पॉलिटिकल करेक्टनेस का हेलमेट लगाकर बाउंसर को डक करना सीखिए

क्या मोदी ने साध्वी प्रज्ञा को लेकर कुछ गलत बोला?

नहीं! मोदी ने बिल्कुल सही किया।

गलती सर्वथा साध्वी की थी इस बार।

राजनीति क्रिकेट की तरह होती है बहुधा। बाउंसर को डक करना आना चाहिए और बाहर जाती हुई गेंद को छोड़ना भी।

मामला शुरू कहाँ से हुआ?

कमल हासन के बयान से।

कमल हासन का वह बयान बिल्कुल सीधे सीधे वामपंथ द्वारा काँग्रेस को कवर फायर देने जैसा था जो कि उनकी जुगलबंदी का सतत हिस्सा है।

ऐसी गेंदों को डक ही करना श्रेष्ठ होता है। कारण?

कारण स्पष्ट है कि महात्मा गाँधी की जो छवि विश्व के सम्मुख है वह भारत के स्वरूप का भी प्रतिनिधित्व करती है जो एक कड़वा सच है। आपके मेरे चाहने से रातोंरात उसे बदला नहीं जा सकता। गाँधी, खोखले आदर्शों की वह मेज़ है जहाँ आज भी मानवता, विश्वबंधुत्व एवं विश्वकल्याण बैठकर बेहतर विश्व के लिए नित्य चर्चा करते हैं। यह सत्य है।

आप चाहे सर्जिकल स्ट्राइक करिए या एयर स्ट्राइक, आपको आड़ फिर भी गाँधी की ही लेनी है और उसमें कोई बुराई भी नहीं है क्योंकि गाँधी हमारे असेट हैं। और हमारी असेट पर उगी फसल अकेले काँग्रेस क्यों काटे? मोदी ने यही तो किया है, फसल में से हिस्सा ले लिया है सीधे। गांधी देश के असेट हैं तो सम्पूर्ण देश उसका दोहन करेगा अकेले काँग्रेसी नहीं!

पहली गलती सोशल मीडिया की है, वहाँ व्याप्त अथाह मूढ़ भक्तों की है जिन्हें ‘गेंद’ की समझ नहीं है। उन्होंने बेवजह कमल हासन जैसे बुझे हुए पटाखे के फुंके हुए बारूद जैसे मामले को सुलगाया।

दूसरी गलती साध्वी प्रज्ञा की है जिन्होंने चुनावों के सर्वाधिक विषम एवं नाज़ुक समय पर भाजपा के प्रतिनिधि होते हुए, सर्वाधिक चर्चा के केंद्र में होते हुए भी संयम नहीं बरता और डक करने योग्य गेंद को सीधे चेहरे पर खाया। उन्हें समझना चाहिए कि मीडिया कोई यक्ष नहीं है जो जवाब न देने पर मार डाले! मीडिया की समस्त चालबाज़ियों का एक ही हल है – मुस्कुरा के चुप्पी साध लेना और आगे बढ़ जाना।

मोदी के पास अब और कोई विकल्प था ही नहीं…

मोदी आज से 20 वर्ष बाद भी जब स्वेच्छा से प्रधानमंत्री नही होंगे तब भी इस विषय पर उनका यही स्टैंड होगा, जो कि उचित भी है।

मोदी की छवि अंतर्राष्ट्रीय छवि है जिसपर गांधी के अव्यवहारिक आदर्श भी कलगियों की तरह सजे धजे हुए है। गांधी की अहिंसा, मानवता, स्वदेशी एवं निरापद हिंदुत्व की छवि आज भी अच्छी ढाल का काम कर रही है।

साध्वी प्रज्ञा is equal to भाजपा नहीं है, उन्हें पार्टीलाइन एवं अनुशासन का पालन करना ही चाहिए, करना ही होगा।

गोडसे को डिफेंड करना ही हिंदुत्व का सबसे महान कार्य नहीं है, उसे लौटाकर काँग्रेस के पाले में कर देना ही समझदारी है।

मोदी इस समय भाजपा के कप्तान हैं, कप्तान के किसी भी प्लान को आपकी ज़रा सी लापरवाही नष्ट कर दे यह उचित नहीं।

संभल कर खेलिए, बहुत खतरनाक खेल है!

हेलमेट लगाइए पॉलिटिकल करेक्टनेस का और बाउंसर को डक करना सीखिए, यहाँ यह बहुत काम आने वाला है!

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