कट्टरों, आपको अब और क्या चाहिए सरकार से?

लगता है आज मोदी आलोचकों और विरोधियों को कोई मुद्दा नहीं मिला तो सरकार समर्थकों को ही ट्रोल कर रहे हैं कड़वी सच्चाई लिखने पर!

अब कुछ तथ्य जानिए :

कल पुलिस द्वारा अविरल शर्मा को एक लोकल कांग्रेसी नेता की शिकायत पर डिटेन किया गया था।

लोकल कांग्रेसी छुटभैया नेता खुद पहले आयोजन करवाना चाहता था, जिसके लिए 3 बार डेट बदली गई है, पहले 9 फिर 7 फिर 9 कर दी गई।

आगामी 9 जुलाई को फिर से आयोजन किया जाएगा, जिसमें वीएचपी समेत कई संगठन भी शामिल होंगे।

गृह मंत्रालय से पूरा सहयोग मिला है। पुलिस प्रशासन ने ऊपरी दबाव के बाद अविरल शर्मा को छोड़ा और शाम को पूजा आरती के लिए सुरक्षा के इंतजाम भी किया।

अविरल शर्मा की टीम ने धार्मिक आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली थी।

चूंकि जहां आयोजन होना था वो स्थान 30 जून की घटना होने के बाद अति संवेदनशील था इसलिए अनुमति आवश्यक थी।

हर जगह ऐसा होता है, यदि आप कोई बड़ा धार्मिक आयोजन करना चाहते है तो प्रशासन से अनुमति लेना आवश्यक होता है। ये नियम कानून सभी धर्मो पर लागू होता है। पर अक्सर इसकी अनदेखी की जाती है।

अब कोई भावनाओं में बहकर तमाम तरह के कुतर्क करे, सरकार को गाली दे, आलोचना करे, सवाल पूछे तो ये उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। लेकिन मुझसे क्यों उम्मीद रखता है कि मैं भी भीड़ में शामिल होकर उसकी तरह हुआं हुआं करूंगा!

अब कड़वी सच्चाई सुन लीजिए, जब कल अविरल शर्मा की टीम ने स्थानीय हिन्दुओं से पूजा में शामिल होने के लिए कहा तो स्थानीय हिन्दुओं ने यह कहते हुए पूजा में शामिल होने से मना कर दिया कि “आप तो बाहर से आए हुए लोग हैं, हमें यही रहना हैं।”

फेसबुक पर तो खूब गुस्सा दिखाई पड़ रहा है, पूरा फेसबुक का कट्टर हिंदू आक्रोश में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और पूरी सरकार को तमाम मुद्दों/ बयानों/ घटनाओं को एक साथ मिलाकर तरह तरह के आरोप लगा रहा है।

जबकि सच्चाई ये है कि ऊपरी हस्तक्षेप ना हुआ होता तो अविरल शर्मा भाई बिना वजह हिरासत में होते। लेकिन आप सब उसी सरकार को बिना सच्चाई जाने गालियां दे रहे हैं और हमें कहते हो कि हम डिफेंड कर रहे हैं!

सरकार को बधाई देने, सरकार के सहयोग के लिए उसकी प्रशंसा करने की जगह उल्टा सरकार को कोस रहे हैं! चलिए मान लेते हैं कि आपको पहले सच्चाई नहीं मालूम थी, पर अब तो मालूम है!

जिन फेसबुकिया कट्टरों के आक्रोश को आधार बना कर कुछ युवाओं ने खतरा मोल लेकर, अपने करियर को दांव पर लगाकर ज़मीन पर एक पहल की। उनके समर्थन में मात्र 250-300+ हिन्दू ही आए, और स्थानीय हिन्दुओं ने तो साफ मना कर दिया! इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या होगा दिल्ली के करोड़ों हिन्दुओं के लिए!

बात यहां 250-300 की नहीं है, बात यहां शक्ति प्रदर्शन की थी! दिल्ली में करोड़ों हिन्दू रहता है! सोचिए हज़ारों की संख्या में भी हम संगठित नहीं है! हम क्या उस भीड़ का मुकाबला करेंगे जो रिएक्ट करने के बजाय रिस्पॉन्ड करती है! वो हमारे मंदिर को तोड़ कर चले गए और हम भाईचारे की बात कर रहे हैं!

ये सारा सच बताने पर उन लोगों द्वारा ट्रोल किया जा रहा है जो सच्चाई नहीं जानते हैं। अब तक 17 उपद्रवियों को अरेस्ट किया गया है। अभी और शांतिदूतों की गिरफ्तारी होगी। आईबी भी जांच में इन्वॉल्व है, रिपोर्ट गृह मंत्रालय को दे रही है। अब आपको और क्या चाहिए सरकार से?

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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