5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी: सोये सिंह के मुख में स्वयं प्रवेश नहीं करते हैं मृग! अंतिम भाग

प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, अर्थव्यवस्था में गति तब तक संभव नहीं है, जब तक इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर ना हो। यही कारण है कि 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुसार हम पूरे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहे हैं।

गांवों में उपज के भंडारण के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर हो या फिर शहरों में आधुनिक सुविधाओं का निर्माण, हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हाईवेज़, रेलवेज़, एयरवेज़, वॉटरवेज़, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, गांव में ब्रॉडबैंड की सुविधा, आने वाले 5 वर्षों में 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।

साल 2022 तक हर गरीब बेघर के सिर पर पक्की छत हो इसके लिए सिर्फ गांव में ही लगभग दो करोड़ घरों का निर्माण किया जाएगा। गरीबों के साथ-साथ मध्यम वर्ग के घर के सपने को पूरा करने के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। सस्ते घरों के लिए मिडिल क्लास जो होम लोन लेता है उसके ब्याज पर इनकम टैक्स की छूट में डेढ़ लाख रुपए की वृद्धि की गई है। यानि अब होम लोन के ब्याज पर साढ़े 3 लाख रुपए तक की छूट मिल पाएगी।

इससे 15 वर्ष की लोन अवधि तक 7 लाख रुपए तक का लाभ एक परिवार उठा सकता है। इतना ही नहीं, किराए पर घर खोजने में जो असुविधा होती है, उसके समाधान के लिए भी कदम उठाए गए हैं। रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार एक Model Tenancy कानून राज्य सरकारों को बनाकर भेजने वाली है।

गांव से लेकर शहरों तक जब इतने बड़े स्तर पर निर्माण कार्य होगा, तो रोज़गार का निर्माण होगा, सामान्य परिवार की जेब में पैसा जाएगा। इससे देश में स्टील, सीमेंट जैसे सामान की मांग बढ़ेगी। इस सामान को ट्रांसपोर्ट करने के लिए गाड़ियों की मांग बढ़ेगी। इस डिमांड को पूरा करने के लिए हमें देश में ही सामान बनाना पड़ेगा।

इस अभियान को हम डिफेन्स, रेलवे और मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में भी ज़जबूत कर रहे हैं। आज बड़ी मात्रा में हम ने रक्षा से जुड़े उपकरणों का निर्यात करना शुरू कर दिया है। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे टीवी, मोबाइल जैसे सामान बनाने में भी तेज़ी से प्रगति कर रहे हैं।

हमारे छोटे और मझोले उद्योगों के से लेकर पारंपरिक उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारे बुनकर, मिट्टी के कलाकार, हर प्रकार के हस्तशिल्पयों को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में प्रावधान किए गए हैं। वहीं सौर ऊर्जा के लिए देश में ही सौर पैनल और बैटरी बने इसके लिए पूरी दुनिया की कंपनियों को निवेश का आकर्षक प्रस्ताव दिया है। बिजली से चलने वाली गाड़ियां बनाने, खरीदने और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

सौर ऊर्जा से जुड़े उपकरण हों या फिर बिजली से चलने वाले वाहन, यह जब भारत में ही बनेंगे तो आयात पर आने वाला खर्च कम होगा। पेट्रोल, डीज़ल के आयात पर जो खर्च होता है वह भी कम होगा। तेल के आयात पर ही देश को हर वर्ष 5 से 6 लाख करोड़ रुपये खर्च करना पड़ता है। इसके कम होने से कितनी बड़ी राहत देश को मिलेगी! आयात से जुड़ा खर्च ख़त्म होगा तो देश के लिए एक बचत के रूप में ही काम करेगा यानी हमारी अर्थव्यवस्था को मज़बूत करेगा।

यही कारण है कि अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को जितना संभव हो सके भारत में ही पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। हमारे पास कोयला भी है, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा मौजूद है। इनसे बिजली उत्पादन की क्षमता को आधुनिक तकनीक के उपयोग से हम बढ़ा सकते हैं। ऐसे ही कचरे से ऊर्जा पैदा करने के अभियान को मज़बूती देने के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। खेती से निकले अवशेषों को बायोफ्यूल में बदलने के लिए व्यापक प्रयास हो रहे हैं।

5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के लिए जो प्रयास किए जाएंगे उसमें सरकार सिर्फ एक निमित्त मात्र है, एक सहयोगी के रूप में है। कभी-कभी अगर सरकार आड़े न आये, तो देशवासी बहुत कुछ आगे ले जा सकते हैं, यह सामर्थ्य उनमें है।

कृषि हो, स्वास्थ्य हो, शिक्षा हो, कौशल हो, ऐसे हर क्षेत्र में मानव सेवा और जनकल्याण की भावना के साथ ये संगठन काम करते हैं। हमारा प्रयास है कि इन संस्थाओं को अपने काम के लिए पूंजी जुटाने का एक माध्यम दिया जाए।

यही कारण है कि बजट में स्टॉक एक्सचेंज की तर्ज पर ही, एक इलेक्ट्रॉनिक फंड रेज़िंग प्लेटफॉर्म, यानि एक सोशल स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना की घोषणा की गई है। इस माध्यम से ये स्वयंसेवी संस्थान अपनी लिस्टिंग कर पाएंगे और ज़रूरत के मुताबिक पूंजी जुटा सकेंगे।

मुझे पूरा विश्वास है कि एक राष्ट्र के तौर पर हमारे सामूहिक प्रयास 5 वर्ष में 5 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक पड़ाव तक हमें ज़रूर पहुंचाएंगे।

अंत में, प्रधानमंत्री मोदी कहते है कि –

उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रवि-शन्ति मुखे मृगाः।।

यानि, उद्यम से ही कार्य पूर्ण होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं। सोते हुए शेर के मुख में मृग स्वयं प्रवेश नहीं करते हैं।

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