अभी ही क्यों किया गया धारा 370 हटाने का निर्णय

प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के संदर्भ में की गई कार्रवाई के बारे में कुछ बातें अब स्पष्ट होती जा रही है।

सर्वप्रथम, मुफ्ती परिवार के साथ गठबंधन सरकार चलाने के पीछे भाजपा की रणनीति यह थी कि पूरे क्षेत्र में छोटे- बड़े सभी सरकारी कर्मचारियों के बारे में पता कर लिया जाए कि किस की सहानुभूति किसके साथ है तथा कौन कितना कुशल साबित हो सकता है। गांव से लेकर कस्बे तक, एक-एक कॉन्स्टेबल, पटवारी, डॉक्टर, इंजीनियर, लेखाकार, सभी के बारे में जानकारी एकत्रित की गयी।

इसी गठबंधन सरकार से ही भाजपा को भीड़ और दंगाइयों के बारे में तथा उन्हें कंट्रोल करने के बारे में भी डेटा मिल गया। एक-एक फाइल और रिपोर्ट को पढ़ने का अवसर मिला, जो सरकार के बाहर होने से कभी भी संभव नहीं था।

द्वितीय, प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगियों का सदैव से यह उद्देश्य था कि धारा 370 की अलगाववादी भाषा को समाप्त किया जाए। लेकिन उसके लिए ग्राउंड तैयार करना होता है जिसमें पिछली सरकार का समय चला गया। इस रणनीति के तहत खाड़ी के देशों से संबंधों को प्रगाढ़ बनाना तथा उनके साथ व्यवसाय को बढ़ाना; अमेरिका, इज़राइल और यूरोप के सभी देशों से राजनीतिक और व्यवसायिक पार्टनरशिप और मज़बूत करना शामिल था।

अगर आप ध्यान देंगे तो जून 2017 में मोदी पुर्तगाल गए थे। जाने के पहले उन्होंने वहां जंगल में आग लगने के कारण हुई मृत्यु पर ट्वीट करके शोक संदेश प्रसारित किया था। कई लोगों ने इस संदेश की आलोचना भी की थी। लेकिन वे यह भूल गए थे कि इसी पुर्तगाल के ही नागरिक इस समय संयुक्त राष्ट्र के महासचिव हैं।

इसी प्रकार वे कई बार साउथ कोरिया गए जहां के नागरिक बान की-मून 2016 तक संयुक्त राष्ट्र के महासचिव थे। यह दोनों महासचिव भारत की यात्रा कई बार कर चुके हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के नेताओं से मोदी कई बार मिल चुके हैं क्योंकि वह सभी सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं। अगर इनमें से एक सदस्य ने भी वीटो कर दिया तो सुरक्षा परिषद में भारत के हितों के विरुद्ध कोई भी निर्णय नहीं लिया जा सकता।

अंत में, यह कार्रवाई एकाएक इसलिए की गई क्योंकि शीघ्र ही अमेरिका का तालिबान से समझौता होने की आशा है, जिसके बाद अमेरिकी सेना अफगानिस्तान से वापस लौट जायेगी। अतः, अफगानिस्तान में पाकिस्तान का प्रभाव बढ़ सकता है और वह अफगानिस्तान के जिहादी और हथियार भारत की तरफ भेज देता।

आतंकवादी गतिविधियों में सम्मिलित होने के कारण पाकिस्तान पर वित्तीय प्रतिबंध की तलवार लटक रही है जिसका निर्णय अक्टूबर में होना है। हो सकता है कि पाकिस्तान उस प्रतिबंध से बच जाए। लेकिन अक्टूबर तक वह इस स्थिति में नहीं है कि जिहादियों का खुलेआम समर्थन करे तथा उन्हें भारत में भेजे। अतः यही समय उपयुक्त था।

अगर आप ध्यान दें तो लोकसभा का सत्र 23 जुलाई को एकाएक 10 दिन के लिए बढ़ा दिया गया। यही वह समय था जब प्रधानमंत्री मोदी ने यह निर्णय ले लिया था कि धारा 370 को समाप्त कर देना है। नहीं तो अगले सत्र की प्रतीक्षा करनी होती जो नवंबर मध्य में शुरू होता। लेकिन तब तक आतंकी देश जिहादियों को भेजने में ना हिचकिचाता।

मैं हमेशा से यह मानता आया हूं कि प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगियों के हृदय में केवल और केवल भारत का हित है। वह इस समय भी आगे के 5-10 वर्षों के बारे में सोच रहे हैं और उसी के अनुसार अपनी गोटियां बिछा रहे हैं। उनके कुछ निर्णय, जो अल्पावधि में अनुचित लगें या समझ में ना आएं, उनकी अगर आप आलोचना करना चाहें तो भी ठीक है, लेकिन अपना वोट चाहे वह लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का, केवल प्रधानमंत्री मोदी के ही नाम पर डालें।

प्रधानमंत्री मोदी पर विश्वास बनाए रखें।

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