जीते तो समस्या नहीं, बस हार के लिए EVM की बलि चढ़ाते हैं विपक्षी

चुनावों को ले कर पिछले 5 साल में विपक्ष का एक ही बेसुरा राग चल रहा है, कि चुनाव आयोग EVM में गड़बड़ी कराता है।

अब 22 दल मिल कर इसके लिए तीन बार सुप्रीम कोर्ट जा चुके और आज फिर चुनाव आयोग के दरवाजे पर माथा फोड़ने गए थे।

ये EVM की बलि नहीं चढ़ा रहे बल्कि मुझे तो लगता है ये सभी मिल कर EVM का सामूहिक बलात्कार कर रहे हैं।

चुनाव आयोग ने किसी भी सरकार के होते हुए विश्व में भारत जैसे सबसे बड़े लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए एक अद्भुत छवि बनाई है जिसे विपक्ष धूमिल करने की कोशिश कर रहा है।

आयोग की छवि बिगाड़ना राहुल गाँधी की मानसिकता से मेल खाता है जिन्होंने मोदी की छवि बिगाड़ने के लिए मुहिम चलाई थी।

ऐसे में आयोग की छवि ख़राब करना तो कोई बड़ी बात नहीं है।

लेकिन विपक्ष EVM के खिलाफ हल्ला बोल कर अपने आप को ही बेनकाब कर रहा है और उपेंद्र कुशवाहा नामक एक नेता तो हथियार उठाने की धमकी दे रहा है।

विपक्ष अपने को बेनकाब ऐसे कर रहा है क्योंकि इन 5 साल में इन्ही EVM के चलते विपक्ष ने अनेक राज्यों में अपनी सरकारें बनाई है, लेकिन तब कभी उस पर उंगली नहीं उठाई।

आइये देखते हैं पिछले 5 साल में विपक्ष ने कहाँ कहाँ जीत हासिल करके सरकारें बनाई थी –

  1. फरवरी 2015 केजरीवाल दिल्ली – 70 में से 67 सीट मिली थी ‘आप’ को लेकिन आज केजरीवाल EVM के खिलाफ खड़े हैं।
  2. ममता बनर्जी मई 2016 में 211 सीट ले कर बंगाल की मुख्य मंत्री बनीं।
  3. एच डी कुमारस्वामी – मई 2018 में कर्णाटक के सी एम बने।
  4. छत्तीसगढ़, राजस्थान, एम पी में कांग्रेस ने दिसंबर 2018 में सरकारें बनाई और इतना ही नहीं, भाजपा का वोट प्रतिशत 4-5% गिरा था। EVM में गड़बड़ होती तो भाजपा का वोट क्यों गिरता?
  5. नितीश कुमार – नवम्बर 2015 लालू के साथ महागठबंधन के नेता के रूप में सी एम बने।
  6. उत्तर प्रदेश में मार्च 2017 में भाजपा की सरकार बनी तो अमरिंदर सिंह ने 16 मार्च, 2017 पंजाब में कांग्रेस की तीन चौथाई बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बनाई।
  7. गोवा में मार्च 2017 में भाजपा अपने आप बहुमत हासिल नहीं कर सकी।

इन सभी चुनावों में विपक्ष ने कभी EVM का रोना नहीं रोया। विपक्ष का रोना तब ही शुरू होता है जब उसकी हार होती है। मतलब मीठा मीठा गप और कड़वा कड़वा थू!

विपक्ष पहले ही नरेंद्र मोदी के सामने अपनी विश्वसनीयता जनता के सामने स्थापित नहीं कर पाया और ऐसे EVM के खिलाफ विधवा विलाप करके विपक्ष अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो रहा है।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक तरफ तो निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग तारीफ की है लेकिन आज उन्होंने ये भी कह दिया कि आयोग EVM को ले कर अटकलों पर विराम लगाये।

कैसे विराम लगाये? जो विपक्ष को पसंद आये? क्या उनकी मान ले कि हाँ EVM में गड़बड़ है?

आयोग ने आज फिर 22 दलों के सभी आरोप नकार दिए हैं।

सरकार को बस विपक्ष के मंसूबों से सावधान रहना होगा क्योंकि हार के बाद विपक्ष देश भर में (खासकर उन राज्यों में जहाँ उनकी सरकारें हैं) दंगे करवा सकता है। बंगाल में तो हो ही सकते हैं जिनमें हिन्दू बुरी तरह निशाना बनेंगे।

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