अपनी सुरक्षा को लेकर लापरवाह हम भारतीय

सूरत के कोचिंग सेंटर में आग से 20 बच्चों की मृत्यु ने दिल को दुखी कर दिया। एक तो गैर कानूनी तरीके से छत पर क्लास चलाई जा रही थी और फिर उस पूरी बिल्डिंग में आने जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता था।

विकसित देशों में आम नागरिकों को सुरक्षा के प्रति जानकारी दी जाती है; उन्हें खतरों से आगाह किया जाता है और उन खतरों से बचने की प्रैक्टिस करवाई जाती है।

कितनी ही बार मेरे पुत्र के स्कूल में फायर ड्रिल होती है, यानी कि अगर स्कूल में आग लग जाए तो क्या करना चाहिए? कहां से बचकर निकलने के रास्ते हैं? और अगर बचने की रास्तों में भी आग लगी हो तो उस समय क्या करना चाहिए जिससे कुछ समय सांसें चलती रहे जब तक फायर ब्रिगेड न आ जाए?

उदाहरण के लिए, आग लगने पर आप को क्लासरूम और कॉरिडोर से लेट करके सीढ़ी की तरफ चलना चाहिए क्योंकि आग का धुआं ऊपर की तरफ एकत्र होता है और नीचे भूमि के पास ऑक्सीजन फिर भी होती है। उस समय लिफ्ट भी नहीं लेनी चाहिए।

इस प्रकार की फायर ड्रिल संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हर 3 महीने में एक बार होती है। हर मंज़िल पर अग्निशमन विभाग के अधिकारी आते हैं सारे स्टाफ को लाउडस्पीकर से एक जगह इकट्ठे होने को बोला जाता है और फायर ड्रिल के बारे में बतलाया जाता है।

इसी प्रकार की सावधानी कार या स्कूटर चलाने में करनी चाहिए। सीट बेल्ट लगाना, लेन में ड्राइव करना, स्टॉप साइन पर रुक जाना, लाल बत्ती को जंप न करना, कुछ सौ मीटर बचाने के लिए गलत दिशा में गाड़ी न चलाना, यह उसी सुरक्षा के आवश्यक नियम है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में जब सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य नहीं था तब भी हम पति-पत्नी गाड़ी में सीट बेल्ट पहन कर बैठते थे। अमेरिका में पीछे की सीट पर भी हम सीट बेल्ट पहनते हैं। भारत में जब ओला या उबेर से टैक्सी बुलाते हैं, तो अगर पीछे की सीट बेल्ट काम नहीं करती तो उस टैक्सी को वापस कर देते हैं। विकसित देशों में शिशुओं को आगे की सीट पर गोद में भी नहीं बैठाया जा सकता। उनकी अपनी स्वयं की सुरक्षित सीट पीछे लगाई जाती है।

भारत में किसी भी रिहायशी या व्यावसायिक बिल्डिंग में सुरक्षा के नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ा कर अतिरिक्त कमरे बनवा लिया जाते हैं। जो जगह खुली होनी चाहिए थी उसे कवर कर दिया जाता है तथा दुकान के आगे सार्वजानिक स्थल पर सामान लगा कर, गलत पार्किंग कर कर मुख्य मार्ग पर भी बाधा डाल दी जाती है। अगर कभी आग लग जाए तो, मार्ग पर अतिक्रमण होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को वहां तक आने में काफी दिक्कत आती है और जान बचाने का कुछ मिनट का मूल्यवान समय बर्बाद हो जाता है।

जब नियमानुसार बेसमेंट नहीं बनवाया जा सकता तब भी दुकानदार गैरकानूनी तरीके से बेसमेंट बनवा देते हैं।उन्हें यह समझ में नहीं आता कि बेसमेंट पर प्रतिबंध किन्ही कारणों से लगाया गया है। अगर बरसात से पानी भर गया तो बेसमेंट में रखे सामान को नुकसान होगा ही तथा वहां पर लगे हुए बिजली के उपकरणों से करंट फैलने और आग लगने का भी खतरा है।

लेकिन लखनऊ के गोमती नगर के दुकानदारों ने गैरकानूनी तरीके से बेसमेंट भी बनवाया है उसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण को घूस भी दी है और हर साल घूस देने के लिए बाध्य हैं क्योंकि उनकी दुकान की नींव ही गैरकानूनी तरीके से पड़ी है। उस घूस का पैसा वह अपने प्रोडक्ट या सेवाओं के दाम बढ़ाकर वसूलना चाहते हैं और फिर वह शिकायत करते हैं कि कहीं और सामान सस्ता मिल जाता है।

अमेरिका में हर 50 से 100 मीटर की दूरी पर फायर हाइड्रेंट लगे हुए हैं जहां से आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पानी खींच सकती है। एक फायर हाइड्रेंट मेरे घर के लॉन में भी लगा हुआ है। यह सारे फायर हाइड्रेंट किसी ना किसी घर के लॉन में लगे हुए हैं और इन्हें कानूनी रूप से हमें स्वीकार करना होता है। मेरे फायर हाइड्रेंट से आसपास के सात-आठ घरों में आग लगने पर 5 मिनट के अंदर आग बुझाई जा सकती है।

इसके अलावा मेरे घर में फायर अलार्म तथा कार्बन मोनोऑक्साइड का अलार्म भी लगा है। अगर घर में धुआं भर जाए या कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाए तो अलार्म चालू हो जाता है।

ज़िंदगी में हमारी सारी सावधानियों के बावजूद दुर्घटना हो सकती है। आवश्यक यह है कि हम नियम कानून का पालन करें। दुर्घटना होने की स्थिति में बचने के उपाय मालूम हों तथा उन उपायों की समय-समय पर प्रैक्टिस भी की जाए।

क्योंकि सुरक्षा एक सतत प्रक्रिया है।

ज़िंदगी अमूल्य है। इसकी सुरक्षा हमारे हाथों में ही है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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