जो रिजेक्ट हुआ था उसी ने तोड़ दिए सारे रिकॉर्ड

फ़िल्म जगत के एक प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित कैमरा मैन जब फ़िल्म प्रोड्यूसर बने और महंगे बजट की फ़िल्म का निर्माण शुरू किया तो उस फ़िल्म के पूरी होने से पहले ही एक दुर्घटना में घायल होने के कारण उनका देहांत हो गया।

इसके परिणामस्वरूप फ़िल्म गम्भीर आर्थिक संकट में फंस गई। फ़िल्म फंसने के साथ ही प्रोड्यूसर साहब के परिवार पर भी गम्भीर आर्थिक संकट मंडराने लगा था।

अतः सभी कलाकारों ने फैसला किया कि अब फ़िल्म के लिए कोई पैसा नहीं लिया जाएगा तथा सब मदद कर के फ़िल्म को पूरा करेंगे। इस तरह जैसे तैसे फ़िल्म पूरी हुई।

उस समय आज की तरह पूरे देश में एकसाथ फिल्म नहीं रिलीज़ की जाती थी। फ़िल्म पहले मुंबई में रिलीज़ होती थी। मुंबई में फ़िल्म के प्रदर्शन के आधार पर प्रिंट बनाकर देश भर में भेजे जाते थे।

अतः इस फ़िल्म को भी पहले मुंबई में रिलीज़ किया गया। फ़िल्म बुरी तरह फ्लॉप हुई। अतः पहले हफ्ते में ही उतार ली गयी।

प्रोड्यूसर साहब के बहुत अच्छे मित्रों में प्रसिद्ध निर्माता निर्देशक अभिनेता मनोज कुमार भी थे। उन्हीं की एक फ़िल्म की शूटिंग के दौरान घटी दुर्घटना में घायल होने के बाद ही प्रोड्यूसर साहब का देहांत हुआ था।

अतः फ़िल्म मनोज कुमार को दिखाई गई तथा उनसे राय मांगी गई कि इसमें क्या बदलाव किया जाए? फ़िल्म देखने के बाद मनोज कुमार ने राय दी कि फ़िल्म में कोई कमी नहीं है, बस एक कमी है कि फ़िल्म बहुत भारी हो गयी है। इसको थोड़ा हल्का करने के लिए एक धूम धड़ाके वाला गाना फ़िल्म में जोड़ दो।

आर्थिक संकट से जैसे तैसे बनी फिल्म के लिए गाना लिखवाया जाए, फिर रिकॉर्ड और शूट किया जाए, यह भी एक समस्या थी।

लेकिन फ़िल्म के संगीतकार ने कहा कि मेरे पास धूमधड़ाके की सिचुएशन वाला एक गाना रिकॉर्ड किया हुआ रखा है, जिसे मैंने देव आनन्द की फ़िल्म के लिए तैयार किया था, लेकिन देव आनन्द ने उस गाने को रिजेक्ट कर दिया था।

अतः उसी गाने को फ़िल्म में शामिल कर के शूट किया गया। उसके बाद जो हुआ उससे इतिहास बन गया। उस गाने के साथ दोबारा रिलीज़ की गई उस फिल्म ने सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए थे। इस सफलता में उसी गाने का सबसे बड़ा योगदान था।

आज 40 वर्ष बाद भी उस फिल्म को उसी गाने की वजह से ज्यादा याद किया जाता है, वह गाना फ़िल्म की पहचान बना हुआ है।

प्रोड्यूसर थे मशहूर कैमरामैन नरीमन ईरानी।

संगीतकार थे कल्याण जी आनंद जी।

वह गाना था… खई के पान बनारस वाला…

फ़िल्म थी… नाम बताने की ज़रूरत है क्या!

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