पाकिस्तान ने शुरू कर दी कश्मीर मुद्दे से अपना पीछा छुड़ाने की तैयारी

कुछ विषय ऐसे होते हैं जिनका सरकार समर्थन करना चाहती है, लेकिन जनता के विरोध को ध्यान में रखकर वह कुछ कर नहीं पाती। उसका सबसे सीधा उपाय यह होता है किसी एनजीओ को बोलकर उस विषय पर कोर्ट में केस डलवा दो।

इसके बाद सरकारी वकील की दलीलें कमज़ोर रखो और जब कोर्ट का निर्णय उस मुद्दे के पक्ष में आ जाए, तब सरकार यह कह देती है कि यह तो कोर्ट का निर्णय है। इसमें अब हम क्या कर सकते हैं।

भारत के संदर्भ में देखें तो पिछले वर्षों में कोर्ट से तीन तलाक, राज्यों के मध्य नदी जल का बंटवारा, धारा 377 को गैरकानूनी घोषित कर समलैंगिक संबंधों को कानूनी बनाना इत्यादि शामिल हैं।

अब यही रणनीति पाकिस्तान ने अपना ली है। कश्मीर के मुद्दे पर पहले उन्होंने अपनी जनता की भावनाओं को भड़काया, एक से बढ़कर एक भद्दे, भड़काने वाले बयान दिए, आतंकी हमले की चेतावनी दी। लेकिन अब वे महसूस कर रहे है कि उनके पक्ष के समर्थन में कोई भी राष्ट्र खुल कर सामने नहीं आने वाला है।

एक राष्ट्र ने जो समर्थन किया, वह सिर्फ मुंह-जबानी था; वह राष्ट्र धरातल पर कुछ नहीं करने जा रहा क्योकि उसे भी भारत से बिज़नेस करना है। उल्टे अमेरिका से फटकार और पड़ गई। अभी यह नहीं पता कि खाड़ी के देशों ने उनको क्या खरी-खोटी सुनायी होगी।

अतः ऐसा प्रतीत होता है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे से अपना पीछा छुड़ाना चाहता हैं। इस कार्य को अंजाम देने के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से भली और कौन सी संस्था हो सकती है?

पाकिस्तान अब कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन और ‘नरसंहार’ के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाएगा। वहां उसकी हार निश्चित है। ध्यान दीजिये, वे अनुच्छेद 370 समाप्त करने को चुनौती नहीं दे रहे है क्योंकि वह भारतीय संविधान का भाग था, जिसे भारत की संसद ने समाप्त कर दिया।

अगर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय से अपने पक्ष में निर्णय मिलने की इतनी ही प्रबल संभावना थी तो पाकिस्तान पहले ही कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन और ‘नरसंहार’ के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाता। आखिरकार बुरहान वानी की मृत्यु के बाद वहां हालात कहीं अधिक खराब थे, जबरदस्त पत्थरबाज़ी की घटनाएं और कई लोगों की मृत्यु भी हुई थी।

जब केस न्यायालय में फाइल हो जाएगा, तब वे अपनी जनता को बोलेंगे कि अब यह मुद्दा न्यायालय में है। अतः प्रतीक्षा कीजिये।

केस हारने के बाद वह राष्ट्र अपनी जनता को बोलेगा कि अब हम क्या करें; हम तो केस हार गए। अब आप शांत हो जाइये।

एक तरह से कश्मीर मुद्दे का पटापेक्ष होने जा रहा है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY