प्रधानमंत्री मोदी और 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी: कैसे होगी प्राप्त? भाग 2

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी का विज़न बजट में दिखाया गया है। आने वाले 5 वर्ष में 5 ट्रिलियन डॉलर की हमारी अहम हिस्सेदारी होगी।

अब हम किसान को पोषक से आगे निर्यातक यानी एक्सपोर्टर के रूप में देखते हैं। हमारे पास दूध, फल, सब्ज़ी, शहद, या ऑर्गेनिक उत्पादों के निर्यात की अपूर्व क्षमता है। और इसलिए बजट में कृषि उत्पाद के निर्यात को बढ़ाने पर बल दिया गया है।

अब तक बनारस से फल-सब्ज़ी के 11 शिपमेंट विदेश भेजे गए हैं। अन्नदाता को ऊर्जादाता के रूप में तैयार करना इसी रणनीति का हिस्सा है। खेत में ही सौर ऊर्जा प्लांट लगाने से किसान को अपने उपयोग के लिए बिजली मुफ्त मिलेगी, सिंचाई की लागत कम होगी, साथ ही वह अतिरिक्त बिजली बेच भी सकेगा।

विकास की एक और ज़रूरी शर्त है : पानी। इसलिए जल संरक्षण और जल संचयन के लिए पूरे देश को एकजुट होकर खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। हमारे सामने पानी की उपलब्धता से भी अधिक पानी की फिज़ूलखर्ची और बर्बादी बहुत बड़ी समस्या है। लिहाज़ा घर में उपयोग हो या फिर सिंचाई में, पानी की बर्बादी को रोकना आवश्यक है।

पानी के संरक्षण और संचयन के साथ-साथ घर-घर पानी पहुंचाना भी ज़रूरी है। देश के हर घर को जल मिल सके इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय तो हम बना ही चुके हैं, जल शक्ति अभियान भी शुरू किया गया है। इसका बहुत बड़ा लाभ हमारी माताओं-बहनों को मिलेगा जो पानी जुटाने के लिए अनेक कष्ट उठाती हैं। अब बजट में राष्ट्रीय स्तर पर जल ग्रिड बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रकार की व्यवस्था से देश के हर उस क्षेत्र को पर्याप्त जल मिल पाएगा जिसको पानी के अभाव का सामना करना पड़ता है।

5 ट्रिलियन डॉलर के इस सफर को आसान बनाने के लिए हम स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, सुंदर भारत बनाने पर भी फोकस कर रहे हैं। हर घर को शौचालय से जोड़ने, हर जगह स्वच्छता रखने से ही बीमारियों में कमी देखने को मिल रही है।

रिसर्च बताती है कि स्वच्छता के कारण हर परिवार के स्वास्थ्य से जुड़े खर्च में भी कमी आई है। यह बचत उस परिवार की अन्य ज़रूरतों को पूरा करने में काम आ रही है। स्वच्छ भारत बनाने के लिए आयुष्यमान भारत योजना भी बहुत मददगार सिद्ध हो रही है। देश के करीब 50 करोड़ गरीबों को हर वर्ष 5 लाख रूपए तक मुफ्त इलाज सुनिश्चित हो रहा है। कम समय में लगभग 32 लाख गरीब मरीज़ों को अस्पतालों में इसका लाभ मिल चुका है।

यही नहीं, योग और आयुष के उपयोग को बढ़ावा देने से भी स्वास्थ्य के खर्च में कमी आ गई है। योग और आयुष का जिस स्तर पर हम प्रचार कर रहे हैं उससे हेल्थ टूरिज़्म की दृष्टि से भी भारत एक सेंटर बन रहा है। स्वच्छता का संबंध स्वास्थ्य से तो है ही, सुंदरता से टूरिज़्म भी बढ़ता है। यहां काशी में भी स्वच्छता और सुंदरता का लाभ हम सभी को देखने को मिल रहा है। गंगा घाट से लेकर सड़कों और गलियों तक में साफ-सफाई के कारण यहां आने वाले पर्यटक बेहतर अनुभव कर रहे हैं।

यहां हरियाली बढ़ने से काशी की सुंदरता तो बढ़ेगी ही पर्यावरण भी शुद्ध होगा। इससे यहां के पर्यटन को और गति मिलेगी। जब पर्यटन बढ़ता है तो भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। रोज़गार का निर्माण होता है। टूरिज़्म एक ऐसा क्षेत्र है जहां कम से कम पूंजी निवेश से ज्यादा से ज्यादा रोज़गार की संभावनाएं होती हैं। आजकल होमस्टे (पर्यटन के समय किसी के घर में पैसा देकर रुकना) का जो एक नया कल्चर बढ़ रहा है, उससे भी रोज़गार और कमाई के नए साधन बन रहे हैं। 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए टूरिज़्म का बड़ा रोल रहने वाला है।

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