HDFC Life और सुन त्ज़ु की आर्ट ऑफ वॉर

सुन त्ज़ु का सूत्र है कि खुद को जानो, शत्रु को जानो, फिर सोचो कैसे लड़ना है।

जो इन दोनों बातों को पूरी तरह से जानता है उसको फिर रणभूमि तथा स्थलकाल का भी ख्याल रखना चाहिए।

लड़ाई में शत्रु का कितना नुकसान किया जा सकता है और खुद का कितना नुकसान झेला जा सकता है, सब का हिसाब और कीमत लगानी होगी।

यह सब गणित के बाद ही रण में उतरा जाये तो ही आप की जीत की संभावना बढ़ती है अन्यथा आप की हार सुनिश्चित है।

अब HDFC Life वाले किस्से को देखिये। अमेज़न या फ्लिपकार्ट के बहिष्कार से यह किस्सा अलग है। निशाना सधा हुआ है।

आप को याद होगा जब पुलवामा के बाद कुछ लोगों ने ‘हाउ इज़ द जैश’ या ऐसे ही कुछ खून खौलाने वाले पोस्ट्स और ट्वीट्स किए थे तो अपनी तरफ से भी ऐसे ही हमले हुए थे।

यहाँ मुझे यह नहीं कहना कि अपनी तरफ से ऐसा कुछ नहीं होता तो उस बाजू से नहीं होता। यह मानना मूर्खता होगी।

ऐसे हमले सोच समझकर किए जाते हैं और यह उस तरफ से जमीन आज़माने की कोशिश है। HR जो वाम की कर्मभूमि मानी जाती है या फिर राष्ट्रवादियों की नसबंदी का ऑपरेशन थियेटर माना जाता है, उसकी ताकत आज़माने का यह मौका था।

वैसे मोदी जी जीत रहे हैं यह अंदाज आया तब 21 मई 2019 को मैंने लिखा था ‘लड़ाई का नया लेवल – कंपनी पॉलिसी‘ जिसमें ऐसी लड़ाइयों का आगाज़ है तथा कुछ सुझाव भी हैं।

विदेश में तो वामी टेक्नोलॉजी के सहारे ढूंढ ढूंढकर सोशल मीडिया में विरोधकों की आर्थिक हत्या कर देते हैं, और वास्तविक हत्या से भी उन्हें अधिक परहेज़ नहीं रहता। यह उस लेख का लिंक है, अवश्य पढ़िये।

[लड़ाई का नया लेवल – कंपनी पॉलिसी]

रही बात HDFC Life की। मुझे नहीं लगता कोई उस बैंक से अपना खाता बंद करने जाएगा। वैसे भी उस बैंक को रीटेल कस्टमर्स नहीं चाहिए, और मुझे नहीं लगता कि कोई HNI वहाँ अपना खाता इस कारण बंद करेंगे। वे तो सोशल मीडिया पर होंगे भी नहीं।

HDFC Life की बात करें, तो क्या आप उसके कस्टमर हो सकते हैं? क्या आप उनके ऐसे कस्टमर हो सकते हैं जहां उनको आप का ख्याल है कि वे आप के दबाव के कारण कुछ करेंगे? उनकी साइट देखी है यह लिखने के पहले, मुझे ऐसा नहीं लगता।

इसलिए यह मूव बड़ी सोची समझी है। कुछ खास नहीं होगा।

सोचना है तो अपनी इकोसिस्टम पर सोचिये। हम फिर से वही पाँच साल पहले वाले मोड में जा रहे हैं जहां ‘हमने वोट दे दिया अब मोदी की ज़िम्मेदारी है, अब हम तो बस देखेंगे’ वाली मानसिकता है। ऐसी ही मानसिकता रखेंगे तो फ्रस्ट्रेशन के सिवा कुछ हाथ नहीं आने वाला।

साल पहले मैंने जब मोदी को समर्थन देने का ऐलान किया था तब मैंने साफ लिखा था कि मैं रणनीतिक समर्थन दे रहा हूँ। किसी पाठक की पृच्छा का उत्तर भी दिया था कि समर्थन दे रहा हूँ, समर्थन कर नहीं रहा।

फर्क है। मुझे उनकी वापसी क्यों चाहिये उसके कारण मेरे लिए स्पष्ट हैं और वे सब के सामने समय समय पर रखता भी आया हूँ। आज भी समर्थन दे रहा हूँ। बाकी अपने उद्देश्यों पर भी स्पष्ट हूँ, राष्ट्र सर्वोपरि है। बाकी सब कुछ दोहराने के आवश्यकता नहीं।

Lawfare का अब खुलकर प्रयोग होगा इसलिए मेरा ‘कंपनी पॉलिसी’ वाला लेख अवश्य पढ़ें। लिंक ऊपर दे चुका हूँ।

माँ काली रक्षा करे। वंदे मातरम। जय हिन्द।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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