हरेक आदम में मोदी छुपा बैठा है, जहाँ में रहकर कहाँ उसको छोड़ पायेंगे

चौखट जो शब्द लांघ जायेंगे
उनको हम दीवार में चुनवायेंगे

हज़ार गालियाँ फिर कृष्ण सुने
कितने शिशुपाल वधे जायेंगे

शब्द मेरे सारथी हैं पीड़ा के
आग का दरिया, लांघ जायेंगे

गुदगुदी आपने शुरू की है
हम भी गोदेंगे गुदगुदायेंगे

नून पोतेंगे खिलायेंगे काटकर खीरा
कब्जियत ठेके पर मिटायेंगे

ईद बकरीद की रौनक रखो चेहरे पर
पाठ को खस्सी हम बनायेंगे

जिसे समझा नहीं मेहरारू ने
आप उसे खाक़ समझ पायेंगे

धूर में बर रहा जेवर मिरि जां
साँड भईंसा सब बाँधें जायेंगे

छुपा के रखिये मुहब्बत को
बच्चे फुलौना समझ फुलायेंगें

सदी की जान ली है मोदी ने
शोध अब उस पर किये जायेंगे

नख शिख आप में भरा है लड्डू पेड़ा
जुटे हैं गिद्ध नोच खायेंगे

हरेक आदम में मोदी छुपा बैठा है
जहाँ में रहकर कहाँ उसको छोड़ पायेंगे

  • नरेंद्र पांडेय

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY