प्रधानमंत्री मोदी की जीत में इनका योगदान भी अविस्मरणीय

पिछले डेढ़-दो वर्षों के दौरान शाम 5 बजे के बाद कोई भी न्यूज़ चैनल खोलते ही उनपर चल रही किसी भी राजनीतिक बहस में राहुल गांधी के इन मीडियाई नवरत्नों में से कोई ना कोई चेहरा चमकता बमकता नज़र आ जाता था।

उसके हाथों में अफलातूनी आंकड़ों के अजब गज़ब दस्तावेज़ों की गड्डी भी ज़रूर होती थी। उस गड्डी को हिला-हिलाकर वो चेहरा, प्रचण्ड अभद्रता के साथ अत्यन्त अराजक शैली में चिल्ला चिल्लाकर इस दावे के साथ सरासर सफेद झूठ परोस रहा होता था कि देश आर्थिक रूप से तबाह बरबाद हो चुका है… बेरोज़गारी भुखमरी के दावानल में देश खाक़ हुआ जा रहा है… देश के किसान प्राणघातक संकट की जानलेवा आग में झुलसे जा रहे हैं।

कुल मिलाकर ये नवरत्न अपने इस न्यूज़ चैनली हुड़दंग से यही सन्देश देने में जुटे रहते थे कि देश में भयंकर हाहाकार मचा हुआ है… आदि आदि…

लेकिन ऐसा करते समय ये नवरत्न यह भूल जाते थे कि मीडिया के जरिये झूठ फैलाकर लोगों को बरगलाने का वह राजनीतिक दौर लगभग 8-10 साल पहले दम तोड़ चुका जिस दौर के सहारे कांग्रेसी तंत्र ने 2004 में स्व. अटल जी की सरकार की बलि सफलतापूर्वक ले ली थी।

आज इंटरनेट नाम का वह ब्रह्मास्त्र इस देश के लगभग 60 करोड़ लोगों के पास उपलब्ध है जिसके माध्यम से किसी एक तथ्य या सूचना की प्रामाणिक/ आधिकारिक पुष्टि असंख्य स्त्रोतों के द्वारा तत्काल हो जाती है।

लेकिन इससे इतर, इन नवरत्नों ने अपनी अभद्र अराजक शैली में देश की आंखों में सरासर झूठ परोसने की कुत्सित कोशिशों से सोशल मीडिया में मुझ जैसे एक सामान्य मोदी समर्थक को एक सिपाही में परिवर्तित कर दिया था।

कोढ़ में खाज यह कि मैं कोई अकेला नहीं था। मेरे जैसे लाखों लोगों को इन लोगों ने अपने झूठ फ़रेब से जाग्रत और सक्रिय कर दिया था। उन लाखों लोगों ने इनके झूठ फ़रेब, इनकी अभद्रता, इनकी अराजकता के खिलाफ कमर कस ली थी, मोर्चा संभाल लिया था।

इन लाखों लोगों के पास 30 करोड़ फेसबुक यूज़र, 40 करोड़ वॉट्सऐप यूज़र तथा ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंकडिन के लगभग 5-6 करोड़ यूज़र का विशाल मंच उपलब्ध था, जहां इन नवरत्नों के सरासर सफेद झूठ के खिलाफ ‘जोत से जोत जलाते चलो’ की तकनीक के द्वारा तथ्यों साक्ष्यों तर्कों के साथ सच को कुछ ही मिनटों और घण्टों में करोड़ों लोगों तक पहुंचाया जा रहा था।

इनके हर झूठ की धज्जियां लगातार तत्काल उड़ रहीं थीं। परिणामस्वरूप इस नवरत्न गैंग समेत पूरी पार्टी की छवि ही ‘झूठों की पार्टी’ की बन गयी। यही कारण है कि 6000 रूपये हर महीने देने के पार्टी के वायदे को समाज के किसी वर्ग ने किंचित भी गम्भीरता से नहीं लिया और सरासर झूठ मात्र ही माना।

यह प्रमाण है इस तथ्य का कि आम जनता के मध्य पार्टी की साख पूरी तरह नेस्तनाबूद हो चुकी है। सर्वाधिक हास्यास्पद स्थिति यह है कि जब मेरे जैसे व्यक्ति इनके झूठ फ़रेब को उजागर कर आईना दिखा रहे थे तो मूर्खों की ये फौज उनको ‘आईटी सेल’ वाला कहकर नकार रही थी।

जबकि भाजपाई आईटी सेल की बौद्धिकता, सक्रियता, नकारे और निकम्मेपन का आलम यह था कि जब गृहमंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव लड़ रहे थे तब लखनऊ में मेरे फोन पर बहराइच और ना जाने कहां कहां के भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में कॉल और SMS लगातार आते रहे किन्तु राजनाथ सिंह के समर्थन के अनुरोध का एक भी SMS या कॉल नहीं आयी। लेकिन लखनऊ में मतदान सम्पन्न हो जाने के बाद 3-4 कॉल आईं की कृपया राजनाथ सिंह जी को अपना वोट दें।

इसीलिए आज यह लिखना जरूरी समझा कि प्रधानमंत्री मोदी की जीत में कांग्रेस के इन नवरत्नी झूठों का भी महत्वपूर्ण योगदान है जिन्होंने सोशल मीडिया में मोदी समर्थकों की एक ऐसी फौज खड़ी कर दी जिसके समक्ष इनका टिकना असम्भव था।

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