Fire Safety Inspection : जो आपने कभी सोचा नहीं था

सर्वप्रथम एक इलेक्ट्रिक टेस्टर (इससे आप परिचित होंगे सामान्यत: प्रत्येक घर में होता है) लीजिए और जैसा चित्र में दिखाया गया है अपने घर दुकान कार्यालय के सभी बिजली के सॉकेट का निरीक्षण कीजिए, जैसा नीचे बताया गया है :

  1. सॉकेट बाईं ओर तथा स्विच दाईं ओर होना चाहिए (मानकों के अनुसार)
  2. सॉकेट में निचले दाँए छिद्र में टेस्टर लगाइए, स्विच ऑन कीजिए विद्युत इस छिद्र में होनी चाहिए, बाँए छिद्र में नहीं (मानकों के अनुसार)
  3. अर्थिंग अनिवार्य रूप से होनी चाहिए

यदि सॉकेट दाईं ओर व स्विच बाईं ओर है अथवा सॉकेट के बाँए निचले छिद्र में विद्युत है, मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि 90% सम्भावना यही है कि ऐसा ही होगा (लाइव एवं न्यूट्रल कनेक्शन उल्टे ही होंगे, मानकों के विपरीत होंगे) इसे तुरन्त ठीक कराइए।

हमारे देश में “चलता है” का एटीट्यूड चलता है। सामान्य छोटे-मोटे इलेक्ट्रिशियन तो छोड़िए, मैंने बड़े-बड़े बिल्डर्स द्वारा निर्मित अपार्टमेण्ट्स में, अनेकों बड़ी कम्पनियों के कार्यालयों में देखा है कि बिजली की फिटिंग मानकों के अनुरूप नहीं होती।

विषय को आगे बढ़ाने से पूर्व एक सत्य घटना बता रहा हूँ :

टाटा समूह के एक उपक्रम को हम आई टी व नेटवर्क सम्बन्धित सेवाएँ दिया करते थे। कम्प्यूटर के कुछ उपकरण खराब होने लगे। जब तीसरी-चौथी घटना हुई तो मैं सतर्क हुआ। उनके कार्यालय के परिसर का राउण्ड लगाना आरम्भ किया। इधर-उधर दृष्टि दौड़ाते हुए निरीक्षण किया। कुछ जलने की दुर्गन्ध आ रही थी। हमने प्रबन्धन को तुरन्त अलर्ट किया कि आपके यहाँ हाइ वोल्टेज आ रही है। तुरन्त अपनी बिजली की फिटिंग और उपकरणों का निरीक्षण करवाइए।

निरीक्षण हुआ सब कुछ ठीक पाया गया। कुछ दिन सब ठीक रहा। एक दिन फिर मेरा उस कार्यालय में जाना हुआ, जलने की दुर्गन्ध अभी भी थी। फिर प्रबन्धन से बात की। इस बार मैंने कहा कि निरीक्षण मेरे सामने करवाइए। इलेक्ट्रिशियन बुलवाए गए मैंने बिजली के मुख्य पैनल खुलवाए।

2 फेज़ के कनेक्शन के बीच में एक मोटे चूहे की डेड बॉडी फँसी पाई गई। एक बड़ी दुर्घटना टल गई थी।

एक अन्य घटना में मुख्य पैनल में न्यूट्रल कनेक्शन लूज़ था। और तीन लाइव फेज़ के माध्यम से न्यूट्रल के बिना बिजली का उपयोग हो रहा था, उच्च वोल्टेज पर। अत्यन्त खतरनाक स्थिति थी। मैंने ऐसे अनेकों मामले देखे हैं।

सुना है सूरत में भी ऐसा ही हुआ था। एसी के कम्प्रेशर में शॉर्ट सर्किट हुआ जो पहले और दूसरे तल के बीच था और वहाँ से एक वर्टिकल डिस्पले पैनल के माध्यम से ऊपरी तल तक आग पहुँची। वहाँ भी बिजली की फिटिंग में ऐसा ही दोष रहा होगा। अर्थिंग नहीं की गई होगी, MCB या तो होगी नहीं, या फिर कनेक्शन उल्टे रहे होंगे अन्यथा MCB ट्रिप होनी चाहिए थी… शॉर्ट सर्किट नहीं होता।

इस सबकी चर्चा क्यों की?

हमारे भारत भर में इलेक्ट्रीशियन आदि का न तो लाइसेन्स होता है, न उनके कार्य की कोई प्रामाणिकता, न कोई निरीक्षण होता है।

विडम्बना यह है कि आग लगने की घटनाएँ बहुत अधिक होती हैं और अधिकांश घटनाएँ बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण होती हैं… क्या मज़ाक है।

और जो अग्नि सुरक्षा जाँच होती है वह भी एक औपचारिकता होती है, अधिकांशत: अनप्रोफेशनल जाँच होती है। पता ही नहीं होता कि जाँच करनी कैसे है। हो सकता है मेरी बात आपको अतिशयोक्ति लगे, तो बाबूजी मैं फिर कह रहा हूँ :

अग्नि सुरक्षा जाँच कोई एक बार की प्रक्रिया नहीं है। जबकि हमारे यहाँ एक ही बार की जाती है भवन के निर्माण के बाद, और प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है। अग्नि सुरक्षा जाँच नियमित रूप से होनी चाहिए, जैसे वाहन का प्रदूषण नियन्त्रण प्रमाणपत्र एक नियत अवधि तक वैध होता है वैसे ही इसकी भी एक वैधता अवधि होनी चाहिए। अग्नि सुरक्षा जाँच नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष होनी चाहिए। किन्तु सतर्कता और सजगता नहीं होगी तो यह सब केवल चर्चा तक ही रह जाएगा।

इसीलिए मैंने पिछले लेख में लिखा था कि क्या केवल बिल्डर और कोचिंग संचालक दोषी है? जी नहीं, दोषी तो हर वह व्यक्ति है जिसका भवन निर्माण में, किसी छोटी-मोटी फिटिंग में और निरीक्षण में, उपयोग में किसी भी रूप में भूमिका रही हो।

सारांश : आग लापरवाही से ही लगती है। आग, पानी और बिजली से कभी नहीं खेलना चाहिए। आग, रोग और बुरी आदत को छोटा नहीं समझना चाहिए, बढ़ने से पहले अनुमति नहीं माँगते और तुरन्त नियन्त्रण से बाहर हो जाते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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