माँ की रसोई से हर्बल चाय : Hot and Cold Tea

कहते हैं चाय हमारे यहाँ का उत्पाद नहीं, चीन से आया है. हम लोग कभी चाय कॉफ़ी नहीं पीते थे, जब भी पिया है काढ़ा ही पिया है. क्योंकि चाय में मौजूद टेनिन और कॉफ़ी का कैफीन कुछ देर के लिए तो ऊर्जा देता है लेकिन अधिक मात्रा में लेने से या आदत पड़ जाने से यह शरीर को नुकसान ही पहुंचाता है. और हमारे यहाँ तो चाय का प्रचलन इतना अधिक है कि कई लोग दिन में दस पन्द्रह कप चाय पी जाते हैं. मेहमान नवाज़ी तो चाय के बिना जैसे अधूरी है.

चाय के नुकसानदेय होने का दूसरा कारण है कि हम हर वस्तु में भारतीय छौंक लगा देते हैं. जब अंग्रेज़ चीन से चाय भारत लेके आए थे तब उसको पीने का तरीका अलग था, उसे विभिन्न वनस्पतियों के साथ काढ़े के रूप में ही पिया जाता था, आज भी चीन में अपने वास्तविक रूप में ही पी जाती है. लेकिन हमने उसमें दूध डालकर उसे और अधिक स्वास्थ्य विरोधी बना दिया.

इसलिए चाय और कॉफ़ी तो अपने आप में ही सेहत के लिए ठीक नहीं, उसकी जगह मैं आपको ऐसा काढ़ा बनाना बता रही हूँ जो आपको चाय से अधिक स्वाद देगा और साथ में पोषक तत्व और स्फूर्ति भी. जो लोग दूधवाली चाय छोड़कर ब्लैक टी या ग्रीन टी पीने लगे हैं, उनके लिए यह बहुत कारगर सिद्ध होगा क्योंकि ग्रीन टी के नाम पर बड़ी बड़ी कंपनियों ने जो लूट मचा रखी है, और जिसकी कीमत मध्यमवर्गीय परिवार के बजट के बाहर होती है उनके लिए मेरा यह फ़ॉर्मूला बहुत उपयोगी सिद्ध होने वाला है.

तो आइये बनाते हैं हर्बल टी –

इसकी सामग्री तयशुदा नहीं होती, आप इसे अपने पास उपलब्ध किसी भी वस्तु से बना सकते हैं.

आप यदि नियमित रूप से इसे पीना चाहते हैं तो सबसे पहले आप चाय मसाला पहले से ही बनाकर रख लीजिये, जिसमें सौंठ, इलायची, दालचीनी, लौंग काली मिर्च, जायफल का मिश्रण होता है.

इसकी मात्रा आपनी पसंद के अनुसार कम अधिक रख सकते हैं, सामान्यत: इसमें सौंठ और इलायची ही अधिक होती है. बाकी वस्तुएं बहुत कम मात्रा में होती हैं.

दूसरा आप सूखे बेर हमेशा घर में रखिये जो आपको बहुत ही सस्ते दाम पर मिल जाते हैं.

जिनके घर में तुलसी का पौधा होता है उनके लिए तो वह वरदान है. आप चाहें तो हरी पत्तियाँ भी इसमें डाल सकते हैं, या फिर इसकी पत्तियाँ, मंजरी और शाखा सहित छाया में सुखाकर रख लीजिये. इसे एयर टाइट रखना भी आवश्यक नहीं. सूखी तुलसी सिर्फ आपकी ही नहीं अपनी देखभाल भी खुद कर लेती है.

आपके आस-पास सहजन का पेड़ हो तो आपके लिए आशीर्वाद स्वरूप है, यदि नहीं है तो जब भी उपलब्ध हो उसकी पत्तियाँ भी छाया में सुखाकर रख लीजिये, इसका स्वाद पसंद है तो इसकी फली भी सुखाकर पीसकर रख सकते हैं.

पुदीने के बिना तो चाय का आनंद ही नहीं, इसलिए मौसम में हरी पत्तियाँ और जब मौसम न हो तबके लिए पत्तियों को सुखाकर रख लीजिये, इसकी खुशबू हमेशा बनी रहती है यदि वह संकर जाति की न हो.

और थोड़ी सा ब्राह्मी चूर्ण आप किसी भी पंसारी की दुकान पर सस्ते दाम में ले सकते हैं. (ब्राह्मी के फायदे आप गूगल पर खोजेंगे तो दंग रह जाएंगे, आपके मस्तिष्क और ह्रदय से लेकर शरीर के हर अंग और सिस्टम के लिए लाभकारी है.

सौंफ और जीरा तो आपको घर की रसोई में ही मिल जाएगा.

और हाँ हो सके तो घर में किसी गमले में ही लेमन ग्रास का पौधा अवश्य उगा लें. कुछ न होने पर यह सबसे अधिक काम आता है.

यदि आप चाय में कुछ मीठा डालना चाहते हैं तो उसमें हमेशा गुड़ डालिए.

गुड नहीं डालना चाहते तो मिश्री डालिए, कभी भी बाज़ार में उपलब्ध शक्कर न डालें. शक्कर एक ऐसा धीमा ज़हर है जो आपके शरीर को बहुत जल्दी वृद्धावस्था की ओर ले जा रहा है. 80 के बाद होने वाले रोग अब 30 पर होते होते ही लग जाते हैं, उसका मुख्य कारण यह शक्कर ही है.

आप सोच रहे होंगे इतनी सारी सामग्री इकट्ठी कर ही यदि हर्बल टी बनाना है तो इससे तो बाज़ार से हर्बल टी की टेबलेट्स ही खरीद ली जाए.

तो मैं आपको बता दूं यह सारी सामग्री आपको एक साथ नहीं डालना है, यह आपको अलग स्वाद के लिए बनाई जाने वाली हर्बल टी के लिए जुटाई गयी सामग्री की सूची है. जिसे आप अपने पसंद के स्वाद के अनुसार डाल सकते हैं.

और आप इतनी जहमत भी नहीं उठाना चाहते तो मुझसे कहिये, मुझे ऐसे मसाले बनाने में बहुत आनंद आता है. मैं इसे पूरे मनोयोग से अपने हाथों से कूट पीसकर घर में ही बनाती हूँ. क्योंकि मेरे घर में तुलसी, पुदीना, सहजन, लेमन ग्रास सब मिल जाएगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह हर्बल टी न सिर्फ आपको ताजगी देती है बल्कि आपका वज़न कम करती है और शरीर के विष निकालती है. और हारमोंस को नियंत्रण में रखती है, आखिर शरीर का सारा खेल इन मुए हारमोंस के हाथ में ही है ना, तो क्यों न इन हारमोंस को अपना गुलाम बना लिया जाए…

अब सबसे पहले आप एक ग्लास पानी उबालने रखिये, उसमें दो चुटकी ब्राह्मी, एक चौथाई चम्मच चाय का मसाला, पुदीना, तुलसी की पत्ती, एक चौथाई चम्मच सौंफ और आवश्यकता अनुसार गुड़ डाल दीजिये.
जब इसमें उबाल आ जाए तो दो मिनट और उबलने दीजिये फिर दो चार मिनट ढांक कर रख लीजिये.

अब इसे कप में छानकर थोड़ा सा नीबू रस नीचोड़कर पीजिये. यह न सिर्फ स्फूर्ति देगा बल्कि गर्मियों में भी आपको अन्दर से कूल रखेगा.

दूसरा तरीका हैं कि एक ग्लास पाने में दो चार सूखे बेर, कुछ सहजन तुलसी की पत्तियाँ, एक चौथाई चम्मच जीरा, उतनी ही सौंफ, चुटकी भर सेंधा नमक और थोड़ा सा गुड़ डालकर अच्छे से उबालकर छानकर पी लीजिये. और उबले हुए बेर तो आप बच्चों को खाने दे दें, उन्हें बहुत आनंद आएगा.

हर्बल टी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि चाय छानने के बाद छलनी में इकट्ठी हुई सामग्री आप रोज़ अपने घर के गमलों में डाल दें, आपकी चाय सिर्फ आपके लिए ही नहीं आपके घर के पौधों के लिए भी बड़ी काम की है.

इस तरह से आप उपरोक्त सामग्री को कम ज्यादा मात्रा में अलग अलग दिनों में अलग अलग तरीके से उपयोग कर रोज़ अलग स्वाद की चाय पी सकते हैं.

जो लोग कोल्ड टी पीना चाहते हैं वे नीबू की जगह इसमें संतरे या मौसंबी का ज्यूस डाल सकते हैं.

बस इसे फ्रिज में न रखें, एक जग में आइस क्यूब्स निकालकर चाय का ग्लास उसमें रख दें, कुछ देर में वह ठंडा हो जाएगा.

आप चाहें तो जो चीज़ें सूखी हैं, उसे एक साथ पीसकर एक बोतल में भर कर रख लें और अपनी आवश्यकता और स्वाद अनुसार मात्रा तय कर लें, जैसे मैंने किया है.

बस ब्राह्मी के चूर्ण को हमेशा अलग रखिये.

कोल्ड टी में आप गुड़ की जगह शहद भी डाल सकते हैं. स्वाद और पौष्टिकता दोनों में इजाफा होगा.

और हाँ चैत्र माह में गुड़ नहीं खाना चाहिए. कुछ अन्य सावधानियां नीचे दे रही हूँ उसे अवश्य पढ़ें

चैत्र-माह मे॑ गुड़ मत खाना ।
दिन उगते ही चने चबाना ।
आए जब वैशाख का महीना
तेल छोड़ बेल रस पीना ॥

ज्येष्ठ मास मे राई न खाओ
बीस मिनट दिन मे सुस्ताओ ।
मत आषाढ बेल फल खाना
खेल कूद मे लगन बड़ाना॥

सावन नीबू खाना छोड़ो।
बाल- हरण से नाता जोड़ो॥
भादो महा मही मत खाना।
तिक्त – वस्तु का लाभ उठाना॥

कवार करेला कभी न खाना।
लेकिन गुड़ से हाथ मिलाना ॥
कार्तिक माह दही मत खाना।
किन्तु आँवला तुम अपनाना॥

मत अगघन में जीरा खाना।
तेल युक्त भोजन अपनाना॥
पौष माह मे धानिया छोड़ो।
दुग्धपान से नाता जोड़ो॥

माघ माह में मिश्री छोड़ो।
घी- खिचड़ी भोजन मे जोड़ो॥
फ़ाल्गुन माह चने मत खाना।
प्रातःकाल अवश्य नहाना॥

गोमय उत्पाद व घर में बनी खाद्य सामग्री उपलब्ध है –

गोमय उत्पाद
हर्बल शैम्पू – 100ml – 50 rs
मुल्तानी मिट्टी साबुन – 30 rs
हर्बल साबुन – 40 rs
बालों के लिए तेल – 100 ml – 150 rs
मंजन – 80 gm – 70 rs
टूथ पाउडर – 50gm – 70 rs
Hair Powder – 150gm – 80 rs


हाथ से बनी खाद्य सामग्री
आंवला कैंडी – 100 gm – 80 rs
आंवला अचार – 100 gm – 80 rs
आंवला चटनी – 100gm – 80rs
नीबू चटनी – 100gm – 80rs
हर्बल टी – 100 gm – 200 rs
अलसी का मुखवास – 100 gm – 100 rs
चाय मसाला – 100gm – 200 rs
गरम मसाला – 100gm – 200rs
सहजन पत्तियां कैल्शियम के लिए – 50 gm – 100 rs

जूट बैग – 100 rs से शुरू
सब्ज़ी का सूती झोला – 150 rs
सूती सेनेटरी पैड्स (use and throw) – 150 rs (5 pads, 2 liners)
सूती सेनेटरी पैड्स (Washable) – 400 (5 pads, 2 liners)
गोबर का Foot Mat जो पैरों के नीचे रखकर बैठने से कई रोगों को कम करता है – 200 rs

  • माँ जीवन शैफाली – Whatsapp 9109283508



संपर्क – माँ जीवन शैफाली – Whatsapp 9109283508

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