कैसे मुक़ाबला करेंगे हम?

मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी पढ़ रहे छात्रों को जब पहली बार चीर फाड़ का अनुभव होता है तो सामने टेबल पर एक dead body होती है… उसी को चीर के एक एक अंग प्रत्यंग, नस, नाड़ी, दिखाए जाते हैं।

ये शायद Anatomy की पहली practical क्लास होती होगी।

तो उस पहली क्लास में उस टेबल के इर्द गिर्द 25 – 30 students खड़े होते हैं… वहीं दो चार ward boy और assistants भी तैनात रहते हैं…

प्रोफ़ेसर लाश में पहला चीरा लगाता है… जब वो चीरा लगा रहा होता है, तो अनुभवी ward boys की निगाहें students के मनोभाव, भाव भंगिमा पढ़ रहे होते हैं… और इससे पहले कि कोई कटे पेड़ सा धड़ाम से गिरे फर्श पर, वो उसे थाम लेते हैं…

ये दरअसल मानव शरीर की एक सामान्य सी प्रतिक्रिया है… जब भी आप कोई हृदय विदारक दृश्य देखते हैं, या कोई ऐसा दृश्य जिसमें खून बह रहा हो… पेट खुल के अंतड़ियां बाहर आ गयी हों… तो कुछ लोगों को घबराहट होगी, कुछ को उबकाई आएगी, कुछ vomit करने लगेंगे और कुछ तो बेहोश हो के गिर ही पड़ेंगे… ऐसे में वार्ड में तैनात ward boys बेहोश होने वाले students को सम्हाल लेते हैं…

पर ऐसा एक-दो बार ही होता है… फिर धीरे धीरे आदत पड़ जाती है… खून और शरीर से बहने वाले body fluids को देखना, handle करना, उनकी बदबू बर्दाश्त करने की आदत पड़ जाती है… धीरे धीरे आदमी पत्थर का हो जाता है…

डॉक्टर अपनी ट्रेनिंग के कारण हृदयहीन हो जाते हैं… उन्हें तो बाकायदे सिखाया जाता है कि पेशेंट से किसी किस्म का भावनात्मक लगाव विकसित नहीं करना है। इसी लिए वो उनके लिए कोई व्यक्ति नहीं बल्कि एक subject है (मुन्ना भाई MBBS याद कीजिये)

अगर आप अपने पेशेंट से इमोशनली जुड़ गए तो फिर आप उसका इलाज ही नहीं कर पाएंगे… अपने बेटे के शरीर पर कौन चीरा लगाएगा… इसलिए कोई डॉक्टर अपने परिवार की सर्जरी खुद नहीं करता…

ज़िन्दगी और मौत डॉक्टरों के लिए रोज़मर्रा का काम है, इसीलिए वो बहुत ज़्यादा प्रभावित नहीं होते… इसीलिए आजकल के डॉक्टर बेहद गरीब दीन हीन मरीज देख के भी नहीं पसीजते और 100 के 1000 बना देते हैं…

यही हाल पुलिस वालों का है… वो वही रोज़ रोज़ एक्सीडेंट, खून, सड़क पर बिखरे लोथड़े, लाशें देख के पक जाते हैं… शायद इसीलिये वो शव लेने आये परिजनों से भी रिश्वत मांग लेते हैं।

कहने का मतलब ये कि ट्रेनिंग और सतत अभ्यास से व्यक्ति को हृदयहीन दरिंदा बनाया जा सकता है।

ये ट्रेनिंग इस समुदाय विशेष में inbuilt है… मने पूरा पैकेज है… उधर हमारे यहाँ दया ममता मानवता inbuilt है… by default…

कैसे मुक़ाबला करेंगे हम?

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