लम्बे समय तक याद की जाएंगी शीला

सम्भवतः 1972 या 73 में बाल्यावस्था में पहली बार दिल्ली गया था। उसके पश्चात युवावस्था में 1985 में दोबारा दिल्ली जाना हुआ था। इसके बाद 8-10 महीनों के अन्तराल पर दिल्ली आना जाना लगातार होता रहा।

1985 के बाद से दिल्ली में होते रहे परिवर्तनों का साक्षी रहा हूं मैं। अतः दावे के साथ कह सकता हूं कि 1998 से 2013 के मध्य 15 वर्ष की समयावधि के दौरान दिल्ली का जो विकास हुआ वह अतुलनीय है।

इसमें सर्वाधिक उल्लेखनीय तथ्य यह है कि 1998 से 2004 तक, दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में शीला जी के प्रथम 6 वर्ष के शासनकाल के दौरान केन्द्र में अटल जी के नेतृत्व वाले भाजपाई NDA की सरकार रही। लेकिन उन 6 वर्षों के दौरान शीला जी ने अटल जी या उनकी सरकार के खिलाफ कभी अनर्गल आरोप नहीं लगाए। कभी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं किया। कभी उस तरह का नंगनाच नहीं किया जिस तरह का नंगनाच पिछले 5 वर्षों से केजरीवाल दिल्ली में कर रहे हैं।

भाजपा के साथ अनेक राजनीतिक असहमतियों और विरोधों के बावजूद उस दौरान शीला जी ने कभी यह बहाना नहीं बनाया कि केन्द्र सरकार मुझे काम नहीं करने दे रही। इसके बजाय दिल्ली के विकास के लिए केन्द्र की तत्कालीन अटल सरकार के साथ शीला जी ने जिस तरह का तालमेल और समन्वय बनाकर दिल्ली के विकास को ही प्राथमिकता दी, उसे गति दी, वह अनुकरणीय भी है और अभिनन्दनीय भी है।

शीला जी के व्यक्तित्व को एक और उदाहरण से समझा जा सकता है। सारा देश जानता है कि केजरीवाल ने किस तरह किसी सड़कछाप की तरह सार्वजनिक मंचों से शीला जी के खिलाफ भद्दी गाली गलौज का बहुत लंबा अभियान चलाया था। लेकिन केजरीवाल के खिलाफ बोलते समय भी शीला जी ने अपने संयम, अपनी शालीनता के बांध को कभी टूटने नहीं दिया।

राजनीतिक विरोधी होने के कारण मोदी सरकार पर आक्रमण करना उनका राजनीतिक अधिकार भी था और उनका राजनीतिक दायित्व भी था। लेकिन अपने इस अधिकार और दायित्व का निर्वहन करते समय भी शीला जी ने कभी राजनीतिक मर्यादा को भंग नहीं होने दिया।

काँग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व वाली अग्रिम पंक्ति के नेताओं में से सम्भवतः शीला जी अकेली ऐसी नेता थीं जिन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, उनकी सरकार, उनकी नीतियों की तो समय समय पर तीखी आलोचना की लेकिन राहुल गांधी के प्रचण्ड राजनीतिक नंगनाच से स्वयं को बहुत दूर रखा और “चौकीदार चोर है” सरीखी भद्दी गालियों वाली काँग्रेसी शैली से अछूती रहीं।

लगभग 4 दशक लम्बे राजनीतिक जीवन में विवादों से सामना ना हुआ हो, यह सम्भव नहीं है। लेकिन दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में शीला दीक्षित जी के 15 वर्षों का कार्यकाल और उनका सरल सहज शालीन गम्भीर व्यक्तित्व उन विवादों पर बहुत भारी है। इसीलिए लम्बे समय तक याद की जाएंगी शीला दीक्षित…

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें

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