तो और किस भाजपाई महानायक के खाते में दर्ज़ की जाएं ये अभूतपूर्व उपलब्धियां?

कोई आश्चर्य नहीं हो रहा…

त्रिपुरा में भाजपा अपना एक विधायक भी कभी नहीं बनवा सकी थी। 2017 में वहां पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। इस बार त्रिपुरा में लोकसभा की दोनों सीटें भी जीत लीं।

हरियाणा में भाजपा विधायकों की संख्या कभी दहाई नहीं पार कर पाई थी। 2014 में वहां पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में क्लीन स्वीप की। स्थानीय निकायों में शत प्रतिशत जीत दर्ज की।

असम में भाजपा के विधायकों की संख्या अधिकतम 11 तक रही थी। लेकिन 2016 में असम में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। लोकसभा में 2014 में 7 तथा 2019 में 9 सीटें जीतीं।

बंगाल में भाजपा के 2 से अधिक विधायक और 2 से अधिक सांसद कभी नहीं जीते थे। लेकिन 2019 में 18 सांसद जीते और राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से 128 सीटों पर भाजपा नम्बर वन पर रही।

कश्मीर में भाजपा सदा अप्रासंगिक ही रही थी क्योंकि वहां उसके विधायकों की संख्या अधिकतम 11 रही थी। लेकिन 2014 और 2019 में तीन लोकसभा सीटें जीतने के अलावा 2014 में भाजपा दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी, राज्य में भाजपा का उप मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष बना।

1996 और 1998 की प्रचण्ड राम लहर, अटल लहर के बावजूद उत्तरप्रदेश में भाजपा 60 की संख्या नहीं पार कर सकी थी।

2002 के बाद तो स्थिति इतनी बदतर हो गयी थी कि 2012 तक उत्तरप्रदेश में भाजपा हर चुनाव में तीसरे चौथे नम्बर की पार्टी बन कर रह गयी थी। लेकिन लोकसभा चुनाव 2014 में 72 और 2019 में 63 सीटें जीतने के साथ ही 2017 में 325 सीटों के साथ तीन चौथाई बहुमत लेकर सरकार भी बनाई।

उपरोक्त सूची बहुत लंबी है।

भाजपा की यह अभूतपूर्व ऐतिहासिक उपलब्धियां किसके खाते में दर्ज की जाए?

नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी के करिश्मे के अलावा उपरोक्त उपलब्धियों का श्रेय किस भाजपाई महानायक की खोपड़ी पर लाद दिया जाए।

इन दो नामों के अलावा वो तीसरा नाम कौन सा है जो 2014 से पहले भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में दण्ड नहीं पेल रहा था? और जिसने ठीक 2014 से पहले धूमकेतु की तरह उभर कर भाजपा की झोली में इतनी ढेर ऐतिहासिक उपलब्धियां भर दीं?

आज यह सवाल इसलिए क्योंकि अमित शाह के गृहमंत्री बनते ही पार्टी का ही एक वर्ग प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के खिलाफ जम कर ज़हर उगलने में जुट गया।

मुझे यह नजारा देखकर कोई आश्चर्य नहीं हो रहा क्योंकि यूपी में क्षुद्र कुटिल कुत्सित महत्वाकांक्षाओं से संक्रमित झुंड को प्रचण्ड जनाधार वाले नेता कल्याण सिंह के राजनीतिक कद, पद और भविष्य को इसी तरह खाते चबाते हुए देखा है। उसके बाद उसी यूपी में भाजपा को राजनीतिक भिखारियों की स्थिति में भी देखा है।

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