हमारी ट्विंकल की हत्यारिन है हमारी कायरता

ईश्वर ना करे, ट्विंकल अगर आपकी बेटी होती।

अपने गुस्से की कल्पना कीजिये। हत्यारा आपकी नज़र के सामने होता। फिर आप किस कानून की परवाह करते? बेशक, आप उस दरिंदे का खून कर देते…

अब एक और लंबी साँस लीजिये।

आप उसका खून किस चीज़ से करते? सब्ज़ी काटने वाले चाकू से?

घर में आपके कौन सा हथियार है? साँप मारने के लिए एक लाठी तक नहीं है। तलवार भाले रखने की परंपरा खत्म हो गई, उठाने चलाने का अभ्यास भी। ये हिंसक ख्याल अब आपकी अभिजात्य मानसिकता में भी नहीं आते।

बंदूक होती तो घर में घुस कर गोली मार देते।निहत्थे घुसेंगे तो उसके अड़ोसी पड़ोसी ही आपको मार डालेंगे… क्योंकि उसका समाज किसी काफिर के साथ की हुई ज़्यादती पर उससे नाराज़ नहीं होता, उसका साथ नहीं छोड़ता।

और आप अपने पड़ोसी का नाम भी ठीक से नहीं जानते। आप हैं न्यायालय के भरोसे, न्यायालय है पुलिस के भरोसे, पुलिस है सरकार के भरोसे, और सरकार या तो उनके भरोसे है या उनसे डरती है।

ध्यान से सोचें… आप अपनी तीन साल की बिटिया की रक्षा करने में असमर्थ हैं। आप अपनी 18 साल की बिटिया की रक्षा करने में भी असमर्थ होंगे।

आपको याद होगा, अपनी बिटिया से छेड़खानी की शिकायत करने के लिए ध्रुव त्यागी छेड़खानी करने वाले के बाप के पास गए थे… उसके घर वालों ने अपने नालायक बेटे को फटकार लगाने के बजाय उसे ही चाकुओं से गोद कर मार डाला।

ध्रुव त्यागी की क्या गलती थी? सबसे बड़ी गलती थी कि वे निहत्थे गए थे। निहत्था आदमी शिकायत नहीं कर सकता, फरियाद करता है। उन्होंने शिकायत कर दी होगी… उन्हें नागवार गुज़री। आखिर आपकी बिटिया को छेड़ने तक का हक़ नहीं दिया है अल्लाह ने अपने प्यारे बंदों को?

अंग्रेजों ने आर्म्स एक्ट क्यों बनाया था? हमें नि:शस्त्र करने के लिए। कि हमें गुलाम बनाया जा सके। और हमने वह गुलामी गले लगा कर रख ली है। आज कोई भी हथियार रखने को तैयार तक नहीं है। हमें भय है कि आज अगर हमें हथियार रखने को कहा गया तो कल को उठाने को भी कहा जायेगा।

बेटा ट्विंकल, तुम हम सबकी बेटी हो… पर हम सब तुम्हें अपनी बेटी मानने को तैयार नहीं हैं क्योंकि तब तुम्हारी सुरक्षा की, तुम्हारे लिए हथियार उठाने की ज़िम्मेदारी हम पर आएगी।

हमारी ट्विंकल का कातिल कोई असलम, अफ़ज़ल, अफरोज़, सलीम नहीं होता। हमारी ट्विंकल की हत्यारिन है हमारी कायरता।

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