कश्मीर ‘की’ कोई समस्या नहीं, समस्या कश्मीर ‘में’ है

संसद में जम्मू कश्मीर पर बहस का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि न कश्मीर विवादित है और न ही PoK (पाकिस्तान के कब्ज़े वाला कश्मीर) विवादित है, ये सब भारत के अभिन्न अंग हैं।

शाह ने कहा कि तीन बातों का जवाब देश जानना चाहता है। प्रथम, स्वतंत्रता के बाद जब कश्मीर में भारत जीत की और अग्रसर था और 1 जनवरी 1949 को अभी एक-तिहाई कश्मीर पाकिस्तान के कब्ज़े में था, तो आपने (नेहरू ने) सीज़फायर या युद्ध विराम क्यों कर दिया? इसका जवाब पूरा देश पूछता है, इतिहास पूछता है।

अगर यह सीज़फायर न हुआ होता तो आज यह झगड़ा ही न होता, न ही terrorism भी न होता, न ही 35,000 जानें न गयी होतीं।

द्वितीय, हम यूएन में क्यों गए, जब महाराजा हरिसिंह ने भारतीय संघ के साथ संधि करने के बाद कश्मीर का विलय भारत में कर दिया था?

तृतीय, आज जनमत संग्रह का सवाल ही नहीं है, लेकिन हमने जनमत संग्रह के लिए क्यों सहमति दी?

शाह ने फिर कहा कि अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले संगठन Jammu Kashmir Liberation Front (JKLF) और जमात-ए-इस्लामी को भी राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसे मोदी सरकार ने समाप्त कर दिया। इन दोनों संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया और इनके कैडर को निष्क्रिय कर दिया।

शाह के अनुसार, 70 साल तक विदेश नीति के नाम पर सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जाता था (यानि कि पाकिस्तान के साथ बेहतर सम्बन्ध के नाम पर आतंकी हमलों को इग्नोर कर दिया जाता था। पहली बार हमने विदेश नीति और सुरक्षा नीति को अलग कर दिया है। हम शांति चाहते हैं, लेकिन शांति की बात तभी होगी जब हमारी सीमाओं का सम्मान किया जाएगा। आतंकवाद कभी भी बातों और पब्लिक भावनाओं से खत्म नहीं होता, बल्कि उस पर कड़ा प्रहार करना पड़ता है। यह काम हमने किया है।

शाह ने कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के चरित्र पर ही उंगली उठा दी। उनके पास पूरी सूची है कि 130 अलगाववादी नेताओं के बेटे और बेटियां विदेशों में पढ़ रहे हैं, जबकि इन नेताओं ने कश्मीर में स्कूलों को बंद करा दिया है, कॉलेजों और लाइब्रेरी जला दी है, और छात्रों को पैसा देकर सुरक्षाबलों पर पत्थर फिकवाते थे। शाह ने कहा कि हमने ऐसी व्यवस्था की है कि इनके पसीने छूट रहे हैं।

गृह मंत्री ने बताया कि कश्मीर की जेलों के अंदर आतंकवादियों के ट्रेनिंग कैंप चलते थे। एके-47 को कैसे 4 मिनट में खोलकर असेंबल किया जाता है इसके वीडियो बनते थे। लेकिन अब सरकार ने जेलों की व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त कर दिया है आज कैदियों को एहसास हो रहा है कि आतंकवाद फैलाने का क्या मतलब होता है।

पहले जो देश विरोधी बात करता था उसको सुरक्षा दी जाती थी। कश्मीर में एक नया पैमाना था, भारत के विरोध में चार बयान दे दो, आपको तुरंत सुरक्षा मिल जाएगी। जबकि पूरी दुनिया को मालूम था कि उनको कोई नहीं मारेगा। भारत की बात करने वालों को सुरक्षा नहीं मिलती थी, भारत के विरोध करने वालों को सुरक्षा मिलती थी। हमने ऐसे 919 लोगों की सुरक्षा को हटा लिया। हमने पाकिस्तान के सभी चैनलों का प्रसारण कश्मीर में बंद कर दिया।

अमित शाह ने कहा कि देश की 630 रियासतों के साथ भारत में विलय की संधि हुई थी उन सभी जगहों पर कोई 370 धारा नहीं है लेकिन नेहरू ने एक जगह (कश्मीर में) समझौता वार्ता की और आज वहां 370 लगी हुई है।

फिर अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि धारा 370 अस्थायी है, यह हमारे संविधान का अस्थायी मुद्दा है। (दूसरे शब्दों में, अगर कोई व्यवस्था अस्थायी है तो उसे समाप्त किया जा सकता है।)

गृह मंत्री ने चेतावनी दी कि जो भारत के साथ कश्मीर के जुड़ाव को स्वीकार नहीं कर सकते, जो भारत के संविधान को नहीं मानते हैं, उनके लिए इस सरकार की योजना में कोई जगह नहीं है। उन पर कठोरता भी होगी, और उन्हें कठिनाइयां भी होंगी। जब तक हम यह अप्रोच नहीं लेंगे तब तक हम इस समस्या को समाप्त नहीं कर पाएंगे।

अंत में, जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में कश्मीर घाटी के विधायकों की संख्या जम्मू और लद्दाख के विधायकों की तुलना में कहीं अधिक है। जहां कश्मीर घाटी से 46 विधायक है, वहीं जम्मू और लद्दाख क्षेत्र से कुल 41 विधायक हैं।

अब ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमित शाह ने जम्मू और लद्दाख क्षेत्र के विधायकों की संख्या को बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे पहली बार वहां की विधानसभा में उन विधायकों का बहुमत हो जाएगा जो धारा 370 हटाने का समर्थन करेंगे।

इसके साथ ही, सर्जिकल स्ट्राइक के कारण पाकिस्तान से आने वाले घुसपैठियों की संख्या में भारी कमी आई है।

कश्मीर ‘की’ कोई समस्या नहीं है। समस्या कश्मीर ‘में’ है।

कश्मीर ‘में’ समस्या को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी पर विश्वास बनाए रखें।

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