पत्रकारों को निर्मला सीतारमण ने औकात दिखाई, बिलबिलाया एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष शेखर गुप्ता और महासचिव एके भट्टाचार्य ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिख कर शिकायत की है कि पत्रकारों के वित्त मंत्रालय में प्रवेश को रोकने के निर्णय पर पुनर्विचार करें।

दरअसल ये विवाद 2 दिन पहले ही उपजा है। आमतौर पर बजट पेश होने के 60 दिन पहले वित्त मंत्रालय में पत्रकारों का प्रवेश बंद कर दिया जाता है (शायद इसलिए कि अगर वो अंदर जाते रहे तो बजट की कोई गोपनीयता रह ही नहीं पायेगी)।

ये पाबन्दी बजट पेश होने के साथ ही ख़तम हो जाती है। लेकिन इस बार वित्त मंत्रालय ने इसे ख़त्म करने की बजाय इसे जारी रखने का फैसला किया है।

प्रेस सूचना कार्यालय (PIB) की तरफ से मान्यताप्राप्त पत्रकारों को प्रवेश से रोक दिया गया है। जब तक कोई अधिकारी उन्हें मिलने का समय ना दे, तब तक तो भीतर नहीं जा सकते।

एडिटर्स गिल्ड बिफरा हुआ है और वो ही घिसा पिटा आरोप लगा रहा है कि ‘ये पत्रकारिता को चुप कराने वाला कदम है। पत्रकार तो वहां पत्रकार की हैसियत से सूचना एकत्रित करने जाते हैं। वो मंत्रालय की तरफ से दी जाने वाली किसी सुविधा का उपभोग करने नहीं जाते।’

अरे अरे गुप्ता जी, आप कैसे कह रहे हो पत्रकारिता को चुप कराया जा रहा है? भला पत्रकार भी कभी चुप रह सकते हैं!

वो तो अब उस श्रेणी में आ चुके हैं जो आज के ज़माने में साइलेंसर लगाने से भी चुप नहीं होते। वो तो परजीवी (Parasites) बन चुके हैं जो तरह तरह की बीमारियां फैला रहे हैं समाज में।

चलो, ये तो आपने माना कि मंत्रालय पत्रकारों को सुविधायें भी देते हैं। तभी तो उनके उपभोग की बात की आपने!

गुप्ताजी, अपने शब्दों को रोक क्यूँ लिया? ये भी कहते ना कि “हाय हाय प्रेस का गला घोटा जा रहा है, इमरजेंसी लगा दी है मोदी ने”… इत्यादि इत्यादि।

निर्मला सीतारमण के मंत्रालय ने पत्रकारों का कार्यालय में प्रवेश वर्जित रखा है, इसके पीछे ज़रूर कुछ कारण होगा। वैसे भी आज के समय में पत्रकार कौम अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो चुकी है जिनमे अधिकांश फर्जी ख़बरें (Fake News) चलाने की फैक्टरियां चला रहे हैं, बस लक्ष्य एक रहता है कि नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार हमेशा बचाव की मुद्रा में रहे।

इन और इन जैसे पत्रकारों को दरअसल दर्द ही ये है कि 5 साल से इनका मंत्रालयों में घुसना बंद हो गया और “सूत्रों की ख़बरें” नहीं दे पा रहे। लुटियन और खान मार्किट गिरोह का धंधा बहुत मंदा हो गया तो अलग अलग पोर्टल बना कर और विदेशी खाद पानी के दम पर चलते टी वी चैनलों पर झूठ फ़ैलाने का काम कर रहे हैं।

गुप्ता जी और अनेक पत्रकार मोदी विरोधी एजेंडे पर काम करते हुए मनमोहन सिंह सरकार से पारितोषिक लेते रहे हैं। पद्म पुरस्कारों के रूप में और ना जाने कैसी कैसी भौतिक सुविधाओं के रूप में जिन्हे वो ही जानते हैं। अब तो प्रधानमंत्री के साथ विदेश यात्राओं पर जाने का भी सौभाग्य नहीं मिल रहा 5 साल से!

वैसे गुप्ता जी और एडिटर्स गिल्ड एक बात भूल गए हैं… पत्रकारों पर जारी प्रतिबन्ध के बारे में। ये शायद इसलिए भी हुआ हो कि वित्त मंत्री बदल गया है। अब वित्त मंत्री एक महिला है और उसे पता है कि उसके घर में किसका आना उचित है या नहीं।

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