सांकेतिक सुधारों और बयानबाज़ी की राजनीति

तीन तलाक़ पर कानून बनने से क्या हुआ?
मुस्लिम महिलाओं की सामाजिक स्थिति में सुधार होगा।

तो क्यों चाहिए आपको सुधार उनकी स्थिति में?
जिसे इस्लाम को स्वीकार करना है वह तीन तलाक़, हलाला, रेप और संगसार होना स्वीकार करे। हमें क्या पड़ी है कि हम उनकी स्थिति में सुधार की चिंता करें? जो नाले में पड़ा है उसे नाले में ही रहने दो। जिन्हें अच्छी और इज्जत की जिंदगी चाहिए वे हिन्दू बनें।

और अगर यही साबित करना है कि आप इस्लामिक जनमत के विरुद्ध जाकर भी कानून बना सकते हैं तो ऐसे विषय उठाइये जिनमें देश का फायदा हो।

मदरसों में क्या पढ़ाया जाता है इसकी सरकारी मॉनिटरिंग का कानून बनाइये। मस्जिदों में क्या हरकतें होती हैं उनकी रोकथाम का कानून बनाइये। यह जो मुल्लों द्वारा हिन्दू बच्चियों के रेप जिहाद का काम चल रहा है, उन्हें तीन महीने के अंदर फाँसी के तख्ते पर पहुँचाने का कानून बनाइये। ज़कात के पैसों का क्या इस्तेमाल होता है उसके ऑडिट का कानून बनाइये…

हमेशा की तरह मोदी ने सिर्फ सांकेतिक सुधारों और बयानबाज़ी की राजनीति की है। उद्देश्य और लक्ष्य की स्पष्टता का घोर अभाव मोदी के प्रधानमंत्रित्व का सिग्नेचर रहा है।

आपको लगता है कि मुस्लिम लड़कियाँ अनपढ़ हैं और पिछड़ी हुई हैं… जब वे पढ़-लिख के आत्मनिर्भर हो जाएँगी, तरक्की करेंगी तो वे आपका साथ देंगी, राष्ट्रीयता से जुड़ेंगी?

मेरे साथ यहाँ (इंग्लैण्ड में) दर्जनों मुस्लिम लड़कियाँ काम करती हैं। डॉक्टर हैं, अच्छे सम्पन्न घरों से हैं… ज्यादातर हिजाब पहनती हैं। बल्कि यह हिजाब का चक्कर भी नया है। जो 50 के ऊपर वालियाँ हैं उनमें से किसी के भी पास नहीं है, 20-30 वाली ही सारी हिजाब पहन रही हैं।

जब किसी की जिस्मानी जरूरतें पूरी हो जाती हैं तो वह रूहानी ज़रूरतों के पीछे भागता है। जब कोई तरक्की कर लेता है, खाने पीने रहने पहनने का इंतज़ाम हो जाता है तो उसको खुदा याद आता है, अपनी पहचान बनाने की भूख जागती है। और तब वह अपने सांस्कृतिक चिन्हों से जुड़ता है।

मुस्लिम कौम की जितनी आर्थिक सामाजिक तरक्की होगी, उतना ज्यादा वह इस्लामिक कट्टरपंथ से जुड़ेगा। उसे जितना ज्यादा जिल्लत और गुरबत में रखा जाएगा, राष्ट्र की मुख्य धारा से उनकी दूरी उतनी ही कम रहेगी। इसलिए उनके तीन-तलाक पाँच-हलाला को खत्म करने की कवायद शुद्ध मूर्खता है, या फिर ड्रामेबाज़ी। इसमें देश का कोई फायदा नहीं है, नुकसान ही है।

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