कुछ लोगों को डरना होगा… पर कब?

साहेब की बॉडी लैंग्वेज और बातें डराने वाली है। शायद वे अप्राप्त की प्राप्ति, किंवा जो बच गया है उसे साधने की रणनीति पर चल सकते हैं। हो सकता है उन्हें अवतारवाद जैसी कोई गलतफहमी हो गई हो, यह भी हो सकता है कि वे #केसरी_फ़िल्म के उस दृश्य वाली गलती कर रहे हो जब नायक शत्रु पक्ष के एक “बच्चे” को छोड़ देता हैं और वह उसकी ही पीठ में छुरा घोंप देता है।

विगत 5 वर्ष की उनकी सबसे बड़ी असफलता यह रही कि “कुछ लोगों को डरना होगा” जो कहा था, वे डरे नहीं।
आरम्भ में तो उनकी पतलून भीग गई थी, लेकिन समय के अनुक्रम में उनका भय समाप्त हो गया। वे तिलमिलाए जरूर, बिलबिलाए भी, डरने की एक्टिंग की, मगर डरे नहीं।

जैसे कोई जबरा किसी अपराधी का कॉलर पकड़, ज्यों ही झापड़ मारने वाला होता है कि ढीठ और अनुभवी अपराधी इतनी जोर से चिल्लाता है कि जबरा,,,, चौंक कर पीछे हट जाता है….. ठीक वैसे ही…. उन्होंने डरने का ऐसा कृत्रिम माहौल खड़ा किया कि उस चिल्लाहट में खुद साहेब ही डर गए। 2014 के बाद, प्रतिदिन यह ग्राफ बढ़ता गया। बड़े से बड़े द्रोही भी नित्य निडर होते रहे और साहब एंड कम्पनी की निडरता घटती रही। 5वर्ष पूरे होते होते, यह ढोंग चरम पर था कि पुलवामा हो गया।

खैर……. अब हुआ तो हुआ! मगर यह सच्चाई है कि देश और धर्म के शत्रुओं में आज भी कोई डर नहीं है। योगीजी का कुछ संकोच अवश्य है, पर साहब की #कण्टक_उन्मूलन क्षमता की बुरी तरह पोल खुल गई है।

साहब के ये 300 दंडाधिकारी भी सेफज़ोन में टहलने वाले महाशय निकले। “कुछ और” पाने की मृगतृष्णा में भटकते जीवों जैसे, ग्राउंड की गर्मी से बचकर, साहेब की छाया में सिकुड़ते हुए से….. प्रज्ञा के बहाने दिया गया वक्तव्य, इस संकोच को और संघनित करेगा।

उम्मीद है, नये 197 सिपहसालार में से, कुछ तेजस्वी लोग निकलें और भ्रम को तोड़ने का प्रयास करें।

राजा में यदि क्षात्र तेज नहीं है तो वह NM भी MM जैसा ही है।

कुछ लोगों को डरना होगा…… पर कब?

समय तो बीता जा रहा है, उम्र निकलती जा रही है। राजा यह क्यों नहीं समझ रहा कि बिना कण्टक उन्मूलन के आपकी सुव्यवस्था, एक क्षण में दुरवस्था में बदल जाएगी।

चक्रवर्तित्व सम्पादन हो गया, अब पहला पहला काम कण्टक उन्मूलन होना चाहिए। यह बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था। कोई बात नहीं, हमें विश्वास है, अब हो सकता है, आप कर सकते हैं। शीघ्र कीजिए। उन फाइलों को सबसे पहले निपटाना चाहिए।

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