लोकसभा चुनाव 2024 में 50% से अधिक होगा भाजपा का वोट शेयर

2014 में भाजपा को जहां 31% वोट मिले थे, भाजपा नीत राजग को 39% वोट मिले थे। उसके बाद के 5 सालों में लुट्येन्स गिरोह या नया शब्द ‘खान मार्केट गैंग’ ने हमेशा ये कहकर प्रचारित किया कि मोदी को सिर्फ 31% लोगों ने चुना है – इसी वाक्य को एक्सटेंशन करते हुए एक नया वाक्य बनाया गया कि 69% लोगों ने मोदी के खिलाफ वोट दिया है।

सबसे पहली बात तो मोदी को 39% ने चुना था, 31% ने नहीं – यह तथ्य हमेशा से दबाया जाता रहा है।

इस बात से आगे बढ़ें, तो भारत में चुनाव अमेरिका की तरह बाइपोलर नहीं होता। हर सीट पर सिर्फ 2 ही उम्मीदवार नहीं होते, अनेकों उम्मीदवारों में first past the post, मतलब जिसके सबसे ज्यादा मत, वो विजेता। यहां तक कि 1984 में सहानुभूति की लहर में बनी 405 सीटों वाली राजीव गांधी सरकार भी 50% पार नहीं कर पाई।

हमारे यहां ‘फर्स्ट प्रेफरेंस’, ‘सेकंड प्रेफरेंस’ जैसा सिस्टम भी नहीं जिससे ये पता चल सके कि जो भाजपा को वोट नहीं डाल कर किसी और को डाल रहे हैं, वो सच में भाजपा विरोधी है या सिर्फ किसी और को ज्यादा तरज़ीह दे रहे हैं।

इन सबके बावजूद इस बार का चुनाव सही मायनों में wave election थे। करीब 260 सीटों पर NDA का वोट शेयर 50% से ज्यादा रहा, जिनमें से 230 सीटों पर अकेली भाजपा जीती है।

ये इसलिए भी ज़बरदस्त माना जा सकता है, क्योंकि हरियाणा जैसी जगहों पर जहां चतुष्कोणीय मुकाबला था या उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में जहाँ त्रिकोणीय था, वहाँ भी भाजपा अधिकांश जगहों पर 50% का आंकड़ा पार कर गयी।

350 सीटें जीतना, और उसमें भी 260 सीटों पर 50% वोट शेयर प्राप्त करना एक ज़बरदस्त उपलब्धि है। पूरे देश को देखा जाए तो भाजपा को लगभग 38% और NDA को 45% वोट मिला है। देश के 45% मतदाता एक व्यक्ति के पीछे पूरे भरोसे से खड़े हैं।

और ये तब है जब देश का एक बहुत बड़ा वोटर वर्ग – लगभग 12 करोड़ – हमेशा भाजपा को हराने के लिए ही वोट डालता है। भाजपा हर जगह -15 (माइनस 15), -20 या कहीं कहीं पर -30/35 से ही मैदान में उतरती है।

अगर तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक अपने पिछले प्रदर्शन का आधा भी दोहरा पाती, और आंध्र में इतना भाजपा-विरोधी सेंटीमेंट नहीं होता तो शायद NDA का वोट शेयर 48% पार कर जाता। ये दो ही बड़े राज्य थे, जहां भाजपा का वोट शेयर 5% से कम था, उसमें भी तमिलनाडु में NDA को करीब 30% वोट शेयर मिला है।

जिस तरह से पिछले 5 साल में काम हुआ है, जिस तरह से पार्टी पूर्वोत्तर, बंगाल और ओडिशा में पहुंची है – अगर वही मोमेंटम निरंतर बना रहता है तो बंगाल, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, केरल भाजपा के लिए नई टेरिटरी होगी।

हम 2024 में 50% पार करने की ओर देख रहे हैं। साथ ही उतना आशावान हूँ तब तक वो इकोसिस्टम भी खत्म हो जाएगा जो 24 करोड़ लोगों के चयन को 31%, 39% या 45% के बंधनों में समेट कर जनता की चयन-बुद्धिमत्ता पर अपने प्रोपेगैंडा के कारण निरंतर संदेह-सवाल उठाते रहे हैं।

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