सुरक्षाबलों का एकत्रीकरण और कश्मीर घाटी की बेचैनी : कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना

वैसे तो पिछले दिनों बढ़ाई गई सुरक्षाबलों की संख्या से ही लोग भविष्य की आशंकाओं से घिरे थे लेकिन पिछले 24 घण्टे में कश्मीर की घाटी में हो रही सक्रियता से अब लोग हैरान और परेशान है। कश्मीर की घाटी में 40 हज़ार सैन्य व अर्धसैन्य बल पहले से ही था लेकिन अब करीब 35 हज़ार और त्वरित रूप से भेज दिए गए है।

कश्मीर की घाटी में लगभग सुरक्षाबलों की दुगनी होती संख्या के साथ, श्रीनगर के ऊपर जेट विमानों की चहल पहल, एनआईआईटी का बन्द होना और फिर अमरनाथ तीर्थयात्रियों को घाटी तुरन्त खाली करने की सलाह देना, कुछ ऐसी घटनाएं है जिसने जहां बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकारों को बौखला दिया है। वहीं कश्मीर की घाटी में बैठ कर, आतंकियों व पाकिस्तानियों को समर्थन देने और जम्मू कश्मीर की राजनीति करने वालों को डरा दिया है।

बात यहीं पर समाप्त नहीं हुई है, इसके अलावा बीजेपी द्वारा 5 से 7 अगस्त को चलने वाले सदन के लिए अपने सांसदों को जो व्हिप जारी की है उसने सुलगती आग में घी डालने का काम किया है।

इसी सब को देख कर लोग मीडिया व सोशल मीडिया पर तरह तरह के अपने आंकलनों का बाज़ार गर्म कर रहे हैं। कल शुरू में यह बात चली थी कि यह सब जम्मू कश्मीर से 35A और 370 हटाने के बाद वहां की स्थिति से निपटने के लिए किया जा रहा इंतज़ाम है।

फिर समाचार चले कि घाटी में, विशेषकर अमरनाथ की यात्रा के मार्ग पर आतंकियों द्वारा कोई बड़ी कार्यवाही किये जाने की सूचना हाथ लगी है। इस बात को बल इससे भी मिला क्योंकि वहां पाकिस्तानी डिपो की अमेरिकन स्नाइपर राइफल और लैंड माइंस भी मिले थे।

इसके बाद शाम तक यह भी समाचार खूब चला कि मोदी सरकार जम्मू कश्मीर को तोड़, तीन भागों में करने जा रही है, उसको ही देखते हुए यह किया जा रहा है। जम्मू को एक राज्य व कश्मीर की घाटी और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाएंगे।

मेरा मानना है कि यह सिर्फ लोगों का भ्रम है। मेरा अपना आंकलन है कि लोग जो जम्मू कश्मीर में बाईफर्केशन या 35A को लेकर अंदाज़ व उम्मीद लगा रहे हैं वो बेबुनियाद है। ऐसा मैं इसलिये कह रहा क्योंकि नरेंद्र मोदी का जो काम करने का तरीका रहा है उसमें कभी भी पूर्वानुमान लगाने की कोई जगह नहीं होती है।

यह हम पहले भी देख चुके हैं कि मोदी पूरी मीडिया व जनमानस को किसी एक दिशा में बांध देते हैं और फिर विपरीत दिशा में कार्यवाही कर जाते हैं। आज तक कोई भी मोदी सरकार की गोपनीयता को भंग नहीं कर पाया है और न ही उनकी रणनीति का समय से पहले लोगों को पता चला है। ऐसे में यह प्रश्न अवश्य खड़ा हो गया है कि आखिर यह सब हो क्या सकता है?

मेरी अपनी समझ कहती है कि यह सब 2020 में होने वाली कार्यवाही की तैयारी है और सैन्यबलों का जमावड़ा मनोवैज्ञानिक युद्ध का एक तरीका है। अब तक जो रुझान सामने आए है उससे यही लग रहा है कि मोदी सरकार इसमें सफल है क्योंकि पिछले 7 दशकों से कश्मीर की घाटी से भारत को ब्लैकमेल करने वाले राजनीतिज्ञ व संगठन के साथ पाकिस्तान के लोग बुरी तरह घबराए व बेचैन दिख रहे हैं।

इसी के साथ मुझको यह भी लग रहा है कि इन सब बढ़ती गतिविधियों का केंद्र श्रीनगर नहीं है। हम सब उसी में उलझ गए है लेकिन मोदी को लेकर मेरा अनुभव कहता है कि इस सबका केंद्र बिंदु एलओसी के पार पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर (POK) है।

मैं यह सब इसलिये कह रहा हूँ क्योंकि वह जगह छिपी हुई है। वहां पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर में कुछ हो रहा है, जिस पर जहां पाकिस्तान खामोश है व छुपा रहा है, वहीं भारत भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। फिर भी वहां से जो छन छन के कुछ समाचार मिल रहे हैं उससे यह आशा बलवती होती जा रही है कि वहां सब कुछ सामान्य नहीं है।

पाकिस्तान एलओसी से 30 किमी भीतर नीलम झेलम हाइड्रो प्रोजेक्ट डैम बना रहा है। उसे वहां चीनी व कुछ विदेशी कम्पनियां बना रही हैं। इसका उद्देश्य एक तरफ जहां बिजली की मार झेल रहे पाकिस्तान के लिए बिजली बनाना है वही पानी की किल्लत से जूझते पाकिस्तानी पंजाब व सिंध की खेती व लोगों की प्यास बुझाना है।

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर के लोग पिछले कुछ दिनों से इस प्रोजेक्ट के विरुद्ध आंदोलन कर रहे हैं। वे लोग पाकिस्तान से इस बात पर नाराज़ हैं कि पाकिस्तान एक तरफ उनके क्षेत्र के संसाधनों का दोहन कर रहा है और दूसरी तरफ पिछले 7 दशकों में वहां के क्षेत्र व जनता के लिए कुछ भी नहीं किया है। उनको जहां साफ पीने का पानी नहीं मिल रहा है वहां, पाकिस्तान उनका पानी चुरा कर पंजाब सिंध की प्यास बुझा चाह रहा है।

पिछले 2 दिनों से समाचार मिल रहे थे कि पाकिस्तान ने नीलम झेलम डैम पर काम कर रहे विदेशियों चीनी व अन्य लोगों को आपातकालीन रूप से हटा कर मूल पाकिस्तान भेज दिया है। यह समाचार जब मिला था तब उसके कारणों का पता नहीं था लेकिन अब समाचार मिला है कि वहाँ हालात कुछ इस तरह के हैं, उनके नीलम झेलम हाइड्रो प्रोजेक्ट क्षेत्र पर गोले बरस रहे हैं। यह क्षेत्र एलओसी के अंदर 30 – 35 किमी है और वहां भारतीय सेना अंदर गोले दाग रही है। लोग वहां से भाग कर सुरक्षित क्षेत्रो में और भीतर जा रहे हैं।

इसी पृष्ठभूमि में बीजेपी द्वारा 5 से 7 अगस्त को व्हिप जारी करना भी समझ में आ रहा है। मेरा आंकलन है कि भारतीय संविधान में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर से जो जम्मू कश्मीर विधानसभा के लिए 24 विधायकों व भारतीय लोकसभा के लिए 5 सांसदों की व्यवस्था छोड़ी गई है, उसके पूरा किये जाने को लेकर कोई व्यवस्था आने वाली है।

जम्मू कश्मीर में चुनाव आने वाले हैं और ऐसे में उन विधायकों को चुनने की कोई व्यवस्था की शुरुआत होने वाली है। शायद भारतीय संसद में कोई ऐसा बिल आने वाला है जिससे ऐसी अभूतपूर्व व्यवस्था का जन्म होगा जिससे वहां पर चुनावी प्रतिक्रिया ऑनलाइन या डाक व्यवस्था से की जा सके।

यहां मैं यह अवश्य कहना चाहूंगा कि यह सब पूर्णतः संवैधानिक तरीके से होगा क्योंकि भारत के संविधान में इसकी व्यवस्था है। अब क्योंकि ‘मोदी है तो मुमकिन है’ इसलिये अन्य लोगों की तरह मैंने भी इस सबको लेकर अपना आंकलन देने की धृष्टता की है।

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