मोदी ने जो समय उपलब्ध करा दिया, उसका सदुपयोग हो पाया तो हिन्दू का नसीब!

कश्मीर में जो होगा वो दाढ़ी जोड़ी देख लेगी, मगर थायलैंड में रोहिंग्याओं को कूटा गया ऐसी अफवाह पर मुंबई में दंगा करने वाली कौम ने आप के एरिया में कुछ किया तो आप की क्या तैयारी है?

कैसा भी लेख हो, बादरायण संबंध से भी मोदी का नाम घसीट कर तंज़ कसने वाले वीरों का कमेन्ट तो छोड़िए, लाइक भी नहीं। देखा तो होगा इसमें कोई शक नहीं।

पाँच साल जो केवल मोदी और भाजपा पर कसने वाले तंज़ को धार लगाते गए, दूसरी तरफ किसी और चीज पर धार चढ़ रही थी, जिसको कभी ये अपने सामने देख लें तो इनकी ‘धार’ निकल जा सकती है।

सरकार बदलने का श्रेय लेने वाले लोग, समाज को प्रभावित करने की क्षमता तो रखते होंगे ही। इस क्षमता का ही तो उपयोग करना था बताने में कि क्या कर सकता है सामान्य व्यक्ति। समस्या सब को दिख रही है, आवश्यकता अपने स्तर पर समाधान ढूँढने की है। बुद्धि है तो उसका उपयोग समाधान खोजने में भी किया जा सकता है।

आलोचना से लोकतान्त्रिक सरकार पर दबाव बनता है यह बात पूरी तरह नकारी नहीं जा सकती। लेकिन केवल आलोचना से समाधान नहीं होता और जब आलोचना हठाग्रही और अव्यवहार्य हो तो सरकार ध्यान देती भी नहीं, क्योंकि योजना के लाभ अगर जनता के समझ में आते हैं तो ऐसे आलोचक को रविश राजदीप बना देती है।

व्यक्तिगत तौर पर मेरा एक ही फंडा रहा है कि वो करने को कहा जाये जो आदमी कर सके। ‘कर सके’ ये शब्द बहुत मायने रखते हैं। इसलिए जो करना हो वो ऐसा हो जिससे फायदा ही हो। नुकसान अगर हो भी तो कमर तोड़नेवाला न हो और सफलता की संभावना ही बहुत अधिक हो। करने वाला कहीं फंसे नहीं। कृति का फल मिलेगा तो दूसरे भी अनुकरण को उत्साहित होंगे।

इसमें भी यह ज़रूरी है कि जो सुनने-पढ़ने वाले हैं उनमें कुछ करने के लिए उत्साहित लोग हों। वरना आलोचना के लिए मुद्दों की किसी भी सरकार में कोई कमी नहीं होती। पाँच साल बाद उम्र के हिसाब से मोदी जी गद्दी से उतर जाएँ तो हम अपने को कहाँ पाएंगे ?

2014 से 2019 तक हम खुद को मज़बूत कर सकते थे, लेकिन एक दूसरों को ‘दोगले, मूर्ख’, कहते और ‘सत्य कटु होता है, तुम्हारा विनाश अटल है’ इसी तरह के पोस्ट्स लिखते और शेयर करते रहे। सामने कौम ने संख्या ज़बर्दस्त बढ़ाकर 27 लोग लोक सभा में पहुंचाए, जो कहने को अलग अलग पार्टी से भले ही दिखते हैं, हैं तो एक ही सत्ताकांक्षी दल के!

बाकी अगर किसी को केवल ये इच्छा हो कि मैं भी मोदी जी की आलोचना कर के हुआं हुआं में सुर मिलाऊँ तो मुझे न उनकी प्रशंसा में रस था और न उनकी आलोचना में रस है। दोनों unproductive activities हैं मेरे लिए।

मोदी जी का सत्तासीन रहना हिन्दू जागृति तथा काम के लिए निर्बाध समय उपलब्ध करा देता है, इसके लिए मेरा उनको समर्थन रहेगा। उन्होंने जो समय उपलब्ध करा दिया है उसका सही उपयोग हो पाया तो हिन्दू का नसीब।

मोदी जी कितने भी अच्छे हों, अमर नहीं हैं। इसलिए शतक, सहस्रक का चिंतन, संयोजन करना आवश्यक है। (Vision of the Hindu Century / Millennium).

इसमें युद्धनीति भी सोचनी होगी, क्योंकि हजार, आठ सौ, दो सौ – आप के अनुसार जितने भी वर्ष हम गुलाम रहे, हिन्दू को समष्टि मानकर सर्वसमावेशक युद्ध नीति के अभाव के कारण रहे।

आज देश एक है तो यह चिंतन संभव है और अपने गर्वोन्नत अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अनिवार्य भी है। मोदी जी आए हैं, जाएँगे; देश रहेगा, रहना चाहिए। सोच वही रखिए, बाकी माँ काली सब को सद्बुद्धि दे।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY