देश के खिलाफ मिलजुल कर खेला जाता रहा था कितना खतरनाक खेल

30 जुलाई 2015 की रात ढाई बजे सुप्रीम कोर्ट यह फैसला करने के लिए विशेष रूप से खोला गया था कि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किये जाने के बावजूद आतंकवादी याकूब मेमन को आज फांसी दी जाए कि नहीं।

याकूब मेमन की फांसी रुकवाने के लिए प्रशांत भूषण, वृंदा ग्रोवर, इंदिरा जयसिंग समेत जिन वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को रात ढाई बजे खोलने के लिए मजबूर किया था।

उन वकीलों के साथ एक वकील और था। रात ढाई बजे याकूब मेमन की तरफ से उसके पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के जजों के सामने उसी वकील ने पैरवी प्रारम्भ की थी। उस वकील का नाम था आनंद ग्रोवर।

आनंद ग्रोवर उन्हीं इन्दिरा जयसिंग के पति हैं जिन्होंने याकूब मेमन की फांसी रुकवाने के लिए उस रात ढाई बजे सुप्रीम कोर्ट खुलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इंदिरा जयसिंग को काँग्रेस ने 2009 में भारत का अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल नियुक्त किया था। उस समय राजनीतिक गलियारों और न्यायिक क्षेत्रों में यह चर्चा आम थी कि सोनिया गांधी से अपनी करीबी तथा उनकी प्रिय पात्र होने के कारण इन्दिरा जयसिंग को यह पद मिला है।

ये दोनों मियां बीवी की जोड़ी लॉयर्स कलेक्टिव नाम का एक NGO भी चलाती है। डेढ़ साल पहले 1 जून 2016 को मोदी ने इस जोड़ी के NGO (लॉयर्स कलेक्टिव) का विदेशों से चंदा लेने का लाइसेंस (FCRA) इसलिए रद्द कर दिया था क्योंकि NGO को विदेशों से मिली रकम का दुरूपयोग करने का दोषी पाया गया था।

2G घोटाले का भी जो फैसला आया था उसमें CBI के वकील यही आनंद ग्रोवर थे। CBI की तरफ से मुख्य पैरवी आनंद ग्रोवर ही कर रहे थे। ध्यान रहे कि अपने फैसले के लिए जज ओपी सैनी ने कोर्ट में CBI की तरफ से की गई ढीली ढाली लचर उदासीन पैरवी के लिए जमकर लताड़ा था।

तब सवाल यही था कि सरकार ने आनंद ग्रोवर को बदल क्यों नहीं दिया? हटा क्यों नहीं दिया?

तो जानकारी के लिए बता दूं कि इस केस में CBI की तरफ से वकील के रूप में आनंद ग्रोवर की नियुक्ति मोदी सरकार ने नहीं सुप्रीम कोर्ट ने की थी। आनंद ग्रोवर को पैरवी से हटाने का कोई अधिकार सरकार के पास नहीं था। उसे हटाने या बदलने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास ही था।

जिस आनंद ग्रोवर की पैरवी की पोल खुद जज ने बहुत विस्तार से उदाहरण देकर खोली थी, उस आनंद ग्रोवर की दिल खोलकर तारीफ वो प्रशांत भूषण कर रहे थे जिन्होंने 2G घोटाले के खिलाफ PIL (जनहित याचिका) दायर की थी।

आज आनंद ग्रोवर और उसकी बीवी इंदिरा जयसिंग की उपरोक्त पृष्ठभूमि की चर्चा इसलिए, क्योंकि कल CBI ने इनके कई ठिकानों पर छापे मारकर अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज ज़ब्त किये हैं। CBI की इस छापेमारी के खिलाफ काँग्रेसी फौज समेत लुटियनिया दलालों का गैंग आगबबूला हो रहा है।

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