विदेशमंत्री और गृहमंत्री 2019 : भारत-पाकिस्तान

प्रधानमंत्री मोदी की 2019 की सरकार के मंत्रिमंडल के विभागों की घोषणा हो चुकी है और उसके साथ सोशल मीडिया पर, यहीं के ज्ञान अज्ञान से संचित, एक से एक राजनीतिक विशेषज्ञों की उस पर सहमित और असहमिति भी आने लगी है।

मुझे इस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नही देनी है क्योंकि, न मैने मंत्रिमंडल के गठन को लेकर दिमाग लगाया था और न ही इस पर अपनी नींद हराम की, कि कौन सा विभाग किसको मिलेगा और कौन किस विभाग का हकदार है।

मेरी उत्सुकता, भारतीय उपमहाद्वीप और वैश्विक सामरिक चक्रव्यूह को लेकर सिर्फ एक बात पर थी कि नरेंद्र मोदी भारत के साथ भविष्य के वैश्विक बदलाव को देखते हुए, सुषमा स्वराज के बाद विदेशमंत्री और इन बहलावों से निपटने के लिए किस को गृहमंत्री बनाएंगे।

विदेशमंत्री को लेकर मेरी उत्सुकता कल ही समाप्त हो गयी थी ज़ब सुब्रमण्यम जयशंकर ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली थी और दूसरी उत्सुकता अमित शाह को गृह मंत्रालय दिए जाने पर समाप्त हो गयी है।

मैं प्रधानमंत्री मोदी के इन दोनों चुनावों से पूर्ण रूप संतुष्ट हूँ क्योंकि उनके प्रधानमंत्रितत्व काल से पाकिस्तान को लेकर जो फोर्थ जेनरेशन वॉर चालू है, उसके टुकड़े टुकड़े में परिणाम और आंतरिक उग्र प्रतिक्रियाएं आने वाली हैं और ये दोनों इसका सही परिप्रेक्ष्य में सामना कर लेंगे।

आज, मोदी एक ऐसे समय में दोबारा भारत के प्रधानमंत्री बने है जब, हमारा पड़ोसी पाकिस्तान, 1971 के बाद की अपनी सबसे मुश्किल घड़ी से गुज़र रहा है। आज पाकिस्तान, जहां आर्थिक अराजकता में धंसता चला जा रहा है, वही सीमाई प्रांत पख्तूनख्वाँ में, पश्तून तहाफुज़ मूवमेंट के झंडे के नीचे, पख्तूनों ने पाकिस्तानी सेना के विरुद्ध विद्रोह कर दिया है, जो वज़ीरिस्तान इलाके में हिंसक मोड़ ले चुका है।

पाकिस्तान, अभी तक बलोचिस्तान में ही फंसा था लेकिन अब, अफगानिस्तान से लगी अपनी सीमा में उसे पख्तूनों पर सैनिक कार्यवाही करनी पड़ रही है।

अब क्योंकि पाकिस्तान के साथ चीन भी यही मान कर चलता है कि पाकिस्तान में जो भी ऐसा कुछ होता है, उसके पीछे भारत का हाथ होता है, इसलिये वह अपने यहां उठ रहे सभी आंतरिक संकटों के मूल की तरफ न जाकर, अपनी दमनकारी सैनिक कार्यवाही में फंस जाता है।

इस सबका परिणाम यह है कि वहां के समाज में एक अजीब सी दहशत व बेचैनी है। नैराश्य में फंसे पाकिस्तान के समाज के अंदर से, पाकिस्तानी सेना को लेकर तो खरी खरी बात खुल कर सामने आनी नहीं है लेकिन पाकिस्तान से विस्थापित हुये पाकिस्तानी आवाज़ उठाने लगे है। कल तक जो असंभव सी लगने वाली बात थी, वह आज इस रूप में सामने आने लगी है कि वे अपनी समस्या के हल के लिए, भारत की तरफ आशा की दृष्टि से देखने लगे है।

इन बातों का पता चलना पहले असंभव था लेकिन आज के इंटरनेट के युग में लोग अपनी आवाज़ दूर तक पहुंचाने लगे हैं। कहने को तो ये महज़ चंद आवाज़ हैं लेकिन ये उन ऐसे लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो हालात को स्वीकारते तो ज़रूर है लेकिन सार्वजनिक रूप से आने की हिम्मत नही करते हैं।

आइये आज आपको एक ऐसे पाकिस्तानी आरिफ अजाकिया को सुनवाना है, जो अपने पाकिस्तान की टूटन व पाकिस्तानी सेना की उसमें भूमिका को लेकर आहत है। वो पाकिस्तानियों को सच देखने और स्वीकारने को लेकर अपील करता रहता है। आरिफ अज़ाकिया ने मोदी से अपील की है कि वो पाकिस्तान की सरकार व सेना को सबक सिखाये और पाकिस्तान की जनता को उनके अत्याचारों से बचाएं।

मैं यह मान सकता हूँ कि ज़्यादातर लोगों के लिए यह अपवाद होगा लेकिन मैं इसको अपवाद नहीं मानता बल्कि यह भारत पाकिस्तान के बीच चल रहे फोर्थ जनरेशन वॉर का हिस्सा है। यही सब कुछ अगले दो वर्षों में अलग अलग तरीके से, अराजकता, विस्फोट, दंगे व द्रोह के रूप में परिणाम देने लगेगा, जिससे भारत भी अछूता नहीं रहेगा। इसीलिए इन घटनाओं के नेपथ्य में, भारत के विदेशमंत्री व गृहमंत्री की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण होने वाली है।

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