देश ने किसी नए नवेले नौसिखिए को प्रधानमंत्री नहीं चुना है…

आज़ादी के बाद के 72 सालों में सम्भवतः यह पहला अवसर था जब जम्मू कश्मीर की जम्मू और ऊधमपुर लोकसभा सीटों पर काँग्रेस, पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस का गठबंधन चुनावी मैदान में उतरा था।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ तो काँग्रेस का औपचारिक गठबंधन था लेकिन आश्चर्यजनक रूप से पीडीपी ने बिना गठबंधन किये हुए ही इन दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी नहीं खड़े किए थे। यह पीडीपी द्वारा काँग्रेस को दिया गया अघोषित समर्थन था, काँग्रेस के साथ पीडीपी द्वारा किया गया अघोषित गठबंधन ही था।

पिछली बार 2014 में भाजपा द्वारा जीती गयी ऊधमपुर और जम्मू लोकसभा सीटों पर इस बार भाजपा के विरोध में राज्य की शेष तीनों प्रमुख पार्टियों की यह अभूतपूर्व एकता चौंकाने वाली थी।

लेकिन जो परिणाम सामने आया वो और भी ज्यादा चौंकाने वाला सिद्ध हुआ। भाजपा ने ऊधमपुर लोकसभा सीट लगभग साढ़े तीन लाख वोटों से तथा जम्मू लोकसभा सीट 2.89 लाख वोटों से जीत ली है।

इन 2 सीटों के अलावा पिछली बार जीती गयी लद्दाख की लोकसभा सीट इस बार भी भाजपा ने जीती है। जबकि अपने सबसे मज़बूत राजनीतिक गढ़ अनंतनाग में महबूबा मुफ्ती केवल चुनाव नहीं हारी बल्कि तीसरे स्थान पर पहुंच गयी।

यह परिणाम सुखद आश्चर्य से तो सराबोर करता ही है साथ ही साथ एक गूढ़ सन्देश भी देता है।

याद करिये कि जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनाने के फैसले के खिलाफ सोशल मीडिया में समर्थकों ने ही कैसा गज़ब हंगामा हुड़दंग किया था। जबकि उस फैसले का अच्छा या बुरा प्रभाव जम्मू की जनता पर ही पड़ना था। उसी पर पड़ा भी होगा। इसके बाद जम्मू की जनता का फैसला देश के सामने है।

मेरे पुराने लेख गवाह हैं कि पीडीपी के साथ सरकार बनाने के फैसले का समर्थक मैं पहले दिन से ही था, और अंतिम दिन तक रहा क्योंकि मैं आश्वस्त था कि प्रथम दृष्टया यह फैसला लोगों को भले ही नहीं भा रहा हो लेकिन जिन लोगों ने यह फैसला लिया है उन लोगों ने बहुत सोच समझकर ही यह फैसला लिया है।

हालांकि अभी भी उस फैसले का आंशिक परिणाम ही सामने आया है। पूरा परिणाम निकट भविष्य में सामने आएगा जो चौंकाएगा भी और आनंदित भी करेगा।

आज उपरोक्त उल्लेख इसलिए, क्योंकि देख रहा हूं कि अभी शपथग्रहण की तारीख भी तय नहीं हुई है लेकिन प्रधानमंत्री को दिए जा रहे हाहाकारी/ प्रलयंकारी सुझावों, सलाहों की प्रचण्ड बाढ़ आ गयी है कि वो क्या करें क्या नहीं करें…

मेरा इतना ही कहना है कि देश ने किसी नए नवेले नौसिखिए को नहीं बल्कि प्रधानमंत्री के रूप में 5 साल तक खूब ठोंक बजाकर देखने, जांचने, परखने के बाद नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री का पद दोबारा सौंपा है, पिछली बार से अधिक समर्थन और विश्वास के साथ सौंपा है।

देश, धर्म, समाज के हित-अहित का आंकलन करने में वो पूर्ण रूप से सक्षम समर्थ हैं। अतः सरकार की प्राथमिकताएं उन्हीं को तय करने दीजिए, फैसले उन्हीं को करने दीजिए। ध्यान रखिये कि अनावश्यक हुड़दंग रंग में भंग ही डालेगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY