जानिए, किन तीन तरह के वोटरों ने लड़ा ये चुनाव

चुनाव ख़त्म… परिणाम भी 23 मई को लगभग दोपहर तक आ जाएगा… अभी Exit Poll से उपजे परिणामों का समय चल रहा है।

एग्ज़िट पोल पर कुछ बहस देखीं और तमाम लोगों के तर्क-कुतर्क देखे-सुने… इस तर्क-कुतर्क में लगभग प्रत्येक पार्टी के प्रवक्ताओं की कुतर्की नज़र आई – क्या पक्ष क्या विपक्ष।

चुनाव का अंदाज़ न तो विपक्ष ने लगाया और न ही सत्ता पक्ष ने लगाया… चुनाव आखिर हुआ क्या, हुआ कैसे, और परिणाम क्या होंगे, इस पर सही मन्थन न करने का जैसे इन TV पर बैठे लोगों ने, ज़मीन से कुछ ऊपर कदम रखने वाले नेताओं और उनके चन्टू बन्टू ने तय कर रखा है।

चुनाव तीन तरह से वोटरों ने लड़ा… मेरे होश में ये पहला चुनाव है जो वोटर स्वयं लड़ रहे थे… तीन तरह के ये वोटर कैसे लड़े, बताने की कोशिश कर रहा हूँ…

पहला : दिसंबर 2016 या जनवरी 2017 का समय था, उप्र विधान सभा के चुनाव से पहले और नोट बदली के बाद का समय… बनारस में था और लंका जाना था। बनारस कैंट से ऑटो में बैठे। मैं पीछे और मित्र अवनीश आगे… हमारे बगल में गाँव की दो बुजुर्ग महिलाएं बैठी थीं, एक गाँव की रही होंगी बात करने से ऐसा लग रहा था…

रास्ते भर वो अपने खेतों में पैदा होने वाली फसल मटर, तीसी, सरसो, गेहूँ आदि के नफा नुकसान की बातें करती रहीं। ऑटो भेलूपुर से आगे रविन्द्रपुरी कॉलोनी जैसे ही पहुंचता है एक महिला की नज़र पीएम मोदी के बनारस दफ्तर पर पड़ती है…

और वो अचानक सब बात छोड़कर, लगती है मोदी को आशीर्वाद देने “ए बिसनाथ बाबा, हमरो अरदुआई मोदी के लगि जा, ए दुर्गा माता मोदी के रक्षा करे…”, “जा ए मोदी तु जिनगी भर प्रधानमंत्री रहबा…”, “जवन लवना (लकड़ी) क सांसत रहल, अंखिया धुँआ से अन्हरा जाती रहल, तू कष्ट दूर कईला…”

तब तक दूसरी महिला बोली, “हमहू के मिलल गैसवा… मोदी जबले धरती पे रहिहें इहे राज करिहें…”, और फिर दूसरी महिला पहले को अपनी ओर से ही बताने लगी… “सुनली हईं कि मोदी शहर में गैस क पाइप बिछावत हउवन… शहर में गैस पाइप से मिली और गाँव में सिलिंडर से…”, और फिर दोनों महिलाएँ मोदी को आशीष देने में डूब गईं…

चूँकि उस समय कम्युनिस्ट एजेंडा जोर शोर से चल रहा था कि गैस का दाम गाँव का गरीब कहाँ से देगा… तो हमने उन महिलाओं से पूछ ही लिया कि ‘ए काकी, सिलिंडर 800 रूपया से ज़्यादा का है, पैसा कहाँ से मिलेगा इतना महँगा खरीदने का?’

महिलाओं ने बताया कि 844 देने पे मिलता है लेकिन एक महीना बाद 350 वापस आ जाता है खाता में… और वो खाता भी मोदी ने खुलवाया है… “लौना खोजल, लकड़ी काटल, बरसात में भीजे से बचावल, सर्दी में ओस से बचावल और फूँक के छाती में धूवाँ भर के खांसल… ई सब बीपत से लाख गुना सस्ता बा सिलिंडर…”

तो इस तरह का गँवई और अभावों में जीता वोटर खुद ही कम्युनिस्ट एजेंडा को ध्वस्त कर के आराम से रह रहा था जिसका TV टाइप लोगों को भान ही नहीं है… उसको मोदी से कुछ ऐसा मिला था कभी जिसकी कल्पना मात्र करना उसके लिए असंभव था…

ऊपर से सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट, बालाकोट के बाद अभिनन्दन की तत्काल वापसी जैसे मामले ने उनके हीरो को सुपर हीरो का दर्ज़ा दे दिया… उस वोटर ने जात-पात किनारे करके खुद को मोदी का प्रचारक और वोटर बना लिया था…

इस वोटर के लिए मायावती-अखिलेश का गठबन्धन कोई मायने नहीं रखता था… उसका हाथ उठता है मोदी को आशीर्वाद के लिए और अँगूठा दबाता है मोदी का निशान दबाने को जो कि कमल है… मोदी को कहा गया हर अपशब्द, हर गंदे नारे और मोदी पर हर हमले को उसने निजी तौर पर लिया… और उसका बदला उनसे EVM पर कमल का बटन दबा के लिया…

दूसरा : आम शहरी कस्बाई कामकाजी और व्यापारी वर्ग… ये वर्ग नोट बदली और GST से शुरू में थोड़ा विचलित हुआ… आम तौर पर ये वर्ग बहुत जल्दी खुद को नए बदलाव में ढाल लेता है… उसके लिए मोदी या IT विभाग से एक थैंक यू का पत्र भी मायने रखता है।

शुरू की परेशानी में वो डगमगाया, लेकिन जब उसने देखा कि उसके ईमानदार होने और सकारात्मक धारा में बहने से फायदे मिल रहे हैं…

साथ ही उसने देखा कि भ्रष्टाचार, बेईमानी और काली कमाई के दम पर शरीर भर सोना लटकाए, बड़ी बड़ी लक्ज़री गाड़ियों में घूमने और बड़ी कोठियों में रहने वाले जो मात्र 2.5 से 3 लाख का ITR भरते, धौंस जमाते लोगों की लंका लग रही है तो…

सड़क पर स्कूटर या सस्ती कार से चलने वाला लेकिन भौकाली लोगों से कई गुना ईमानदारी से टैक्स भरने वाला ये व्यक्ति ख़ुशी से झूम उठा और उसको मोदी में वो दिखाई देने लगा जो इन पैदाइशी नामदारों और काली कमाई के दम पर धौंस जमाने वाले का गुरूर उतार के सड़क पे ला देने वाला है…

मोदी द्वारा गाड़ी से लाल बत्ती उतार देने का जश्न उसने मनाया… उसको पहली बार लगा कि हमारे पैसे का कोई ढंग से इस्तेमाल कर रहा है… उसको लगा कि चिद्दि चोरों और पैर पकड़वाने वालों का भौकाल और गुरूर उतार के औकात पे लाने वाला आ गया है…

इस वर्ग के मतदाता को भी मोदी पर हमला, गन्दी गालियों जैसी भाषा और फूहड़ नारों से गुस्सा आया… शहरों कस्बों में कभी बम धमाकों के डर में जीने वाला ये वोटर 5 साल बेख़ौफ़ रहा… उसने देख लिया था कि मोदी ने इस खौफ को ख़त्म कर दिया है…

उसने देख लिया था कि धमाकों को करने वाले से सख्ती से निबटा जा रहा है… सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट, बालाकोट के बाद अभिनन्दन की तत्काल वापसी का मामला उसके लिए ख़ास था, क्योंकि वर्षों से पाकिस्तान परस्त ताकतों से मार खाते खाते सिर्फ कुढ़ने सिवा वो कुछ नहीं कर सकता था…

मोदी का एक्शन उसके लिए अभिभूत करने वाला था… मोदी उनका भी सुपर हीरो बन गए थे… इस वोटर ने मोदी पर तंज़, गंदे नारे और बदज़ुबानी का जहाँ तहाँ विरोध किया… इस वर्ग ने भी EVM में कमल वाला बटन दबा के इस सबका बदला लिया…

तीसरा : ये वो वर्ग है तो पहले और दूसरे में फिट नहीं बैठते… उनका कालाबाज़ारी का धंधा बैठ गया था, उनका रियल इस्टेट से अनाप शनाप पैसा बनाने का व्यापार थम गया था… ई-ऑक्शन और ई-टेंडर से उनकी सेटिंग करके खिला पिला के खाने पीने की दुनिया उजाड़ हो गई थी।

नोट बदली ने उनके गद्दे के नीचे दबे रुपये किसी तरह बैंक में पहुंचा दिए, जिसको वो क्लेम नहीं कर सकते या फिर वहीँ सड़ा दिया… सेटिंग जुगाड़बाज़ी, फ़र्ज़गिरी, चोरी, कालाबाज़ारी का सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन करने वाले इन लोगों के लिए मोदी असहनीय हैं…

इन लोगों को दूसरों से सलाम बजवाने की आदत है… इन लोगों को दूसरों से पैर छुवाने की आदत है… उनको कम्युनिस्ट धाराओं पर बोलना पसंद है लेकिन गरीब का गैस पर खाना पकाना या पक्के छत पर रहना अखरता है…

खुद के बीमार होने पर 5 सितारा हस्पताल जाना अच्छा है लेकिन सलाम बजाते गरीब का इलाज होकर वापस आना ठीक नहीं लगता क्योंकि गरीब की बीमारी और गरीबी इनको पैसा बनवाती है विभिन्न तरीकों से…

इस वर्ग को गरीबी चाहिए क्योंकि गरीब की गरीबी से इनका पैसा बनता है… इस वर्ग को वेदांता या जिंदल नहीं दिखता, इनको अडानी दिखता है… इस वर्ग को गुलामी में चली चोर सरकार के समय अम्बानी को मिले लाखों करोड़ का ठेका नहीं दिखता… इस वर्ग को लाखों करोड़ का गबन नहीं दिखता…

लेकिन इस वर्ग को चिल्ला चिल्ला के उसी अम्बानी या अडानी को आज के मिले कामों पर आपत्ति है… ये वर्ग किसी भी बिचौलियारहित व्यापारिक समझौते को मानने को तैयार नहीं… इस वर्ग को इस लिए मोदी असहनीय हैं.. इस वर्ग पर आश्रित रहने वालों या उसी इकोसिस्टम में रहकर जीने वालों को भी मोदी से विरोध है…

ऊपर लिखे गए पहले वर्ग द्वारा मोदी को मिला आशीर्वाद, दूसरे वर्ग का मोदी के साथ डटे रहने का संकल्प, अगर इन दोनों को मिला दिया जाए तो क्या तीसरा वर्ग भारी पड़ेगा?

मेरी अनन्य यात्राएं, उनका अनुभव और खासकर पिछले 6 माह की केरल, कर्णाटक, बिहार, उप्र, बंगाल, पूर्वोत्तर आदि की यात्राएँ जिसमें वोट यात्रा पर ज़्यादा ध्यान दिया वो मुझे कहती है कि पहले दो वर्ग ने तीसरे वर्ग को बुरी तरह हरा के लथेड़ डाला है… बाकी 23 मई 2019 कल ही है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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