोड़ा पढ़ा लिखा व्यक्ति भी सरकारी कर्मचारी होगा… वैसे ही घाटी में ज़रूरत से 4 गुने अधिक सरकारी कर्मचारी पहले से मौजूद है… कश्मीर मतलब मौजां ही मौजां…

बहरहाल मित्रों… 370 और 35A के abrogation को बचाने के लिए… कश्मीर से दृष्टि मत हटाइये… लिखते रहिये… दबाव सरकार और ज्यूडिशरी पर बना रहे तो बहुत अच्छा रहेगा। 370 और 35A पर पहले ही दिन 5 जजों की संविधान पीठ बना देना… एक बेहद गंभीर कदम है… न्यायालय का!!!

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